नियुक्ति नहीं तो शादी नहीं…। शिक्षक नियुक्ति पर अभ्यर्थियों की शादी भी अटक गई है। शिक्षक बहाली के लिए चयन हुआ तो लग्न भी तय हो गया, लेकिन जैसे ही नियुक्ति पत्र फंसा, तारीख और लग्न तय होने के बावजूद शादी भी बीच में फंस गई। यह हाल मुजफ्फरपुर समेत कई जिले के युवाओं का है। उनका दर्द हर रोज जिले के नियोजन कोषांग में छलक रहा है।

बीएड और टीईटी करने के बाद भी दो साल पहले तक अच्छे घर में शादी की आस पांच महीने पहले तब पूरी हुई जब चयन सूची में नाम आ गया। शिक्षक के लिए लड़का चुना गया, इसके बाद माता-पिता ने भी शान से शादी तय कर दी। बात हुई कि अभी नियुक्ति पत्र नहीं मिला है, लेकिन एक महीने में मिल ही जाएगा। ऐसे में नवंबर में तारीख भी तय हो गई। लेकिन, अब तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ है। ऐसे में इन युवाओं की पीड़ा तब आक्रोश में बदल गई जब लड़की वालों ने यह कहकर शादी से टालमटोल कर दिया कि इस लग्न में रहने देते हैं।

केस स्टडी- 1
नियोजन कोषांग में आए अभिभावक रामचन्द्र कहते हैं माली हालत अच्छी नहीं होने के बावजूद कर्ज लेकर बेटी को बीएड कराया, ताकि उसका जीवन संवर जाए और अच्छा घर व वर मिले। इसके बाद बेटी ने मेहनत की और टीईटी भी निकाला। उसका शिक्षक बहाली में उसका चयन भी हो गया है। लड़के वाले इसी नौकरी के कारण तैयार हुए थे और अब टालमटोल कर रहे हैं। नियुक्ति पत्र में देरी से सब पर पानी फिर गया है।

केस स्टडी- 2
बंदरा प्रखंड में चयनित राकेश कहते हैं कि मैं दिव्यांग कोटे से आता हूं और इसी कोटे पर मेरा चयन भी हुआ। दिव्यांगता की वजह से कई रिश्ते नकार दिए गए और इसी नौकरी की वजह से शादी तय हुई। 21 नवम्बर को तारीख थी, लेकिन अब लड़की वाले कह रहे हैं कि नौकरी के नाम पर हमें ठगा गया। अगर चयन हो गया तो नौकरी क्यों नहीं मिली। अगर सही समय से नियुक्ति पत्र मिल जाता तो शादी हो जाती और यह नौबत नहीं आती।

केस स्टडी- 3
सकरा के रोनित कहते हैं कि 2019 में फॉर्म भरा तभी से मां-बाप की आस जगी कि अब अच्छे घर से रिश्ता आएगा। दो साल से सभी से कह रहे हैं कि मेरा बेटा अब शिक्षक बन गया। पांच महीने पहले सबको अपनी चयन सूची भी दिखा दी, लेकिन अब सभी यही कह रहे हैं कि अरे ठग रहा होगा। इतने साल तक थोड़े ही ऐसा होता है। यह करते हुए रोनित का मन भारी हो जाता है। वे कहते हैं कि पूरी बात फाइनल थी। इसी लग्न में शादी थी, लेकिन अब सभी ताने मार रहे हैं।

केस स्टडी- 4
सकरा प्रखंड में ही चयनित महिला शिक्षक अभ्यर्थी ने बताया कि काउंसिलिंग और चयन के दौरान घर में जो खुशी का माहौल था, आज दुख में बदल गया है। घर की माली हालत खराब होने की वजह से कई रिश्ते आये और गए। अब चयन हो जाने के बाद नियुक्ति पत्र में देरी की वजह से तय रिश्ता भी टूट गया है। मेरे मना करने के बाद भी पिताजी हर दिन नियोजन कोषांग का चक्कर काटते हैं।
Source : Hindustan
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