ग्रेजुएशन कर रहे देशभर के करोड़ों छात्रों के लिए बड़ी खबर, UGC करने जा रहा ये बड़ा बदलाव
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ग्रेजुएशन कर रहे देशभर के करोड़ों छात्रों के लिए बड़ी खबर, UGC करने जा रहा ये बड़ा बदलाव

Santosh Chaudhary

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 देशभर की तमाम यूनिवर्सिटीज के यूजी प्रोग्राम्स की अवधि तीन साल से बढ़ाकर चार साल करने की तैयारी की जा रही है। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) इस मामले पर विचार कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो छात्र पाठ्यक्रम के बाद सीधे पीएचडी प्रोग्राम कर सकेंगे। साथ ही छात्र का पोस्ट ग्रेजुएट होना भी जरूरी नहीं होगा। यूजीसी के अध्यक्ष प्रो. डीपी सिंह ने इस बात की पुष्टि की है।

विश्वविद्यालयों में वर्तमान में स्नातक पाठ्यक्रम तीन साल का और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम दो साल का होता है। इसके बाद ही किसी छात्र को पीएचडी में प्रवेश मिल सकता है। दरअसल यूजीसी देश की शिक्षा नीति में बड़े स्तर पर फेरबदल करने जा रहा है। इसके लिए यूजीसी ने एक विशेषज्ञ समिति गठित की है। इसी कमेटी ने शिक्षा नीति में बदलाव के लिए यूजीसी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

इसमें ऐसी ही कई सिफारिशें की गई हैं। स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे साल में शोध को केंद्र में रखा जा सकता है। वहीं इस दौरान विश्वविद्यालयों को तीन वर्षीय परंपरागत स्नातक पाठ्यक्रम चलाने की छूट भी मिलेगी। इसके अलावा अगर कोई छात्र चार साल का स्नातक पाठ्यक्रम करने के बाद पीएचडी के बजाए स्नातकोत्तर करना चाहता है तो उसे ऐसा करने की छूट मिलेगी। वर्तमान में तकनीकी शिक्षा के बैचलर ऑफ टेक्नॉलॉजी (बीटेक) या बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (बीई) चार साल के स्नातक पाठ्यक्रम हैं। उनके बाद छात्र सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकते हैं।

प्रो. डीपी सिंह ने बताया कि शिक्षा नीति में बदलाव के पहले गठित कमेटी ने रिपोर्ट में स्नातक पाठ्यक्रम की अवधि तीन साल से बढ़ाकर चार साल किए जाने की सिफारिश की है। इसके अलावा भी कमेटी ने कई सिफारिशें की हैं। हर सिफारिश पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यह नीति देश को नई दिशा देने वाली होगी। इस वजह से इसके हर बिंदु को अच्छी तरह से परख कर ही लागू किया जाएगा। नई नीति अगले साल से लागू की जा सकती है।

दिल्ली में एक साल में ही वापस लेना पड़ा था निर्णय

दिल्ली विश्वविद्यालय में 2013 में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए गए थे। इसके लागू होने के साथ ही छात्रों ने इसका जमकर विरोध शुस्र् कर दिया था। 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी ने इस निर्णय को वापस लेते हुए दोबारा तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम ही शुस्र् कर दिए थे।

बिना वजह किया जा रहा है प्रयोग

शिक्षाविद् अरुण गुर्टु का कहना है कि यूजीसी ने शिक्षा नीति में बदलाव के लिए जो ड्राफ्ट तैयार किया है, उसमें कई खामियां है। स्नातक की अवधि भी तीन साल से बढ़ाकर चार साल करना औचित्यहीन है। इसका कोई फायदा छात्र को होने वाला नहीं है। यूजीसी जो पांच के बजाए चार साल में करने का फायदा छात्र को बता रही है, वह भी कोई मतलब का नहीं है। वैसे भी पीएचडी में भी जमकर फर्जीवाड़ा हो रहा है। यूजीसी को ऐसे औचित्यहीन निर्णय लेने के बजाए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की फैकल्टी व बुनियादी ढांचा मजबूत करने पर ज्यादा फोकस करना चाहिए।

Input : Dainik Jagran

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अप्रैल 2020 से शुरू होगा निर्माण कार्य, ऐसे बनेगा राम मंदिर

