बिहार में भूमि विवाद को कम करने की दिशा में एक नई पहल जल्द शुरू होने वाली है। जिसमें राजस्व न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का क्रियान्वयन थानेदार को हर हाल में करना होगा। ऐसा नहीं करने पर थानेदारों पर कार्रवाई होगी।

राजस्व एवं भूमि सुधार एवं गृह विभाग इस पर मंथन कर रहा है तथा जल्द ही ऐसी व्यवस्था होनी जा रही है जिसमें राजस्व न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के क्रियान्वयन से संबंधित पत्र अंचलाधिकारी और थानेदारों को एक साथ मिलेगी। एक निर्धारित समय में दोनों अधिकारियों को आदेश का क्रियान्वयन करना होगा, अन्यथा इस मामले में दोनों दोषी माने जाएंगे।

राज्य में राजस्व न्यायालय द्वारा एक वर्ष में लगभग 10 हजार भूमि से संबंधित आदेश जारी किए जाते हैं, जिनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी अंचलाधिकारी एवं थानेदार को होती है। लेकिन समीक्षा में यह बात आई है कि राजस्व न्यायालयों के दिए आदेश का क्रियान्वयन थाना स्तर पर नहीं हो रहा है, जिससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा। समीक्षा में यह भी पाया गया कि प्रदेश में सबसे अधिक हिंसा भूमि विवाद के कारण ही हो रही है, इसीलिए राज्य सरकार प्राथमिकता के आधार पर इसका स्थाई समाधान करना चाह रही है।

विकसित होगा नया सॉफ्टवेयर
पटना के अधिवेशन भवन में मंगलवार को राजस्व अधिकारियों की हुई बैठक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में इन बिंदुओं पर मंथन हुआ। अधिकारियों का कहना है कि राजस्व न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का क्रियान्वयन नहीं होने के कारण 90 प्रतिशत मामले यथावत पड़े रहते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग एक नया सॉफ्टवेयर विकसित करने जा रहा है जिसके माध्यम से अपर समाहर्ता राजस्व और भूमि सुधार उप समाहर्ता के न्यायालय से जारी किए गए आदेश की प्रतिलिपि नए सॉफ्टवेयर के जरिए अंचलाधिकारी और संबंधित थानेदार को एक साथ चला जाएगा। निर्धारित समय में दोनों अधिकारियों को आदेश का क्रियान्वयन करना बाध्यकारी होगा, अन्यथा दोनों पर कार्रवाई होगी। अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस संबंध में जल्द ही राजस्व एवं भूमि सुधार तथा गृह विभाग एक संयुक्त आदेश जारी करने वाला है। जिसमें अंचलाधिकारी एवं थानेदारों की जवाबदेही तय की जाएगी।
Source : Hindustan

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