मुजफ्फरपुर में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के विधिक प्रावधानों को मजबूत करने तथा लैंगिक भेदभाव मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समाहरणालय सभागार में “कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013” पर एक विस्तृत उन्मुखीकरण सह कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने दीप प्रज्वलित कर किया।

अपने संबोधन में जिलाधिकारी ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश और बढ़ती महिला कार्यभागीदारी के साथ इस कानून की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। महिलाएं आज सरकारी कार्यालयों, निजी संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं, अस्पतालों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित विविध क्षेत्रों में सक्रिय हैं। ऐसे में सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त कार्यस्थल उपलब्ध कराना प्रशासन और संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि समानता, स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार की रक्षा करना राज्य का दायित्व है। कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि संविधान की मूल भावना के भी विरुद्ध है।

कार्यशाला में आईसीडीएस की परियोजना निदेशक अंकिता कश्यप ने अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अवांछित शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिक व्यवहार, आपत्तिजनक टिप्पणी, अनुचित स्पर्श, धमकी, अश्लील संदेश या डिजिटल माध्यम से की गई अनुचित हरकतें भी यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आती हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति में एक वरिष्ठ महिला अध्यक्ष तथा एक बाहरी सदस्य शामिल होना आवश्यक है। शिकायत मिलने के बाद निर्धारित समयसीमा में निष्पक्ष और गोपनीय जांच करना अनिवार्य है। दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई, आर्थिक दंड या सेवा समाप्ति तक की अनुशंसा की जा सकती है।

जिलाधिकारी ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे अपने संस्थानों में शिकायत समिति का विधिवत गठन सुनिश्चित करें, नियमित बैठकें आयोजित करें तथा कर्मचारियों को प्रशिक्षण दें। उन्होंने कहा कि जीविका से जुड़ी लगभग 9 लाख दीदियों तक इस कानून की जानकारी पहुंचाई जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को नई मजबूती मिल सके।

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