फिर एक बार मोदी सरकार या कांग्रेस करेगी चमत्कार?
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फिर एक बार मोदी सरकार या कांग्रेस करेगी चमत्कार?

Santosh Chaudhary

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देश के सबसे बड़े सियासी दंगल यानी 11 अप्रैल से लेकर 19 मई तक सात चरणों में हुए लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आज सबके सामने आ जाएंगे। लोकसभा चुनाव के वोटों की गिनती आज यानी 23 मई 2019 को सुबह 8 बजे से शुरू होगी और धीरे-धीरे नतीजे सबके सामने आ जाएंगे। आज के नतीजों से साफ हो जाएगा कि 17वीं लोकसभा चुनाव में देश में किसकी सरकार बनेगी और कौन विपक्ष में बैठेगा। इतना ही नहीं, आज के नतीजों से यह भी साफ हो जाएगा कि एग्जिट पोल के आंकडे कितने सटीक थे और कितने गलत। लोकसभा चुनाव 2019 के निर्णायक नतीजे से इस सवाल का जवाब मिल जाएगा कि मोदी सरकार अपनी सत्ता बचाने में कामयाब होती है या राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए गठबंधन बीजेपी नीत एनडीए को मात देकर केंद्र की सत्ता हासिल करती है या फिर तीसरा मोर्चे को मौका मिलता है। इस बार के चुनाव में नजर सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के प्रदर्शन पर ही नहीं होंगी, बल्कि इस बार क्षेत्रीय पार्टियों के नतीजों पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा। लोकसभा चुनाव 2019 के सियासी दंगल में सपा, राजद, टीएमसी, वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी, टीआरएस, बीजेडी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के नतीजों पर भी सबकी निगाहें होंगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए या फिर कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाले यूपीए को स्पष्ट बहुमत न मिल पाने की स्थिति में इन्हीं क्षेत्रीय पार्टियों के हाथ में सत्ता की कुंजी हो सकती है और ये पार्टियां ही केंद्र में सरकार बनाने के लिहाज से अहम रोल अदा कर सकती हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले ध्यान देने वाली बात है कि तमिलनाडु की वेल्लोर लोकसभा सीट पर मतदान नहीं हो पाने की स्थिति में इस बार 542 लोकसभा सीटों पर मतदान हुए। तो चलिए जानते हैं लोकसभा चुनाव 2019 से जुड़ी दस अहम बातें…

1- लोकसभा चुनाव में बयानबाजी:
लोकसभा चुनाव 2019 में जिस तरह से राजनेताओं ने बयानबाजी की और भाषा के स्तर को गिराया, वह पूरे चुनाव में चर्चा का विषय रहा। इस लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान पीएम मोदी, अमित शाह, आजम खां, मेनका गांधी, मायावती, योगी आदित्यनाथ, और साध्वी प्रज्ञा जैसे नेता अपने विवादित बयानों को लेकर भी चर्चा में रहे। पीएम मोदी के भाषणों में सर्जिकल स्ट्राइक और राजीव गांधी का जिक्र खूब किया गया। वहीं साध्वी प्रज्ञा ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताकर विवाद को खड़ा कर दिया था, हालांकि उन्हें बाद में माफी मांगनी पड़ी थी। वहीं आजम खान जयाप्रदा को लेकर अंडरवियर वाले बयान से विवादों में रहे थे। मायावती और योगी ने अली और बजरंग बली वाले बयानों से भी चर्चा में रहे थे।

2- नेताओं पर चुनाव आयोग का डंडा: 
लोकसभा चुनाव 2019 में भले ही विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग को निशाने पर लिया, मगर कई राजनेताओं के ऊपर चुनाव आयोग ने उनके बयानबाजी को लेकर डंडा भी चलाया। मायावती, सीएम योगी, मेनका गांधी, आजम खान, साध्वी प्रज्ञा समेत कई नेताओं पर चुनाव आयोग ने प्रचार से बैन लगाया था। इन नेताओं ने अपने भाषणों से आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने पीएम मोदी और अमित शाह पर भी आचार संहिता के उल्लंघन का मामला उठाया, मगर चुनाव आयोग ने पूरी तरह से इन दोनों कद्दावर नेताओं को क्लीनचिट दे दी। इसे लेकर चुनाव आयोग विपक्षी पार्टियों के निशाने पर भी रहा।