Santosh Chaudhary

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अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण अप्रैल 2020 में शुरू होकर साल 2022 तक पूरा हो सकता है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को दिए फैसले में विवादित भूमि को हिंदुओं को देकर इस पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है। अपने फैसले में कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह निर्देश भी दिया कि वो 3 महीने के अंदर योजना बनाए और मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट का गठन करे।

एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है- इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि नया ट्रस्ट बनाया जाए या फिर पुराने रामजन्मभूमि न्यास में ही नए सदस्य शामिल कर लिए जाएं। इन सूत्रों ने बताया है कि विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल भी राम मंदिर ट्रस्ट का हिस्सा हो सकते हैं, हालांकि सदस्यों को लेकर आखिरी फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय ही करेगा। सबसे बड़ा विवाद जो प्रस्तावित ट्रस्ट के सामने आने की संभावना है, वो मंदिर निर्माण के लिए कई संगठनों, ट्रस्टों और धार्मिक समूहों द्वारा फंड जमा करने से संबंधित है।

मुख्य मुद्दा यह होगा कि क्या ये फंड जमाकर्ता नए ट्रस्ट को पैसा सौंपने के लिए तैयार होंगे और वे पिछले 27 सालों के दौरान जमा किए गए करोड़ों रुपये के लिए जवाबदेह होंगे। एएनआई के मुताबिक, वीएचपी का मानना है कि राम मंदिर का निर्माण सरकारी पैसे के बजाए जनता के चंदे से होना चाहिए। वहीं न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कानून, गृह मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करने और प्रस्तावित ट्रस्ट के तौर-तरीकों पर जल्द से जल्द काम करने को कह चुके हैं। इस बीच ट्रस्ट में जगह पाने को लेकर संतों और कई हिंदू संगठनों के बीच होड़ शुरू हो गई है।

एेसे बनेगा राम मंदिर

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशानिर्देशों के तहत सरकार को वे सब औपचारिकताएं पूरी करनी हैं जो मंदिर निर्माण में सहायक साबित होंगी।

ट्रस्ट का गठन

नौ नवंबर को बहुप्रतीक्षित और देश के सबसे बड़े सर्वसम्मत फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट का गठन करे। आगे यही ट्रस्ट मंदिर निर्माण से जुड़ी हर गतिविधियों, प्रक्रियाओं का निर्धारण करेगा।

जानें- क्या है प्रक्रिया

अयोध्या जमीन अधिग्रहण एक्ट 1993 के तहत ट्रस्ट का गठन होगा। मंदिर के लिए यह आंतरिक और बाहरी अहाते की जमीन को कब्जे में लेगा। इसी कानून के तहत केंद्र सरकार ने विवादित स्थल के इर्द-गिर्द की 67.7 एकड़ जमीन अधिगृहीत की थी। कुछ शर्तो के साथ इसी कानून से यह जमीन ट्रस्ट को सौंपी जा सकेगी। उस स्थिति में केंद्र सरकार के अधिकार बनने वाले ट्रस्ट में समाहित हो जाएंगे।

ट्रस्ट का प्रारूप

कुछ रिपोर्टो में ये बात सामने आ रही है कि राम मंदिर ट्रस्ट का रूप-स्वरूप देश के अन्य मंदिरों के ट्रस्ट जैसा होगा। इनमें सोमनाथ मंदिर, अमरनाथ श्राइन बोर्ड या माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का उल्लेख किया जा रहा है। एएनआइ की एक रिपोर्ट के मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट का मॉडल सोमनाथ मंदिर के अनुरूप हो सकता है। इस ट्रस्ट के सात सदस्यों में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बतौर सदस्य शामिल हैं।

