बिहार के दरभंगा ज़िले के रहने वाले सातवीं पास जमील शाह के जूते की नोक पर नाचता है हॉलीवुड बॉलीवुड
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बिहार के दरभंगा ज़िले के रहने वाले सातवीं पास जमील शाह के जूते की नोक पर नाचता है हॉलीवुड बॉलीवुड

Ravi Pratap

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बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले सातवीं पास जमील शाह का बस एक ही सपना था मुंबई में रहने वाले बडे-बडे फिल्मी सितारों को एक नजर देखने का, उनसे मिलने का। उनके इसी जूनून ने इन्हें डांसिंग शूज का मास्टर बना दिया। अब तो ये आलम यह है कि कटरीना कैफ, प्रियंका चोपडा से लेकर आमिर खान, सलमान खान, ऋतिक रोशन जैसे कई बडे कलाकार इनके बनाए जूतों के कायल हैं।

जमील शाह बिहार से दिल्ली, बेंगलुरू और फिर सपनों के शहर मुंबई पहुंचे। वे बैकग्राउंड डांसर बनकर बडे-बडे कलाकारों के साथ डांस करना चाहते थे लेकिन यह आसान नहीं था। उनके पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वह किसी डांसिंग स्कूल में भर्ती हो सकें। इसलिए उन्हें कई साल तक चौकीदारी करनी पडी। उनके डांस की काबलियत को सबसे पहले देखा जाने-माने डांसिंग गुरु संदीप सोपारकर ने।

जमील शाह की प्रतिभा को देखते हुए संदीप ने उनसे फीस के तौर पर एक रुपया भी नहीं लिया। लेकिन डांस के जूते बेहद महंगे होते हैं। इनकी शुरुआत ही 10 हजार से होती है और इनकी कीमत 2 लाख तक जाती है। फिर भारत में इनका मिलना मुश्किल होता है इसलिए इन्हें कई बडे डांस गुरु इंग्लैंड से एक साथ ऑर्डर देकर मंगवाते हैं।

अब जमील के लिए तो यह संभव नहीं था इसलिए उन्होंने अपने साथ काम करने वाले डांसरों के जूतों को देखकर वैसे ही जूते बनाए और गुरु दक्षिणा के तौर पर उन्हें संदीप सोपारकर को भेंट किया। जूते सबको बेहद पसंद आए और 2007 में वहां से शुरू हुआ डांसिंग जूते बनाने का सिलसिला।

30 साल के जमील शाह का ये सफर धारावी से शुरू हुआ था और ऐसा नहीं कि इसमें मुश्किलें नहीं आईं। वह कहते हैं, ‘मैंने बेहद गरीबी देखी, मुझे अपने गांव वालों और पडोसियों के ताने सुनने पडे। लोग मुझे हीरोइनों के जूते साफ करने वाले और मुजरा करने वाला कहते थे। लेकिन मेरी कामयाबी ने सबको मुंह बंद कर दिया आज वही लोग मेरी तारीफ करते हैं।’

जमील कहते हैं, ‘भारत में ज्यादातर लोग समझते हैं कि आम जूते और डांस में इस्तेमाल किए जाने वाले जूते में कोई फर्क नहीं होता जबकि डांस में इस्तेमाल किए जाने वाले जूते दूसरे जूतों के मुकाबले बेहद अलग होते हैं।’

‘इन जूतों को बनाते वक्त उनके आरामदेह होने, उनके आकार, उनकी कोमलता और वजन का काफी ध्यान रखना पडता है। फिर हर डांस स्टाइल के लिए अलग-अलग जूतों का इस्तेमाल किया जाता है जैसे सालसा, जैज, टैप, बेली, हिपहॉप, लैटिन, साम्बा, जाम्बा, तुम्बा, मॉडर्न, टैंगो और फ्लेमेंको डांस। इन सभी के जूतों में जमीन आसमान का फर्क है।’

धूम 3 में अभिनेता आमिर खान ने जो टैप डांस किया है उसके जूते अलग होते हैं। वो जूते थोडे भारी होते हैं उन जूतों के नीचे एल्युमीनियम की परत लगाई जाती है जिससे डांस करते वक्त इन जूतों से थपथपाहट की जोरदार आवाज आ सके।

इसी तरह फ्लेमेंको डांस के लिए भी जूते के एडी और पंजो को बहुत सख्त बनाया जाता हैं लेकिन फर्क बस इतना होता है कि उनमें एल्युमीनियम के बजाए कीलें ठोकी जाती हैं, जिससे उन जूतों से आवाज थोडी धीमी आए। सालसा डांस वाले जूते बेहद कोमल होते हैं क्यूंकि सालसा डांस करते वक्त पैरों के पंजे पर ज्यादा जोर दिया जाता है इसलिए जूतों का पंजा थोडा चौडा होता हैं और एडी की नोक पतली और लंबी होती।

