राकेश के सहारे सीबीआइ ने पकड़ी पहली ‘कड़ी’

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Navruna, Murder Mystery, CBI, Supreme Court, Muzaffarpur
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Navruna, Murder Mystery, CBI, Supreme Court, Muzaffarpur

 

नगर निगम के वार्ड – 23 के पार्षद राकेश कुमार सिन्हा की गिरफ्तारी नवरुणा के गुनाहगारों तक पहुंचने की सीबीआइ की पहली ‘कड़ी’ मानी जा रही है। अब तक की जांच में सीबीआइ को वे ही मजबूत कड़ी दिखे जो पूरे घटनाक्रम के तार को जोड़ सकता है। इस मजबूत कड़ी को सीबीआइ ने पकड़ी है। गुनाहगारों में आगे भी कई नामों की चर्चा है। वार्ड पार्षद के सहारे उन तक सीबीआइ के पहुंचने की कवायद मानी जा रही है। इस गिरफ्तारी से बताने की कोशिश की गई कि गुनाहगारों के संजाल को तोड़ने को लेकर सीबीआइ ने वह कड़ी खोज निकाली है, जहां से कोई बच नहीं सकता।

 

शहर में सीबीआइ की टीम कर रही कैंप : राकेश कुमार सिन्हा की गिरफ्तारी के बाद सीबीआइ की कई टीमों के शहर में कैंप करने की सूचना है। ऐसा माना जा रहा है कि आगे के ऑपरेशन को यह टीम अंजाम देगी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

 

नाला सफाई से जुड़े लोगों पर सीबीआइ की जांच रही केंद्रित : 18 सितंबर 2012 की रात नवरुणा का अपहरण हुआ। 26 नवंबर 2012 को उसके घर के नजदीक नाला सफाई के दौरान दो थैलियों में बंद कंकाल मिला। इस नाला के इस भाग की सफाई पर सीबीआइ की नजर गई। सफाई का तौर-तरीका कई आशंका को जन्म दे रहा था। नाले के इस भाग की सफाई से कई बड़े लोगों के नाम जुड़े बताए जाने लगे। सीबीआइ की जांच आखिर कर इसी पर केंद्रित होती गई। नाला सफाई से जुड़े लोगों से पूछताछ व कई लोगों की पॉलीग्राफी टेस्ट भी कराई गई।

 

डीएनए टेस्ट से साबित हुआ कंकाल नवरुणा का : 26 नवंबर 2012 को नाला से कंकाल मिलने के बाद पुलिस की ओर से उसके माता-पिता पर ब्लड सैंपल देने का दबाव बनाया गया। कंकाल की पहचान के लिए सैंपल देने की बात कही जा रही थी, लेकिन तब नवरुणा के माता-पिता ने ब्लड सैंपल देने ने इन्कार कर दिया। बाद में जब सीबीआइ ने मामले की जांच शुरू की तो 25 मार्च 2014 को नवरुणा की मां मैत्रीयी चक्रवर्ती व पिता अतुल्य चक्रवर्ती ने डीएनए टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल दिया। इसकी जांच रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया कि नाला से बरामद कंकाल नवरुणा का ही है। इस आधार पर सीबीआइ ने अपहरण के इस मामले को हत्या की धारा में जांच करने के लिए विशेष सीबीआइ कोर्ट में अर्जी दी। कोर्ट ने उनकी अर्जी स्वीकार कर ली।

 

Source : Dainik Jagran


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