बिहार की बेटी मधु चौरसिया ने एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया है। 24-25 मार्च की शाम ब्रिटिश पार्लियामेंट में हुए ‘शी इंस्पायर अवार्ड-2025’ (She Inspire Award 2025) समारोह में उन्हें विशेष सम्मान से नवाजा गया। यह आयोजन ‘इंस्पायरिंग इंडियन वूमेन’ (IIW) द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें दुनियाभर से भारतीय मूल की प्रेरणादायक महिलाओं को सम्मानित किया गया। मधु चौरसिया, जिनकी शिक्षा मुजफ्फरपुर में हुई है, को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए यह प्रतिष्ठित अवार्ड प्रदान किया गया।
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शिक्षा और शुरुआती जीवन
मधु चौरसिया की प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय संगठन, बेगूसराय में हुई। उन्होंने बी.ए. की डिग्री मगध विश्वविद्यालय, गया से प्राप्त की। उनके पिता केंद्रीय विद्यालय संगठन में कार्यरत थे और अब रिटायर हो चुके हैं। पहले उनका परिवार पोखड़िया पीर, रामदयालु, मुजफ्फरपुर में रहता था, लेकिन रिटायरमेंट के बाद वे अपने पुश्तैनी गांव, खगड़िया चले गए। मधु अपने बचपन की बिहार में बिताई यादों को आज भी भावुक होकर याद करती हैं।
पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान
मधु चौरसिया ने पत्रकारिता की शुरुआत मुजफ्फरपुर के बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से की, जहां उन्होंने एम.ए. हिन्दी साहित्य की पढ़ाई भी की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने हिन्दुस्तान अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 2006 में ईटीवी हैदराबाद में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी सेवाएं दीं। 2008 में वे रायपुर, छत्तीसगढ़ चली गईं और वहां ज़ी न्यूज़ में सीनियर कॉपी एडिटर के तौर पर काम किया। हालांकि, पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण 2011 में उन्होंने कुछ समय के लिए पत्रकारिता से ब्रेक लिया।
2015 में वे इंग्लैंड चली गईं और वहां भी भारतीय मीडिया हाउस के लिए लगातार काम करती रहीं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने रेडियो जॉकी के रूप में भी काम किया। इसके अलावा, इंग्लैंड के स्काई चैनल पर प्रसारित होने वाले ‘मा टीवी’ के नारी तू नारायणी शो को उन्होंने होस्ट किया, जिसमें वे प्रेरणादायक भारतीय महिलाओं की कहानियां प्रस्तुत करती हैं।
‘शी इंस्पायर अवार्ड-2025’ में सम्मान
हर साल इंस्पायरिंग इंडियन वूमेन (IIW) द्वारा इंटरनेशनल वुमेन्स डे के अवसर पर ‘शी इंस्पायर अवार्ड’ का आयोजन किया जाता है। इस प्रतिष्ठित अवार्ड की शुरुआत 2017 में रश्मि मिश्रा ने की थी। यह अवार्ड दुनियाभर की भारतीय मूल की महिलाओं के योगदान को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है। इस बार 50 से 80 महिलाओं को इस अवार्ड से नवाजा गया, जिसमें बिहार की मधु चौरसिया को विशेष रूप से ‘धर्मा दुबे अवार्ड’ प्रदान किया गया।
ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन के हाथों मधु चौरसिया को सम्मानित किया गया। बॉब ब्लैकमैन को 2020 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से नवाजा जा चुका है। इस आयोजन में दुनियाभर से कई प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
समाज सेवा में योगदान
मधु चौरसिया पिछले 10 वर्षों से इंग्लैंड में रह रही हैं और अब वहां की नागरिक बन चुकी हैं। पेशे से वे एक शिक्षिका हैं, लेकिन इसके साथ ही वे फ्रीलांस जर्नलिस्ट के रूप में भी कार्यरत हैं। वे लगातार 4 वर्षों से इंग्लैंड में महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियों पर आधारित टीवी शो को होस्ट कर रही हैं।
इस आयोजन में बिहार की ही एक अन्य प्रतिभागी, पटना की मूल निवासी मंजरी सिंह को भी उनके सामुदायिक कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। मंजरी पिछले 25 वर्षों से स्कॉटलैंड में सेवा दे रही हैं और प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।
बिहार की बेटियों का वैश्विक मंच पर परचम
मधु चौरसिया और मंजरी सिंह जैसी महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की प्रतिभाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने कार्यों के लिए पहचान बनाना न सिर्फ उनके लिए बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है। ‘शी इंस्पायर अवार्ड-2025’ में सम्मानित होकर मधु चौरसिया ने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे बिहार का नाम रोशन किया है।
यह उपलब्धि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रही हैं। मधु चौरसिया की यह सफलता साबित करती है कि लगन और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।