पटना: बिहार में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रदेश के निजी विद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नए निर्देश लागू किए जा रहे हैं।

सरकार के अनुसार अब निजी स्कूलों को अपनी फीस संरचना पूरी तरह सार्वजनिक करनी होगी। स्कूल मनमाने तरीके से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे और अभिभावकों पर अनावश्यक शुल्क का बोझ डालने पर रोक रहेगी। इस फैसले से लाखों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी फीस और अतिरिक्त शुल्क को लेकर शिकायत कर रहे थे।

नई व्यवस्था के तहत अभिभावकों को किताबें, कॉपी और यूनिफॉर्म किसी भी दुकान से खरीदने की स्वतंत्रता दी जाएगी। स्कूल किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए दबाव नहीं बना सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल!
प्रदेश के निजी स्कूलों में मनमानी रोकने, फीस को नियंत्रित करने और छात्रों व अभिभावकों के हितों की रक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
निजी विद्यालयों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य,…
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) May 12, 2026
इसके अलावा फीस बकाया रहने की स्थिति में भी छात्रों को परीक्षा देने या रिजल्ट प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा बच्चों का अधिकार है और आर्थिक कारणों से उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि कोई निजी विद्यालय इन आदेशों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाने और शिकायतों के त्वरित समाधान की भी तैयारी की जा रही है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और सुलभ बनाना है, ताकि छात्रों और अभिभावकों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सके।











