बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री जयंत राज ने कहा है कि सड़कों के मेंटेनेंस पॉलिसी में कुछ बदलाव लाए जाएंगे जिसकी तैयारी चल रही है. उन्होंने कहा कि पहले अनुरक्षण (मेंटेनेंस) ठेकेदारी प्रथा से होती थी. लेकिन अब विभागीय अनुरक्षण होगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का निर्देश है कि विभागीय अनुरक्षण कराने के बाद सड़क अधिक मजबूत रहेगी. हमारे पास अच्छे इंजीनियर हैं जो सड़क की अच्छे से देख-रेख कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि ठेकेदारी में लंबा समय लग जाता है, कभी-कभी ठीकेदार भाग भी जाते हैं. जनता को अच्छी सड़कें मिले इसके लिए विभाग खुद अनुरक्षण करेगा.

जयंत राज ने कहा कि ग्रामीण सड़कों को बनाने वाले कई ठेकेदारों के द्वारा सही काम या अनुरक्षण में ढिलाई करने की बात सामने आई है. ऐसे ठेकेदारों की पहचान कर हाल के समय में कार्रवाई की गई है और उन्हें ब्लैक लिस्टेड भी किया गया है.

ग्रामीण कार्य मंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 से पहले बिहार में तीन हजार से लेकर पांच हजार किलोमीटर तक सड़कें थी. जो अब एनडीए के शासनकाल में बढ़ कर एक लाख 20 हजार किलोमीटर हो चुकी है. उन्होंने कहा कि पहले जनसंख्या के आधार पर सड़क बनती थी. पहले 1,500 लोगों पर सड़क का निर्माण होता था. लेकिन अब मात्र 100 और 200 की जनसंख्या पर सड़क बनाने का काम किया जाता है.

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उन्होंने कहा कि अभी भी कुछ जगहों पर रोड नहीं बन पाया है, इसके लिए सर्वे का काम चल रहा है. आठ हजार किलोमीटर सड़कें बननी बाकी है. इसके लिए विभाग लोन लेने की तैयारी में लगा है. ब्रिक्स (BRICS) से लोन मांगा गया है. लोन मिलते ही सड़क को तैयार कर लिया जाएगा. संभवतः अगले वित्तीय वर्ष तक इस पर काम शुरू हो जाएगा.

Source : Hindustan

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