रोहतास: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं कि शराबबंदी कानून के तहत सरकार ना किसी को फंसाती है और न ही किसी को बचाती है. लेकिन प्रदेश के रोहतास में पुलिस की ऐसी करतूत सामने आई है, जिसने ये साबित कर दिया है कि शराबबंदी के मामले में पुलिस निर्दोषों को ना सिर्फ फंसाती है, बल्कि दोषी को बचाती भी है. मामला रोहतास जिला के नौहट्टा थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां बौलिया गांव के रवि चौधरी की पत्नी कुसुम देवी से नौहट्टा थाना के थानाध्यक्ष तथा अन्य पुलिसकर्मियों ने फोन कर शराब के केस में बचाने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की है.

एसपी ने दोषियों के खिलाफ की कार्रवाई

इधर, पीड़ित महिला ने बातचीत का ऑडियो संलग्न करते हुए इस मामले में लिखित शिकायत रोहतास के एसपी आशीष भारती से की. ऐसे में एसपी आशीष भारती ने पूरे मामले की जांच कराई और मामला सही पाने के बाद कार्रवाई करते हुए एएसआई दिनेश प्रसाद व चौकीदार को निलंबित कर दिया. साथ ही नौहट्टा थानाध्यक्ष संजय कुमार वर्मा को लाइन हाजिर कर दिया गया है.

बता दें कि पूरा मामला 18 दिसंबर, 2021 का है. उक्त दिन नौहट्टा थाना के बौलिया के जंगल में देसी शराब बरामद की गई थी. इस मामले में पुलिस ने बौलिया गांव के रवि चौधरी पर झूठा आरोप लगा दिया कि शराब उसके घर से बरामद हुई है. आरोप है कि थानाध्यक्ष ने खुद रवि चौधरी के घर पर पहुंचकर केस करने की धमकी दी. हालांकि, बाद में थाना से एक एसआई दिनेश प्रसाद, चौकीदार सतेंद्र पासवान तथा थानाध्यक्ष द्वारा रवि चौधरी की पत्नी कुसुम देवी के मोबाइल पर फोन कर केस नहीं करने के बदले 50 हज़ार रुपये की मांग की गई.

बता दें कि साल 2018 में रवि चौधरी शराब बेचने के आरोप में जेल जा चुका था. पीड़ित महिला का आरोप है कि उसके पति एक सामान्य कामकाजी व्यक्ति हैं. तीन साल पूर्व भी उनके पति को फंसाया गया था. इस बार भी जंगल में बरामद शराब को उनके घर में बरामद दिखाने की धमकी देते हुए पैसे की डिमांड की जाने लगी. लेकिन उसने इस बार पुलिस का भंडाफोड़ दिया.

Source : ABP News

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