3- लोकसभा चुनाव में चर्चा में रहे ये वीआईपी सीट:
2014 में जहां देश और मीडिया का ध्यान सिर्फ वाराणसी की सीट पर था, मगर इस चुनाव में यह परिपार्टी टूटती दिखी। इस बार वाराणसी से ज्यादा चर्चा बिहार की बेगूसराय सीट की रही। क्योंकि यहां से कन्हैया कुमार और गिरिराज सिंह के बीच मुकाबले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। बहरहाल, जानते हैं कि इस बार कौन-कौन सीटें वीआईपी रहीं। देश की वीआईपी सीटों में सबसे पहला नंबर आता है वाराणसी का। वाराणसी से नरेंद्र मोदी, अमेठी और वायनाड से राहुल गांधी, भोपाल से दिग्विजय सिंह और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर प्रसाद, बेगूसराय से कन्हैया कुमार, गिरिराज सिंह और तनवीर हसन, उत्तर पूर्वी दिल्ली से शीला दीक्षित और मनोज तिवारी, आजमगढ़ से अखिलेश यादव और निरहुआ के साथ ही रामपुर से आजम खान और जयाप्रदा शामिल हैं।

4- लोकसभा चुनाव में वीआईपी उम्मीदवार: 
इस लोकसभा चुनाव में वीआईपी उम्मीदवारों की लिस्ट थोड़ी लंबी है। इस लिस्ट में वाराणसी से नरेंद्र मोदी, बेगूसराय से कन्हैया कुमार, गिरिराज सिंह, पटना साबिह से शत्रुघ्न सिन्हा, रविशंकर प्रसाद, अमेठी और वायनाड से राहुल गांधी, रायबरेली से सोनिया गांधी, भोपाल से साध्वी प्रज्ञा और दिग्विजय सिंह, मुजफ्फरनगर से अजीत सिंह, मथुरा से हेमा मालिनी, फतेहपुर सीकरी से राज बब्बर, गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह, आजमगढ़ से अखिलेश यादव और दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ, मैनपुरी से मुलायम सिंह, गाजीपुर से मनोज सिन्हा, कन्नौज से डिंपल यादव, लखनऊ से राजनाथ सिंह और पूनम सिन्हा, रामपुर से जयाप्रदा और आजम खान, फिरोजाबाद से शिवपाल यादव आदि शामिल हैं।

5- पश्चिम बंगाल में हर चरण में हिंसा की खबरें:
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव हिंसापूर्ण माहौल में हुआ। लोकसभा चुनाव के पहले चरण को छोड़ दें तो पश्चिम बंगाल में हर चरण में हिंसा हुई। चुनाव में पश्चिम बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ताओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच काफी झड़प हुई। शहरों में तोड़फोड़ और आगजनी भी हुई इसके साथ मीडिया कर्मियों के साथ भी मारपीट हुई। इतना ही नहीं, रोड शो और चुनावी प्रचार के दौरान भी आगजनी की खबर आई। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की रैली में हमला हुआ। वहीं फिर ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने का मामला भी सामने आया और इस मूर्ति को तोड़ने का आरोप बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लगा।

6- 2019 लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल में फिर एक बार मोदी सरकार:
नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल में एक बार फिर से मोदी सरकार के आने की संभावना जताई गई है। ज्यादातर एग्जिट पोल में बीजेपी की पूर्ण बहुमत से सरकार बनती दिख रही है। वहीं एक पोल एजेंसी ने बीजेपी को पूर्ण बहुमत का आंकलन नहीं दिखाया है। कई एग्जिट पोल में यह अनुमान लगाया गया है कि बीजेपी को उत्तर प्रदेश में करीब 20 से 30 सीटों का नुकसान हो सकता है। अलग-अलग टीवी चैनलों ने अलग- अलग एग्जिट पोल के नतीजे दिए हैं। इंडिया टुडे एक्सिस ने एनडीए को 352 प्लस, यूपीए को 93 प्लस और अन्य को 82 प्लस सीट दिया है। वहीं, टाइम्स नाउ ने एनडीए को 306 प्लस, यूपीए को 132 प्लस और अन्य को 104 प्लस सीट दिया है। रिपब्लिक जन की बात ने एनडीए को 305, यूपीए को 124 और अन्य को 113 सीट। चाणक्य ने एनडीए को 350 सीटें दी हैं।

7- सपा-बसपा का गठबंधन और बीजेपी को चुनौती:
इस लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के रूप में वह हुआ, जो पिछले कई दशक में नहीं हुआ था। मोदी सरकार को रोकने के लिए और केंद्र में बड़ी भूमिका निभाने के दृष्टिकोण से यूपी की दो सबसे ब़ड़ी पार्टियों ने हाथ मिलाया। अखिलेश यादव और मायावती एक हुए और यूपी में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। यूपी में दोनों पार्टियों ने कांग्रेस के साथ जाने का फैसला नहीं किया और उन्होंने राय बरेली और अमेठी की सीट को छोड़कर सभी जगह अपने उम्मीदवार उतारे। हालांकि, उन्होंने अपने गठबंधन में आरएलडी को शामिल किया था।

