संतान की मंगल कामना और दीर्घायु होने के लिए किया जाने वाला जितिया व्रत (जीवित्पुत्रिका व्रत) को लेकर व्रतियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सप्तमी के उपरांत अष्टमी तिथि पड़ने से दो दिन व्रत रहने की बात से व्रती महिलाएं परेशान हैं। कुछ व्रतियों ने सोमवार को ही नहाय खाय की विधि पूरी की। व्रतियों के उलझनों को देखते हुए कई पंडितों ने विचार करने के बाद बुधवार को ही जीवित्पुत्रिका व्रत रखने के पक्ष में सहमति दी है।

मंगलवार को व्रत को लेकर महिलाएं नहाए खाय की विधि पूरी करेंगी। झिगुणी के पत्ते पर खड़ी तेल रखकर पितराइनों को चढ़ाया जाएगा। इसके बाद नोनी की साग, मडुवा की रोटी व झिगुणी की सब्जी समेत अन्य पकवान ग्रहण करेंगी। गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी विनय पाठक ने बताया कि मिथिला पंचांग को मानने वालों मंगलवार व बनारसी पंचांग को मानने वाले बुधवार को व्रत कर रहे हैं।

वहीं, पंडित प्रभात मिश्र, आचार्य अखिलेश कुमार ओझा व पंडित जयकिशोर मिश्र ने महावीर पंचांग के हवाला देते हुए बताया कि मंगलवार को दोपहर 3:05 बजे से अष्टमी तिथि शुरू हो रही है। यह बुधवार के दिन 4:54 बजे तक रहेगा।

Source: Live Hindustan

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