अलग-अलग राय

भावी ट्रस्ट के रूप-रंग के साथ उसके सदस्यों के नामों की चर्चाएं जोरों से होने लगी हैं। इसमें केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मनोनीत लोगों के रहने का अनुमान है साथ ही धार्मिक नेताओं के शामिल होने की बात को भी खारिज नहीं किया जा सकता है। गैर सरकारी मनोनीत नामों के बारे में कयास लगने शुरू हो चुके हैं। राम मंदिर आंदोलन को इस मुकाम तक लाने में अहम भूमिका निभाने वाले संगठन विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि ट्रस्ट को राम मंदिर के निर्माण में भक्तों की सांकेतिक भागीदारी में मदद करनी चाहिए। परिषद चाहती है कि गृहमंत्री अमित शाह और उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके सदस्य बनें। रामजन्मभूमि न्यास के प्रमुख महंत नृत्य गोपालदास का कहना है कि गोरखनाथ मंदिर के महंत की हैसियत से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ट्रस्ट का नेतृत्व करना चाहिए। फैसले के बाद उनका यह बयान भी चर्चा के केंद्र में रहा जिसमें उन्होंने कहा कि, नए ट्रस्ट की कोई जरूरत नहीं है। राम मंदिर के लिए न्यास पहले से ही एक ट्रस्ट के रूप में काम कर रहा है। निर्मोही अखाड़ा सहित अन्य को इसमें शामिल किया जा सकता है। हालांकि अखाड़ा सदस्यों का मत इससे प्रतिकूल है। उनका कहना है कि रामजन्मभूमि न्यास के खिलाफ हम लड़ रहे हैं। उनके ट्रस्ट का सदस्य हम कैसे बन सकते हैं? वे अपने ट्रस्ट को भंग करके हमारे साथ ट्रस्ट में सहभागी बन सकते हैं।

सोमनाथ की तर्ज पर ट्रस्ट

माना जा रहा है कि प्रस्तावित राम मंदिर का निर्माण अगले साल दो अप्रैल को रामनवमी से शुरू हो जाएगा। नवमी तिथि मधु मास पुनीता..इसी दिन भगवान राम का जन्म हुआ था। जैसाकि रिपोर्ट आ रही हैं, अगर राममंदिर ट्रस्ट का स्वरूप सोमनाथ मंदिर की तरह रहा तो आइए जानते हैं कैसे करेगा काम।

कौन कौन है सदस्य

श्री सोमनाथ ट्रस्ट एक धार्मिक चैरिटेबल ट्रस्ट है जिसका पंजीकरण गुजरात पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, 1950 के तहत हुआ है। वर्तमान में इसके सात सदस्य हैं। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल इसके चेयरमैन हैं। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और गुजरात के पूर्व प्रमुख सचिव प्रवीण लाहेरी इसके सदस्य हैं। कोलकाता के नेवतिया समूह के चेयरमैन हर्षव‌र्द्धन नेवतिया और वेरावल से सेवानिवृत्त संस्कृत के प्रोफेसर जेडी परमार इसके सदस्य हैं।

सदस्यता अवधि

बोर्ड की सदस्यता आजीवन है। परमार 1975 में इसके सदस्य बने जबकि अमित शाह जनवरी, 2016 में भावनगर से कांग्रेस सांसद प्रसन्नवदन मेहता की मौत के बाद सदस्य बने। केंद्र और राज्य सरकारें प्रत्येक चार-चार सदस्यों को मनोनीत कर सकती है। आमतौर पर ट्रस्टी मंडल संभावित उम्मीदवारों की एक सूची तैयार करता और रिक्तियां इसी सूची से भरी जाती हैं। एक साल में चार बार ट्रस्टी बोर्ड की मीटिंग होती है।

ट्रस्ट के काम

2018 में ट्रस्ट को 42 करोड़ रुपये चढ़ाने, दान और किराए के रूप में मिले। ट्रस्ट के पास कई गेस्ट हाउस भी हैं। 2017 के दौरान इस मद में ट्रस्ट को 39 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। पिछले दो साल के दौरान गुजरात सरकार ने मंदिर परिसर में सुविधाओं के विकास में 31.47 करोड़ रुपये खर्च किए।

ट्रंस्ट के अन्य कार्य

ट्रस्ट आंगनवाड़ी बच्चों को पोषक भोजन मुहैया कराता है। बेरोजगारों को हुनरमंद बनाता है। पांच दिनी कार्तिकी पूनम मेला का आयोजन करता है। आठ से नौ लाख लोगों के अलावा स्थानीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

Input : Dainik Jagran

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भारत के नए चीफ जस्टिस होंगे एसए बोबडे, आज रिटायर हो रहे हैं जस्टिस रंजन गोगोई

Santosh Chaudhary

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जस्टिस शरद अरविंद बोबडे देश के अगले मुख्य न्यायाधीश होंगे। अयोध्या विवाद पर सबसे बड़ा फैसला देने वाले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है। उनकी जगह भारत के नए चीफ जस्टिस के तौर पर जस्टिस एसए बोबडे शपथ लेंगे। परंपरा मुताबिक मौजूदा मुख्य न्यायाधीश पत्र लिखकर अपने बाद इस कार्यभार को संभालने वाले न्यायाधीश के नाम की सिफारिश करते हैं। जस्टिस गोगोई ने 18 अक्तूबर को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर जस्टिस बोबडे के नाम की सिफारिश की थी।जस्टिस एसए बोबडे  देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। न्यायमूर्ति बोबडे 17 महीने के लिए 23 अप्रैल 2021 तक इस पद पर बने रहेंगे। मौजूदा सीजेआई रंजन गोगोई 17 नवंबर को अपने पद से रिटायर हो रहे हैं।