कुछ जूते तो ऐसे भी होते हैं जिनका वजन और मोजों का वजन और लचीलापन एक सामान होना चाहिए। जैज डांस के जूते तो इतने हलके होते हैं कि उन्हें आप जेब में भी रख सकते हैं। वह मोजे जितने हलके होते हैं उन्हें जैसे चाहे मोड सकते हैं, निचोड सकते हैं। लैटिन बॉल डांस के लिए जो जूते होते हैं वह क्यूबन हील यानी घनाकार वाली हील होते हैं। उन्हें पहनकर एकदम सीधे खडा होना होता है। इन्हें लडके और लडकी दोनों ही पहन सकते हैं।’

जमील कहते हैं, ‘बॉलीवुड के फिल्मी सितारों में सबसे पहले मैंने डिनो मोरया के लिए जूते बनाए थे। फिर प्रियंका चोपडा के लिए फिल्म सात खून माफ के लिए टैंगो डांस के जूते बनाए। धूम 3 में आमिर खान के लिए टैप डांसिंग शूज बनाए। जिंदगी न मिलेगी दोबारा में सेनोरिटा गाने के लिए ऋतिक के लिए सालसा जूते बनाए।’

‘इनके अलावा आलिया भट्ट, काजोल, अजय देवगन, सलमान खान, रणबीर कपूर, कटरीना कैफ, श्रीदेवी जैसे कई सितारों के लिए एक दो जोडी नहीं बल्कि 10 जोडियां तक बनाई हैं।

Input : BBC 

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डॉ. वशिष्ठ नारायण के निधन पर PM मोदी ने जताया शोक, कहा- देश ने खो दी विलक्षण प्रतिभा

Santosh Chaudhary

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भारत और बिहार का नाम विश्व पटल पर रोशन करने वाले बिहार के प्रख्यात गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन हो गया है। इस पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि उनके जाने से देश ने ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अपनी एक विलक्षण प्रतिभा को खो दिया है।

पीएम मोदी ने कहा कि उनके न रहने से मैं बहुत दुखी हूँ। आज देश ने एक महान प्रतिभा को खो दिया है। मोदी के अलावा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी डॉ. वशिष्ठ नारायण को श्रद्धांजलि दी है और उनके ज्ञान को नमन किया है।

महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर अब नीतीश सरकार ने कहा है कि उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। बताया जा रहा है कि पीएमसीएच प्रशासन द्वारा वशिष्ठ नारायण सिंह के परिजनों के साथ किये गए व्यवहार सरकार ने रिपोर्ट मांगी है।अंतिम संस्कार को लेकर बताया जा रहा है कि वशिष्ठ नारायण का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव भोजपुर जिले के बसंतपुर में किया जाएगा।

वशिष्ठ नारायण सिंह बीते कई महीनों से बीमार चल रहे थे। वहीँ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन के बाद पीएमसीएच की हरकत को लेकर उनके परिजनों ने नाराजगी व्यक्त की। परिजनों को कहना है कि अस्प्ताल प्रशासन ने उन्हें एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई। वशिष्ठ ने नासा में भी काम किया था। 1967 में सिंह को कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स का निदेशक बनाया गया। यहां इनके शोध पत्र की चोरी हो गये। जिससे इनके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ा था क्योंकि किसी भी वैज्ञानिक के लिये उसके शोध पत्र उसकी जान से भी बढ़कर कीमती होते हैं।

Input : Live Bihar

 

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BIHAR

रेड मारने गई बिहार पुलिस को उतारनी पड़ गई पैंट

Ravi Pratap

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बिहार में श’राबबंदी के बावजूद भी कई जिलों में श’राब ध’ड़ल्ले से बेचा जा रहा है. पुलिस लगातार श’राब के ठिकानों को ध्व’स्त करने में जुटी हुई है. मोतिहारी से एक ऐसी खबर सामने आई है. जिसने सबको हैरान कर दिया है. दरअसल श’राब के ठिकानों पर छा’पेमारी करने गई पुलिस टीम को अपनी पैंट उतारनी पड़ गई. क्योंकि पुलिसवाले जिस ठिकाने के पर छापेमारी करने गए थे. उस इलाके में लगभग कमर भर पानी था. इस दौरान कई पुलिस वाले हाथ में लाठी लिए अ’र्धनग्न भी दिखें.

 

पुलिसवालों को झेलनी पड़ी मुसीबत

घटना जिले के संग्रामपुर थाना इलाके की है. जहां कोइरगवा चेवर में छापेमारी करने गई पुलिस टीम को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा. पुलिस जहां छापेमारी करने गई थी. वहां काफी पानी था. पानी इतना था कि पुलिसवालों की वर्दी भीग जाती. ऐसे में कुछ पुलिसवालों ने अपनी पैंट को मोड़कर घुटने के ऊपर कर लिया तो वहीं कुछ और साथियों ने अपनी पैंट ही उतार ली.

