सासाराम. इस वक्त बड़ी खबर बिहार के रोहतास जिले से आ रही है, जहां सासाराम सदर अस्पताल में काफी देर तक इंसानियत शर्मसार होती रही. दरअसल सोमवार को सदर अस्पताल में उस समय एक अजीबोगरीब तस्वीर देखने को मिली, जब एक 56 वर्षीय मां अपने 32 साल के बेटे को कंधे पर उठाकर एक वार्ड से दूसरे वार्ड में घूमती नजर आयीं. इस दौरान बुजुर्ग महिला की मदद के लिए किसी भी स्वास्थ्यकर्मी की नजर उन पर नहीं पड़ी.

बताया जाता है कि नोखा थाना के कदवा का रहने वाला दिव्यांग युवक योगेश चौधरी किसी तरह थोड़ी बहुत मजदूरी कर अपना जीवनयापन करता है, लेकिन पिछले दिनों काम से लौटने के दौरान साइकिल से गिर जाने के कारण उसके पैर में गंभीर चोट आई और फैक्चर हो गया. घटना के बाद उसकी मां प्रमिला देवी अपने जख्मी बेटे को किसी तरह लेकर नोखा से सासाराम सदर अस्पताल पहुंची. महिला किसी तरह ऑटो से उतारने के बाद अपने बेटे को पीठ पर लेकर अस्पताल परिसर तक तो पहुंच गयी. लेकिन, अस्पताल परिसर में किसी ने महिला की मदद के लिए स्ट्रेचर का इंतजाम तक नहीं किया.

बता दें, प्रमिला देवी अपने बेटे को लेकर पीठ पर लेकर ही अस्पताल के अलग-अलग वार्डों में उसके इलाज के लिए घूमती रहीं. यही नहीं महिला वार्ड से अस्पताल के एक्स-रे (X-ray) रूम तक भी अपने कंधे पर ही बेटे को उठाकर ले गयी. लेकिन, सदर अस्पताल की बदहाल हो चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच किसी स्वास्थ्यकर्मी ने उन्हें स्ट्रेचर या ह्वील चेयर तक उपलब्ध नहीं कराया. जबकि यहां तमाम सुविधाएं होने का दावा किया जाता है.

मां को नहीं थी जानकरी तो किसी ने नहीं की मदद

इस मामले को लेकर मां प्रमिला देवी बताती हैं कि उसका दिव्यांग बेटा किसी तरह मजदूरी करने के लिए गया हुआ था. इसी दौरान साइकिल से गिर जाने के कारण उसके पैर में चोट लग गई. पता चला कि पैर फैक्चर है. चल नहीं पा रहा है. किसी तरह अस्पताल लेकर आई हूं. जानकारी नहीं होने के कारण उसने किसी से व्हीलचेयर या फिर स्ट्रेचर की मांग नहीं की और ना ही कोई उससे इस संबंध में पूछने या मदद करने आया. बता दें, अस्पतालकर्मियों की मर चुकी संवेदनाओं के बीच सासाराम सदर अस्पताल में मां की इस ममता को देख हर कोई उसकी हिम्मत की चर्चा कर रहा था और कह रहा था कि बुढ़ापे में भी मां अपने बेटे को पीठ पर लेकर अपनी ममता का फर्ज निभा रही है.

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क्या कहता है अस्पताल प्रशासन

वहीं दूसरी और अस्पताल प्रशासन इस घटना से खुद को अनजान बता रहा है और कह रहा है कि ऐसे किसी मामले की जानकारी यहां के कर्मियों को नहीं है. सासाराम सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. भगवान लाल ने बताया कि सदर अस्पताल में व्हीलचेयर तथा स्ट्रेचर उपलब्ध है. किस परिस्थिति में बाहर से महिला द्वारा इस तरह से अस्पताल में मरीज को लाया गया, इसकी जानकारी नहीं है.

जाहिर है अब ऐसे में सदर अस्पताल की संवेदना पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या ग्रामीण इलाके के आए मरीज या उसके परिजनों को अस्पताल में मिलने वाली सुविधा की जानकारी नहीं है तो वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मी एक बार उसकी मदद तो दूर उसे मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी तक नहीं देंगे!

Source : News18

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