महिलाओं के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों की त्वरित एवं वैज्ञानिक जांच के लिए सभी जिलों में विशेष अन्वेषण इकाई का गठन किया गया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश में बनी यह इकाई ऐसे मामलों में ससमय चार्जशीट कर जल्द ट्रायल शुरू करने का काम कर रही है। यौन हिंसा से जुड़े मामलों के वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्य जमा करने के लिए राज्य के 98 पुलिस अनुमंडल को विशेष किट भी उपलब्ध कराया गया है। इस किट में बैग एवं पेपर शीट, स्वैब व रक्त नमूनों के संग्रह उपकरण, डाक्यूमेंट फार्म व दिशा-निर्देश आदि रहते हैं।

जिलास्तर पर मानव व्यापार निरोध इकाई
पुलिस मुख्यालय ने मानव तस्करी रोकने के लिए जिलास्तरीय मानव व्यापार निरोध इकाई बनाने का भी निर्देश दिया है। मानव व्यापार एवं बाल श्रम से जुड़ी कार्रवाई की रिपोर्ट भी मुख्यालय स्तर पर तलब की गई है। आंकड़ों के अनुसार, नवंबर तक मानव तस्करी मामले में पुलिस ने 93 प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें 121 महिलाओं को तस्करों से आजाद कराया गया है, जिसमें 58 बालिग जबकि 53 नाबालिग हैं। इसी तरह 185 बाल मजदूरों को भी आजाद कराया गया है। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 277 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिसमें 206 पुरुष व 71 महिलाएं शामिल हैं।

- मानव तस्करी पर कार्रवाई
- 93 प्राथमिकी दर्ज की गई मानव तस्करी मामले में
- 121 महिलाओं व लड़कियों को कराया गया मुक्त
- 185 बाल मजदूरों को भी कराया गया आजाद
- 277 मानव तस्करों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

पूर्णिया-नालंदा में बाल मित्र डेस्क
राज्य के 40 पुलिस जिलों में महिला थाना बनाए जाने के बाद पुलिस अब बाल मित्र थाना के निर्माण पर काम कर रही है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, अभी पूर्णिया और नालंदा में बाल मित्र डेस्क कार्यरत है, जबकि अन्य जिलों में इसे शुरू करने की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा बाल मित्र थानों का निर्माण भी कराया जा रहा है, जहां बच्चों के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से वातावरण तथा सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
Source : Dainik Jagran





