बोधगया: बिहार में अपराध नियंत्रण और न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि राज्य में 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, ताकि आपराधिक मामलों का त्वरित निपटारा हो सके और दोषियों को जल्द सजा मिल सके। उन्होंने कहा कि स्पीडी ट्रायल व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा तथा इन अदालतों को सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अपराध के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और राज्य में कानून के शासन को और मजबूत बनाया जाएगा।
यह घोषणा शनिवार को बोधगया में आयोजित नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन के दौरान की गई। सम्मेलन का आयोजन बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) और बिहार न्यायिक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 14 करोड़ से अधिक आबादी वाले बिहार में प्रत्येक नागरिक तक समय पर न्याय पहुंचाना सरकार, न्यायपालिका और पुलिस की साझा जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सटीक और तेज होगी।

मुख्यमंत्री ने पुलिस की डायल-112 आपातकालीन सेवा को और प्रभावी बनाने की भी बात कही। उन्होंने बताया कि वर्तमान में औसत 10 मिनट का रिस्पॉन्स टाइम घटाकर 7 से 8 मिनट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए सभी थानों को आधुनिक उपकरणों, सीसीटीवी निगरानी, डिजिटल तकनीक और वैज्ञानिक जांच सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे आपात स्थिति में पुलिस तेजी से घटनास्थल तक पहुंच सके।

जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने हर महीने के दूसरे मंगलवार को पटना में राज्य स्तरीय सहयोग शिविर आयोजित करने का भी निर्णय लिया है। इस शिविर में वे नागरिक अपनी शिकायतें रख सकेंगे, जो प्रखंड या जिला स्तर पर अपने मामलों के निपटारे से संतुष्ट नहीं हैं। इससे लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक अतिरिक्त मंच उपलब्ध होगा।

सरकार का मानना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट, आधुनिक तकनीक, एआई आधारित जांच प्रणाली और बेहतर पुलिस रिस्पॉन्स जैसी पहलें राज्य की न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाएंगी। इन कदमों से न केवल अपराध नियंत्रण को मजबूती मिलेगी, बल्कि लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास भी और मजबूत होगा।











