बिहार का एक गांव जहां पैदल आती दुल्हन, खाट पर जाते मरीज, जानिए मामला

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सुपौल जिले के आखिरी छोर पर बसा है खूंट गांव। जदिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत कोरियापट्टी पश्चिम पंचायत में यह स्थित है। गांव में आवागमन व्यवस्था की स्थिति इतनी दुरूह है कि यहां दुल्हनों को पैदल आना पड़ता है और मरीजों को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है।

 

सुरसर व छुरछुरी नदी के बीच यह गांव बसा है। गांव से निकलने के लिए रास्ता नहीं है। आवाजाही के लिए पगडंडी ही एकमात्र सहारा है। आवागमन के दृष्टिकोण से दुर्गम होने के कारण लोग अपने बेटे-बेटियों की शादी यहां नहीं करना चाहते।

 

अपने बाल-बच्चों के शादी-विवाह के लिए लोगों को अपने सगे-संबंधियों की चिरौरी करनी पड़ती है। भाग्य के भरोसे विकास की दुहाई देते हुए यहां की तीन हजार की आबादी गुजर-बसर कर रही है।

चार किलोमीटर दूर है अस्पताल

विकास को गांव तक पहुंचाने के लिए सड़क नहीं होने के कारण यहां स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी लोग वंचित हैं। सड़क से वंचित पूर्वी सुरसर व पश्चिमी छुरछुरी नदी के बीच बसे इस गांव को टापू कहना ही उचित होगा। गांव में बच्चों की शिक्षा के लिए एक उर्दू मध्य विद्यालय है।

 

बीमार लोगों को चार किलोमीटर दूर कोरियापट्टी या पश्चिम में 11 किलोमीटर दूर त्रिवेणीगंज जाना पड़ता है। गांव के मुखिया ने बताया कि उनके एक परिजन की तबीयत बिगडऩे पर उन्हें ग्रामीणों के सहयोग से खाट पर लादकर अस्पताल लाना पड़ा।

 बारिश में बह जाता है चचरी पुल

सुरसर नदी पर बने चचरी पुल को पार कर दुल्हन को गांव आना पड़ता है। जब नदी में उफान रहता है तो चचरी पुल भी बह जाता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण नाव से नदी पार कर दुल्हन को घर लाते हैं। इसके बाद की जिंदगी इनके लिए भारी होती है।

 

खासकर प्रसव के लिए महिलाओं को ले जाना तो फजीहत से कम नहीं होता। त्रिवेणीगंज के अख्तर बताते हैं कि एकबार इस गांव में बारात जाने का मौका मिला। उसके बाद से उन्होंने गांव नहीं जाने की कसम खा ली। मनोज मुखिया के घर शादी में तो बारात जदिया तक गाड़ी से आई, फिर पैदल ही गांव जाना पड़ा।

 

त्रिवेणीगंज की विधायक वीणा भारती का कहना है कि  मैंने अपने विधायक कोटे से उक्त गांव में पुल के लिए प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिली या नहीं, इसकी जानकारी नहीं मिली है। मैं व्यक्तिगत तौर पर इसकी पड़ताल करूंगी।

 

ग्राम पंचायत कोरियापट्टी पश्चिम के मुखिया जगदीश यादव ने बताया कि पंचायत स्तर पर मनरेगा से जो संभव हो पाया, वह हमेशा किया गया है। पुल-पुलिया तो पंचायत स्तर की बात नहीं है। सांसद से इस बाबत कई बार मैं बात कर चुका हूं। अबतक कोई परिणाम सामने नहीं आया है।

Source : Dainik Jagran

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