जस्टिस बोबडे कई महत्वपूर्ण बेंचों में रहे हैं जिनमें हाल ही में अयोध्या टाइटल विवाद भी शामिल हैं इसके अलावा वह BCCI सुधार मामले में बेंच की भी अगुवाई कर रहे हैं। साल 2018 में उन्होंने कर्नाटक राजनीतिक विवाद पर रातभर कांग्रेस व जेडीएस की याचिका पर सुनवाई की थी जिसके बाद वहां दोबारा सरकार बन गई थी। जस्टिस बोबडे निजता के अधिकार के लिए गठित संविधान पीठ में शामिल रहे और वह आधार को लेकर उस बेंच में भी रहे जिसने कहा था कि जिन लोगों के पास आधार नहीं है उन्हें सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा।

जस्टिस बोबडे ने 1978 में नागपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल करने के बाद बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र में नामांकन कराया। उन्होंने 21 साल तक बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में प्रैक्टिस की और सुप्रीम कोर्ट में भी पेश हुए। उन्हें 1998 में वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया गया और बाद में मार्च, 2000 में बॉम्बे उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था।

जस्टिस बोबडे के बारे में मुख्य बातें…

– जस्टिस शरद अरविंद बोबडे का जन्म 24 अप्रैल, 1956 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था

– नागपुर विश्वविद्यालय से बी.ए. और एल.एल.बी डिग्री ली है

– 1978 में जस्टिस बोबडे ने बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र को ज्वाइन किया था

– इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में लॉ की प्रैक्टिस की, 1998 में वरिष्ठ वकील बने

– 2000 में जस्टिस बोबडे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज पदभार ग्रहण किया

– इसके बाद वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने

– 2013 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज कमान संभाली

– जस्टिस एस. ए. बोबड़े 23 अप्रैल, 2021 को रिटायर होंगे

– 18 नवंबर को जस्टिस बोबडे बतौर चीफ जस्टिस शपथ लेंगे

– मौजूदा CJI रंजन गोगोई ने उनके नाम की सिफारिश की थी

– राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके नाम की मंजूरी दे दी है

– जस्टिस बोबडे आधार कार्ड, दिल्ली-NCR में पटाखों पर बैन समेत अन्य ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं।

Input : News24

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पल भर में त’बाह होगा 2000 KM दूर बैठा दु’श्मन, भारत ने किया अग्नि-2 का सफल परीक्षण

Santosh Chaudhary

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भारत ने शनिवार को मध्यम दूरी के बै’लेस्टिक मि’साइल अग्नि-2 का सफल परीक्षण किया है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक ओडिशा के बालासोर से इस मि’साइल का सफल परीक्षण किया गया.

यह परीक्षण इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत ने पहली बार इस मिसाइल का रात में परीक्षण किया है. यह मिसाइल 2000 किलोमीटर तक मार कर सकती है. स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड द्वारा ओडिशा के तट से अग्नि-2 मिसाइल का परीक्षण किया गया.

अग्नि 2 बैलिस्टिक मिसाइल 20 मीटर लंबी होती है और यह 1000 किलो तक का वजन ले जाने में सक्षम है. आपको बता दें कि अग्नि-2 मिसाइल को पहले ही सेना में शामिल किया जा चुका है.

इसे डीआरडीओ की एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी ने तैयार किया है. इस मिसाइल को इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाया गया है.

अत्याधुनिक नैविगेशन सिस्टम से युक्त इस मिसाइल में बेहतरीन कमांड और कंट्रोल सिस्टम है. यह मिसाइल अग्नि सीरीज मिसाइल का हिस्सा है. इस सीरीज में 700 किमी तक जाने वाली अग्नि-1 और 3000 किमी तक जाने वाली अग्नि-3 मिसाइल भी शामिल हैं. इनके अलावा लंबी दूरी तक मार करने वाली अग्नि-4 और अग्नि-5 भी इस सीरीज का हिस्सा हैं.

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