इंग्लैंड के प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में बिहार के प्रमुख लोकपर्व छठ पूजा पर आधारित एक महत्वपूर्ण केस स्टडी प्रकाशित हुई है, जिसने इस परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

यह केस स्टडी शहर के युवा सिद्धांत सारंग द्वारा लिखी गई है, जिसमें सिद्धांत ने छठ पूजा को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हुए यह दर्शाया है कि किस प्रकार छठ सामुदायिक और धार्मिक पर्व लोगों में स्वेच्छा से स्वच्छता, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण की भावना को जागृत करता है, और कई बार इसका सामाजिक प्रभाव सरकारी नियमों और प्रशासनिक प्रयासों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित होता है।

यह लेख लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के रिलिजन एंड ग्लोबल सोसाइटी ब्लॉग पर प्रकाशित हुआ है, जो धर्म और समाज से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण मंच है। लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स विश्व के टॉप 50 विश्वविद्यालयों में आता है।

सिद्धांत सारंग ने दिल्ली विश्वविद्यालय इतिहास विषय से स्नातक की पढ़ाई की है और बचपन से ही पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। अपने कार्यों के लिए उन्हें वर्ष 2019 में प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय डायना अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

यह उपलब्धि बिहार की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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