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फिर एक बार मोदी सरकार या कांग्रेस करेगी चमत्कार?

Santosh Chaudhary

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देश के सबसे बड़े सियासी दंगल यानी 11 अप्रैल से लेकर 19 मई तक सात चरणों में हुए लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आज सबके सामने आ जाएंगे। लोकसभा चुनाव के वोटों की गिनती आज यानी 23 मई 2019 को सुबह 8 बजे से शुरू होगी और धीरे-धीरे नतीजे सबके सामने आ जाएंगे। आज के नतीजों से साफ हो जाएगा कि 17वीं लोकसभा चुनाव में देश में किसकी सरकार बनेगी और कौन विपक्ष में बैठेगा। इतना ही नहीं, आज के नतीजों से यह भी साफ हो जाएगा कि एग्जिट पोल के आंकडे कितने सटीक थे और कितने गलत। लोकसभा चुनाव 2019 के निर्णायक नतीजे से इस सवाल का जवाब मिल जाएगा कि मोदी सरकार अपनी सत्ता बचाने में कामयाब होती है या राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए गठबंधन बीजेपी नीत एनडीए को मात देकर केंद्र की सत्ता हासिल करती है या फिर तीसरा मोर्चे को मौका मिलता है। इस बार के चुनाव में नजर सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के प्रदर्शन पर ही नहीं होंगी, बल्कि इस बार क्षेत्रीय पार्टियों के नतीजों पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा। लोकसभा चुनाव 2019 के सियासी दंगल में सपा, राजद, टीएमसी, वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी, टीआरएस, बीजेडी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के नतीजों पर भी सबकी निगाहें होंगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए या फिर कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाले यूपीए को स्पष्ट बहुमत न मिल पाने की स्थिति में इन्हीं क्षेत्रीय पार्टियों के हाथ में सत्ता की कुंजी हो सकती है और ये पार्टियां ही केंद्र में सरकार बनाने के लिहाज से अहम रोल अदा कर सकती हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले ध्यान देने वाली बात है कि तमिलनाडु की वेल्लोर लोकसभा सीट पर मतदान नहीं हो पाने की स्थिति में इस बार 542 लोकसभा सीटों पर मतदान हुए। तो चलिए जानते हैं लोकसभा चुनाव 2019 से जुड़ी दस अहम बातें…

1- लोकसभा चुनाव में बयानबाजी:
लोकसभा चुनाव 2019 में जिस तरह से राजनेताओं ने बयानबाजी की और भाषा के स्तर को गिराया, वह पूरे चुनाव में चर्चा का विषय रहा। इस लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान पीएम मोदी, अमित शाह, आजम खां, मेनका गांधी, मायावती, योगी आदित्यनाथ, और साध्वी प्रज्ञा जैसे नेता अपने विवादित बयानों को लेकर भी चर्चा में रहे। पीएम मोदी के भाषणों में सर्जिकल स्ट्राइक और राजीव गांधी का जिक्र खूब किया गया। वहीं साध्वी प्रज्ञा ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताकर विवाद को खड़ा कर दिया था, हालांकि उन्हें बाद में माफी मांगनी पड़ी थी। वहीं आजम खान जयाप्रदा को लेकर अंडरवियर वाले बयान से विवादों में रहे थे। मायावती और योगी ने अली और बजरंग बली वाले बयानों से भी चर्चा में रहे थे।

2- नेताओं पर चुनाव आयोग का डंडा: 
लोकसभा चुनाव 2019 में भले ही विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग को निशाने पर लिया, मगर कई राजनेताओं के ऊपर चुनाव आयोग ने उनके बयानबाजी को लेकर डंडा भी चलाया। मायावती, सीएम योगी, मेनका गांधी, आजम खान, साध्वी प्रज्ञा समेत कई नेताओं पर चुनाव आयोग ने प्रचार से बैन लगाया था। इन नेताओं ने अपने भाषणों से आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने पीएम मोदी और अमित शाह पर भी आचार संहिता के उल्लंघन का मामला उठाया, मगर चुनाव आयोग ने पूरी तरह से इन दोनों कद्दावर नेताओं को क्लीनचिट दे दी। इसे लेकर चुनाव आयोग विपक्षी पार्टियों के निशाने पर भी रहा।

