जमीन और मकान निबंधन से जुड़ी त्रुटियों को लेकर लोगों को अब लंबे समय तक परेशान नहीं होना पड़ेगा। राज्य सरकार ने डिजिटल निबंधन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। इसके तहत निबंधन से संबंधित गलतियों को अधिकतम 22 दिनों के भीतर सुधारने का प्रावधान किया गया है।

नई व्यवस्था के अनुसार, स्कैनिंग, दस्तावेज अपलोडिंग या विवरण दर्ज करने में होने वाली तकनीकी खामियों को तय समयसीमा में ठीक किया जाएगा। इससे आम लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकेगी।

त्रुटि सुधार के लिए अलग-अलग स्तर पर स्पष्ट समयसीमा तय की गई है। सबसे पहले, निबंधन पदाधिकारी को प्रारंभिक जांच कर सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसके बाद प्रमंडलीय स्तर पर सहायक निबंधन महानिरीक्षक द्वारा भौतिक सत्यापन, अनुमोदन और आदेश जारी करने की प्रक्रिया भी सात दिनों में पूरी करनी होगी। वहीं, विभागीय प्रभारी अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि आदेश मिलने के तीन कार्यदिवस के भीतर आगे की कार्रवाई कर दी जाए। अंत में, सिस्टम इंटीग्रेटर (SI) द्वारा डिजिटल रिकॉर्ड में संशोधन पांच कार्यदिवस के भीतर अपडेट किया जाएगा।

नई SOP में डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। प्रत्येक संशोधन के बाद मूल और संशोधित दोनों पीडीएफ दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएंगे। साथ ही, सिस्टम इंटीग्रेटर को हर तिमाही में संशोधनों की रिपोर्ट विभाग को भेजनी होगी और वार्षिक आईटी ऑडिट भी अनिवार्य किया गया है।

दस्तावेजों में बदलाव को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। यदि किसी सुधार या रद्दीकरण की जरूरत होती है, तो उसे अलग दस्तावेज के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। मूल दस्तावेज में सीधे बदलाव की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, पंजीकरण संख्या, तिथि और संबंधित पक्षकारों की कानूनी स्थिति में बिना सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति किसी भी तरह का डेटा संशोधन या आईटी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन दंडनीय माना जाएगा। इस नई प्रणाली से न केवल प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि निबंधन व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा भी मजबूत होगा।










