बिहार विधानसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे का दौरा जारी है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल ने एक लोकप्रिय महिला मुखिया को विधायकी का टिकट दिया है। इस मुखिया को कुछ साल पहले ही केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पंचायती राज में उनके सराहनीय कार्य को लेकर सम्मानित किया था। इस मुखिया का नाम है रितु जायसवाल। सीतामढ़ी जिले में सोनबरसा ब्लॉक के सुदूर राज सिंहवाहिनी पंचायत की वह मुखिया हैं। राजद ने उन्हें परिहार विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया है।
दिल्ली के एक पब्लिक स्कूल की नौकरी छोड़ने और अपने आईएएस पति के साथ आरामदायक जीवन को त्याग कर रितु जायसवाल ने पंचायत चुनाव में हिस्सा लेने का फैसला किया था। इसके कुछ ही साल बाद उन्हें अपने काम के लिए देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने चैंपियंस ऑफ चेंज अवार्ड से सम्मानित किया। पिछले साल रितु जायसवाल सरपंच और पंचायत सचिवों के क्षमता निर्माण कार्यक्रम के लिए केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा चयनित बिहार के ग्राम प्रधानों (मुखिया) में से एक थीं।
You are doing commendable work as “Mukhiya”. Not only I hope but believe you will now be able to do same development for entire constituency. Let’s make a Crime free, Corruption free and Caste free state as stated in your twitter bio. Best Wishes https://t.co/GWgx3yyuqn
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) October 10, 2020
केंद्रीय पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रितु जायसवाल को प्रतिष्ठित दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार- 2019 से सम्मानित किया था। देश के 2.5 लाख पंचायत में से 240 लोगों को विभिन्न मानदंडों के आधार पर यह राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इसके अलावा आईआईटी मुंबई में आयोजित SSE Talks में रितु जायसवाल ने बिहार का प्रतिनिधित्व किया था। साथ ही ग्राम पंचायत विकास योजना को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा चयतिन 9 पैनलिस्ट में से रितु जायसवाल भी एक थीं।
रितु जायसवाल ने पंचायत में अपने काम से प्रसिद्धि हासिल की है। वे एक ऐसे राज्य से आती हैं, जहां पर महिलाएं अपने पति के प्रॉक्सी के तौर पर राजनीति में आती हैं। रितु के पति एक आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने 2018 में वीआरएस ले लिया था। उस समय वे मुख्य सतर्कता आयोग में आयुक्त के तौर पर तैनात थे। अब वे अपनी पत्नी रितु की सहायता कर रहे हैं और उनके समर्पण को देखकर काफी खुश हैं।
पंचायत में अपने काम से इतना कुछ हासिल करने वाली रितु जायसवाल के दिमाग में चुनाव लड़ना कभी था ही नहीं। लेकिन 2013 में जब वे राज सिंहवाहिनी पंचायत के अंतर्गत आने वाले अपने पति के गांव नरकटिया की यात्रा कर रही थीं, तब की स्थिति को देखकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में आने का फैसला किया। इसके कुछ समय बाद ही उन्होंने दिल्ली की अपनी नौकरी छोड़ दी और निर्णय लिया कि अब जमीनी स्तर पर काम करूंगी। हालांकि यह आसान नहीं था। ग्रामीणों ने शुरुआत में हतोत्साहित किया लेकिन वे अपने निर्णय पर कायम रहीं।
रितु जायसवाल कहती हैं कि सार्वजनिक जीवन में आने के बाद लोगों ने, खासकर महिलाओं ने मुझे मुखिया का चुनाव लड़ने के लिए कहा और मैं जीत गई। आज मेरी पंचायत के हर गांव में सड़क, सोलर वाटर पंप और टैंक्स हैं। साथ ही यह खुले में शौच से भी मुक्त है। इस पंचायत में हर घर में बिजली और सड़क पर लाइट की व्यवस्था है। वे कहती हैं कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी पंचायत के लोगों ने एकजुट होकर जरूरतमंदों की मदद करने में मेरा साथ दिया। मैं इसी तरह काम करना जारी रखना चाहती हूं।
रितु कहती हैं, ‘जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि मैंने सही निर्णय लिया था। राजनीति को एक नए दिशा देने की जरूरत है और यह तभी हो सकता है जब कुछ करने के लिए उत्साहित महिला और पुरुष इसमें आएंगे।’ राजद से टिकट मिलने पर रितु बताती हैं कि मैं निर्दलीय चुनाव लड़ने की योजना बना रही थी। मैं खुश हूं कि राजद ने मुझे टिकट दिया है। अगर मैं जीतती हूं तो मेरी कोशिश परिहार विधानसभा क्षेत्र में बदलाव लाने की होगी।
Input: Live Hindustan







