सीमा पर जल्द ही ‘मेड इन इंडिया’ कार्बाइन सुरक्षाबलों के हाथ में होगी। रूस की तकनीक को मात देने वाली तकनीक से विकसित इस कार्बाइन से एक मिनट में 800 बुलेट फायर किए जा सकेंगे। अभी तक भारत रूस से यह कार्बाइन खरीदता रहा है लेकिन अब आर्मामेंट रिसर्च एवं डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट, पुणे के वैज्ञानिकों ने इसे देश में ही तैयार कर लिया है।

एक मिनट में निकलेंगे 800 बुलेट, रफ्तार होगी 650 मीटर प्रति सेकेंड

खास बात यह है कि यह च्वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कार्बाइन (जेवीपीसी) कार्बाइन रूस की तकनीक के मुकाबले काफी एडवांस है। जो ज्यादा मारक होने के साथ सैनिकों के लिए भी काफी सुविधाजनक है। तीन साल की मेहनत से तैयार हुई इस कार्बाइन का अब आर्मी परीक्षण कर रही है। प्रोडक्शन शुरू कर दी गई है और आर्मी को इसकी सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। लवली प्रोफेशनल यूनीवर्सिटी में चल रही 106वीं इंडियन साइंस कांग्रेस में इसे प्रदर्शित किया गया है।

कार्बाइन के बारे में जानकारी देते वैज्ञानिक एनआर गवली।

एआरडीई ने विकसित की ज्यादा मारक व सुविधाजनक कार्बाइन, आर्मी ले रही ट्रायल२०० मीटर की रेंज

एआरडीई, पुणे के डिप्टी डायरेक्टर वैज्ञानिक एनआर गवली ने बताया कि तकनीक व सुविधा के मुकाबले में यह कार्बाइन रूस से आगे है। रूस की कार्बाइन की रेंज 150 मीटर थी, जबकि ये 200 मीटर तक जा सकती है। रूस की कार्बाइन की प्रति मिनट 600 बुलेट फायर करने की क्षमता के मुकाबले यह 800 फायर करती है।

उन्‍होंने बताया कि इससे निकलने वाली गोली की स्पीड भी रूसी कार्बाइन के 500 मीटर के मुकाबले 650 मीटर प्रति सेकेंड है। सैनिकों की सुविधा को देखते हुए इसे चलाते वक्त झटका भी सिर्फ 1;8 च्यूल्स लगेगा, जो कि रूसी कार्बाइन के मुकाबले 60 फीसदी कम है। इससे लगातार चलाने के बावजूद सैनिक को थकावट नहीं होगी। यही नहीं, इस कार्बाइन में फायरिंग की आवाज कम करने के लिए साइलेंसर भी लगा है। जबकि रस्सी काटने के लिए चाकू भी लगाया गया है।

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ग्रेनेड दागने में भी सक्षम होगी इंसास राइफल और एके-47

एआरडीई पुणे ने सैनिकों की सुविधा के लिए नया ग्रेनेड लांचर भी इजाद किया है। जिसे इंसास राइफल और एके-47 के साथ अटैच किया जा सकता है। इसे लगाकर इंसास राइफल व एके-47 से फायरिंग के साथ साथ ग्रेनेड भी दागे जा सकेंगे।

वैज्ञानिक गवली के अनुसार इस लांचर से ग्रेनेड की मारक क्षमता 50 मीटर ऊंचाई और 400 मीटर दूरी तक होगी। जो फटने के बाद 10 गुणा 10 मीटर जगह को कवर करेगा। ग्रेनेड कितनी देर में फटेगा, इसके लिए टाइमर सैट किया जा सकता है। लगातार ३ साल मेहनत के बाद इसे बनाया गया है। जिसका ट्रायल कामयाब रहा है। अब इसकी प्रोडक्शन भी शुरू कर दी गई है।