इतनी मशक्कत करने के बाद हालांकि पुलिसवालों को बड़ी कामयाबी भी हाथ लगी. पुलिस ने इस बड़ी कार्रवाई में लगभग एक हजार लीटर देसी शराब नष्ट किया. अरेराज डीएसपी ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कोइरगवा चेवर में शराब बनाकर बेचा जा रहा है. पुलिस जब उस ठिकाने पर पहुंची तो उन्होंने देखा कि खेत में देसी शराब बनाया जा रहा है. पुलिस ने भट्ठी को ध्वस्त कर लगभग एक हजार लीटर देसी शराब भी नष्ट कर दिया. इस कार्रवाई में अरेराज, पहाड़पुर, गोबिंदगंज, संग्रामपुर और जिला मध निषेध की गठित टीम शामिल थी.

Input : First Bihar Jharkhand

Disclaimer : This article originally published by First Bihar Jharkhand

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MUZAFFARPUR

मुजफ्फरपुर प्लेटफार्म एक पर चलना दुश्वार, हर तरफ कब्जा

Ravi Pratap

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मुजफ्फरपुर जंक्शन ए वन ग्रेड होने के बावजूद यात्री सुविधाओं में फिसड्डी है। जंक्शन के सभी प्लेटफार्म पर अव्यवस्था का आलम है। प्लेटफार्म संख्या एक भी इससे अछूता नहीं है। यात्रियों की सुविधाओं का ख्याल न करते हुए रेलवे के अलग-अलग विभागों ने अपने फायदे के लिए प्लेटफार्म संख्या एक पर कब्जा जमा रखा है। इस कारण इस प्लेटफार्म पर यात्रियों का चलना भी दुश्वार हो गया है।

600 मीटर लंबे इस प्लेटफार्म पर कहीं भी ऐसी जगह नहीं बची है, जहां यात्री बेफ्रिक होकर आराम से चल सके। विभागों ने अपना सामान भारी मात्रा में प्लेटफार्म पर जमा लिया है। प्लेटफार्म के एक हिस्से में आरएमएस के हजारों पैकेट पड़े हैं तो दूसरे हिस्से में रेलवे के पार्सल का ढेर लगा है। बचे हिस्से में बॉक्स पोर्टल के सैकड़ों बॉक्स प्लेटफार्म पर पड़े हैं। इसके बाद भी बची-खुची जगहों पर रेलवे ने स्टॉल खुलवा दिया है। अमूमन डाउन लाइन की सभी महत्वपूर्ण ट्रेनें प्लेटफार्म संख्या एक पर ही आती हैं। ट्रेनों पर सवार होने के लिए हर दिन प्लेटफार्म पर अफरातफरी मची रहती है। इस स्थिति में हर तरफ सामान बिखरे होने से दर्जनों यात्री गिरकर चोटिल होते हैं।

पिछले हफ्ते हुई थी मौत

बीते आठ नवंबर को भी प्लेटफार्म एक पर हर तरह का सामान बिखरा पड़ा था। यात्रियों की संख्या भी काफी थी। ट्रेन में चढ़ने के लिए हुई धक्का-मुक्की के क्रम में समस्तीपुर के सुशील झा ट्रैक पर गिर पड़े व ट्रेन से कट गए। दो महीना पहले भी हुई इस तरह की घटना में एक अन्य यात्री की मौत हुई थी। चोटिल होने की घटनाएं अक्सर होती हैं।

प्लेटफार्म पर लगतीं बाइकें

रेलकर्मियों की मनमानी इस तरह चल रही है कि वे अपनी बाइकें प्लेटफार्म पर ही लगाते हैं। कुछ दिन पहले बाइक हटाने के लिए जीआरपी ने अभियान चलाया था। अभियान खत्म होते सैकड़ों की संख्या में बाइकें फिर से लगने लगी हैं। प्लेटफार्म के जिस हिस्से में बाइकें लगाई जाती हैं, वह प्लेटफार्म एक को प्लेटफार्म पांच व छह से जोड़ता है।

रखी जाती निर्माण सामग्री

प्लेटफार्म संख्या तीन व चार का हाल भी कमोबेश एक की तरह ही है। यहां पिछले एक साल से निर्माण काम चल रहा है। इसको लेकर प्लेटफार्म के एक बड़े हिस्से को घेर दिया गया है। निर्माण सामग्री रख दी गई है। इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही के कारण तीन महीने का फुटओवर ब्रिज का कार्य पिछले एक साल से चल रहा है।

प्लेटफार्म संख्या एक पर विभागों का कब्जा कर वहां सामान रख देना गंभीर मामला है। यह यात्रियों के लिए जानलेवा साबित होगा। स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले की जानकारी नहीं दी है। मामले की जांच कराई जाएगी। सभी विभागों को सामान हटाने का आदेश दिया जाएगा।

-सीएस प्रसाद, सीनियर डीसीएम, सोनपुर मंडल

Input : Live Hindustan

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