सावन का महीना पूजा अर्चना के साथ त्योहारों के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है। यही एक ऐसा त्योहार है जिसमें भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेकर बहन की रक्षा से बंधन स्वीकार करता है। वहीं बहने भी सालों भर इस पवित्र दिन की इंजतार में लगी रहती हैं। कई ऐसे भाई हैं जो जीविका आदि को लेकर दूर देश या परदेश में रहते हैं जो अपना सारा काम छोड़कर इस दिन बहन के घर जाकर राखी बंधवाते हैं। इस दिन बहनें भाई को लंबी उम्र के साथ स्वस्थ व सफल होने का आशीर्वाद देता है।

इस वर्ष यह त्योहार 22 अगस्त को है। जिसको लेकर बाजार पूरी तरह से सज कर तैयार हो गया है। बहनें भी खरीदारी में जुट गई हैं। इस बार बाजार में चायनीज राखियों की मांग गिर जाने से दुकानदारों में कुछ उदासी भी देखने को मिल रही है। चकाचौंध से अलग इस बार स्थानीय स्तर पर निर्मित सिक्की व केला के थंभ रेसे से बनी राखियां अधिक पसंद की जा रही है। इसकी मांग अधिक होने के कारण अन्य बाजार सहित दूसरे प्रदेशों में भी सप्लाई होने लगी है।

राखी विक्रेता ब्रजेश कुमार ने बताया कि लोकल राखियों की मांग बढ़ी है। वहीं धर्मेंद्र जयसवाल ने बताया कि रूझान के अनुसार बाजार में सामान उपलब्ध कराया जाता है। इस वर्ष परदेश रहने वाले भाई कोरोना को लेकर आने से परहेज कर रहे हैं। जिसके चलते बाजार में पहले से ही खरीदारी प्रारंभ हो गई। अधिकतर बहनें राखी खरीदने व भेजने के खयाल से समय से पहले ही खरीद प्रारंभ कर दी है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी राखियों की बिक्री बढ़ी है। करीब एक सप्ताह पहले से ही ग्रामीण दुकानदारों के साथ ग्राहकों ने खरीदारी शुरू कर दी है। दुकानदारों ने बताया कि शहरी क्षेत्रों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में ठेला व साइकिल से भी फेरी वालों के द्वारा राखी की बिक्री होने लगी है। जिससे होलसेल बिक्री का बाजार इस बार अधिक चला है।
Input: Dainik Jagran