8- विपक्षी दलों ने ईवीएम का मुद्दा उठाया: 
इस बार लोकसभा चुनाव के बीच विपक्षी दलों ने ईवीएम का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। इतना ही नहीं, 21 विपक्षी दलों ने 50 फीसदी ईवीएम मशीनों में वीवीपैट होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। मगर सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी दलों की पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया। बाद में फिर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से पांच वीवीपीएटी से मिलान की बात कही थी, जिसे खारिज कर दिया गया। दरअसल, ईवीएम एवं वीवीपीएटी के मुद्दे पर कांग्रेस, सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस सहित 22 प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग का रुख किया और उससे यह आग्रह किया कि मतगणना से पहले चुनिंदा मतदान केंद्रों पर वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान किया जाए। मगर इसे भी चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया।

9- कई दिग्गज नहीं उतरे मैदान में:
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, उमा भारती, एनसीपी नेता शरद पवार और लोजपा नेता रामविलास पासवान जैसे दिग्गज नेता इस बार चुनाव मैदान में नहीं उतरे। 17वीं लोकसभा चुनाव में इन दिग्गज नेताओं की कमी खली। साथ ही चारा घोटाले में जेल की सजा काट रहे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चुनाव प्रचार में भी भाग नहीं ले पाए।

10- लोकसभा चुनाव 2019 एक नजर में:
लोकसभा चुनाव 2019 कुल सात चरणों में सपन्न हुए। देश की कुल 542 सीटों पर अलग-अलग सात चरणों में मतदान हुए। लोकसभा चुनाव के साथ ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी हुए। पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीट पर हुआ। वहीं दूसरे चरण का मतदान 18 अप्रैल को 13 राज्यों की 97 सीट पर हुआ। 23 अप्रैल को तीसरा चरण में 14 राज्यों की 115 सीटों पर मतदान हुए। चौथे चरण में 29 अप्रैल को 9 राज्यों की 71 सीट पर वोटिंग हुई। पांचवें चरण में 6 मई को 7 राज्यों की 51 सीटों पर मतदान हुआ। छठे चरण में 12 मई को 7 राज्यों की 59 सीटों पर मतदान हुआ और सातवें चरण में आठ राज्यों की 59 सीटों पर मतदान हुए थे। आज यानी 23 मई को सभी नतीजे सामने आ जाएंगे।

2014 लोकसभा चुनाव के क्या रहे थे नतीजे:
2014 लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड बहुमत से बीजेपी सत्ता में आई थी। 2014 में कुल 543 सीटों के लिए हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 282 सीटें जीत कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 336 सीटें प्राप्त हुई थीं। वहीं यूपीए को 60 सीटें मिले थे। भाजपा ने 428 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 282 सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं कांग्रेस ने 464 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और उन्हें महज 44 सीटों पर ही जीत हासिल हो पाई थी।

Input : Hindustan

 

INDIA

मोदी सरकार का ऐलान- कैंप लगाकर 200 जिलों में बांटे जाएंगे लोन, गवाह बनेंगे सांसद

Santosh Chaudhary

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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि 31 मार्च 2020 तक संकटग्रस्त किसी भी एमएसएमई को एनपीए घोषित नहीं किया जाएगा. उन्होंने बैंकों के साथ नकदी की स्थिति की समीक्षा की.

NBFC की स्थिति में सुधार

प्रेस कॉन्फेंस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की पहचान की गई है, जिन्हें बैंक कर्ज दे सकते हैं. बैंक लेंडिंग के लिए नए ग्राहक जोड़े जाएंगे. वित्त मंत्री की मानें तो NBFC की स्थिति सुधर रही है.

200 जिलों में लगेंगे कैंप

वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक कर्ज देने के इरादे से 3 से 7 अक्टूबर के बीच 200 जिलों में एनबीएफसी और खुदरा कर्जदारों के लिए कैंप लगाएंगे. सरकार ने इस मुहिम को बैंक लोन मेला नाम दिया है. वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि 11 अक्टूबर के बाद भी लोन मेले का आयोजन किया जाएगा.

सबसे खास बात यह है कि जिन जिलों में इस लोन मेले का आयोजन किय़ा जाएगा, वहां के सांसद भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए इस मुहिम में हिस्सा लेंगे. इसके अलावा बैंकों के विलय के सवाल पर सीतारमण ने कहा कि नियम के मुताबिक काम तेजी चल रहा है और बैंक रिफॉर्म्स के बेहतर परिणाम आएंगे.

गौरतलब है कि मंदी की आहट के बीच मोदी सरकार की ओर से लगातार बड़ी घोषणाएं की जा रही हैं. खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को दूर करने के लिए कई बड़ी घोषणाएं कर चुकी हैं.

अर्थव्यवस्था में सुधार की लगातार कोशिश

इससे पहले शनिवार को वित्त मंत्री ने 60 फीसदी तक पूरे हो चुके निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं का काम पूरा करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की विशेष सुविधा देने की घोषणा की थी. साथ ही इतनी ही राशि निजी क्षेत्र से जुटाई जाएगी, इसकी भी जानकारी दी थी.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि सरकार अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को दूर करने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. सरकार इस बात को लेकर गंभीर है कि आने वाले दिनों में अगर और जरूरत पड़ी तो घोषणाएं की जाएंगी.

Input : Aaj Tak

 

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40 फीसदी युवतियां नहीं पहन रहीं हेलमेट

Himanshu Raj

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यातायता नियमों के उल्लंघन पर पुलिस की सख्ती के बाद भी शहर में 40 फीसदी युवतियां हेलमेट नहीं पहन रही हैं। यातायात विभाग ने शहर के दो प्रमुख चौराहों पर सर्वे किया तो यह बात सामने आई। एसपी ट्रैफिक ने मंगलवार को युवक और युवतियों पर एक सामान कार्रवाई का आदेश दिया है।

इसमें सितंबर के दूसरे सप्ताह की 9 से 11 तारीख तीन दिनों तक रोजाना दो सौ स्कूटी सवार महिलाओं को देखा किया। दोनों चौराहों पर सर्वे में सामने आया कि औसतन 40 फीसदी युवतियां हेलमेट नहीं पहन रही हैं। इसमें सबसे ज्यादा छात्राएं शामिल हैं, जो हेलमेट डिग्गी में रखकर चलती हैं। अधिकतर कामकाजी महिलाएं हेलमेट पहनकर चलती मिलीं।

सामान्य तौर पर महिलाओं और छात्राओं को विनती करने पर चेकिंग के दौरान छोड़ दिया जाता है। अब सख्ती से चालान की कार्रवाई का आदेश दिया गया है।

अगर आप में हेलमेट और सीटबेल्ट लगाने की आदत नहीं है या फिर रसूखदार हैं तो आज से अपनी आदत में सुधार कर लीजिए। अब चौराहों पर जांच कर रही पुलिस सिर्फ हेलमेट और सीटबेल्ट नहीं लगाने वालों को ही रोककर जांच करेगी। इसके साथ ही बाइक की तरह कार सवारों और एसयूवी गाड़ियों की चेकिंग होगी।

यातायात निदेशालय से मंगलवार को एक आदेश जारी किया है। इसमें साफ तौर पर लिखा है कि केवल वाहनों का कागज चेक करने के लिए नहीं रोका जाएगा। प्रथम दृष्टया हेलमेट और सीटबेल्ट के साथ यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को ही रोका जाएगा। इसके बाद यातायात नियमों या ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने वालों के कागज जांचे जाएंगे। दो पहिया वाहनों की तरह चार पहिया और एसयूवी वाहनों की भी जांच की जाएगी।

 

Input:Live Hindustan

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बेटा हो तो ऐसा : हर जन्मदिन पर मां का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते मोदी

Ravi Pratap

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को 69 साल के हो गए। इस मौके पर उन्होंने केवड़िया में सरदार सरोवर बांध पर मां नर्मदा की पूजा की। मोदी नमामि देवी नर्मदे महोत्सव में भी शामिल होंगे और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जाकर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि देंगे।

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पार्टी सूत्रों के मुताबिक, वे दोपहर बाद अहमदाबाद में मां हीराबेन का आशीर्वाद लेने जाएंगे। पहले मां से मिलने का कार्यक्रम मंगलवार सुबह 6 बजे का था। प्रधानमंत्री केवड़िया में ईको-टूरिज्म पार्क, केक्टस गार्डन भी गए। इसके बाद वे बटरफ्लाई गार्डन गए, जहां उन्होंने तितलियों को उड़ाया।। मोदी गुजरात में एक जनसभा को संबोधित करेंगे।

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सरदार सरोवर बांध में नर्मदा नदी का जलस्तर अपनी क्षमता 138.68 मीटर के करीब पहुंच चुका है। सरदार सरोवर मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। बांध की नींव 1961 में पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी, लेकिन यह 56 साल बाद 2017 में बनकर तैयार हुआ। पिछले साल यह बांध कम बारिश के कारण आधा खाली रह गया था। उधर, सूरत की एक बेकरी मोदी के जन्मदिन के लिए 7000 किलो का 700 फीट लंबा केक बनाया। इसे ‘केक अगेंस्ट करप्शन’ नाम दिया गया है।

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Input : Live Bihar

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