3- लोकसभा चुनाव में चर्चा में रहे ये वीआईपी सीट:
2014 में जहां देश और मीडिया का ध्यान सिर्फ वाराणसी की सीट पर था, मगर इस चुनाव में यह परिपार्टी टूटती दिखी। इस बार वाराणसी से ज्यादा चर्चा बिहार की बेगूसराय सीट की रही। क्योंकि यहां से कन्हैया कुमार और गिरिराज सिंह के बीच मुकाबले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। बहरहाल, जानते हैं कि इस बार कौन-कौन सीटें वीआईपी रहीं। देश की वीआईपी सीटों में सबसे पहला नंबर आता है वाराणसी का। वाराणसी से नरेंद्र मोदी, अमेठी और वायनाड से राहुल गांधी, भोपाल से दिग्विजय सिंह और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर प्रसाद, बेगूसराय से कन्हैया कुमार, गिरिराज सिंह और तनवीर हसन, उत्तर पूर्वी दिल्ली से शीला दीक्षित और मनोज तिवारी, आजमगढ़ से अखिलेश यादव और निरहुआ के साथ ही रामपुर से आजम खान और जयाप्रदा शामिल हैं।

4- लोकसभा चुनाव में वीआईपी उम्मीदवार: 
इस लोकसभा चुनाव में वीआईपी उम्मीदवारों की लिस्ट थोड़ी लंबी है। इस लिस्ट में वाराणसी से नरेंद्र मोदी, बेगूसराय से कन्हैया कुमार, गिरिराज सिंह, पटना साबिह से शत्रुघ्न सिन्हा, रविशंकर प्रसाद, अमेठी और वायनाड से राहुल गांधी, रायबरेली से सोनिया गांधी, भोपाल से साध्वी प्रज्ञा और दिग्विजय सिंह, मुजफ्फरनगर से अजीत सिंह, मथुरा से हेमा मालिनी, फतेहपुर सीकरी से राज बब्बर, गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह, आजमगढ़ से अखिलेश यादव और दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ, मैनपुरी से मुलायम सिंह, गाजीपुर से मनोज सिन्हा, कन्नौज से डिंपल यादव, लखनऊ से राजनाथ सिंह और पूनम सिन्हा, रामपुर से जयाप्रदा और आजम खान, फिरोजाबाद से शिवपाल यादव आदि शामिल हैं।

5- पश्चिम बंगाल में हर चरण में हिंसा की खबरें:
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव हिंसापूर्ण माहौल में हुआ। लोकसभा चुनाव के पहले चरण को छोड़ दें तो पश्चिम बंगाल में हर चरण में हिंसा हुई। चुनाव में पश्चिम बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ताओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच काफी झड़प हुई। शहरों में तोड़फोड़ और आगजनी भी हुई इसके साथ मीडिया कर्मियों के साथ भी मारपीट हुई। इतना ही नहीं, रोड शो और चुनावी प्रचार के दौरान भी आगजनी की खबर आई। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की रैली में हमला हुआ। वहीं फिर ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने का मामला भी सामने आया और इस मूर्ति को तोड़ने का आरोप बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लगा।

6- 2019 लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल में फिर एक बार मोदी सरकार:
नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल में एक बार फिर से मोदी सरकार के आने की संभावना जताई गई है। ज्यादातर एग्जिट पोल में बीजेपी की पूर्ण बहुमत से सरकार बनती दिख रही है। वहीं एक पोल एजेंसी ने बीजेपी को पूर्ण बहुमत का आंकलन नहीं दिखाया है। कई एग्जिट पोल में यह अनुमान लगाया गया है कि बीजेपी को उत्तर प्रदेश में करीब 20 से 30 सीटों का नुकसान हो सकता है। अलग-अलग टीवी चैनलों ने अलग- अलग एग्जिट पोल के नतीजे दिए हैं। इंडिया टुडे एक्सिस ने एनडीए को 352 प्लस, यूपीए को 93 प्लस और अन्य को 82 प्लस सीट दिया है। वहीं, टाइम्स नाउ ने एनडीए को 306 प्लस, यूपीए को 132 प्लस और अन्य को 104 प्लस सीट दिया है। रिपब्लिक जन की बात ने एनडीए को 305, यूपीए को 124 और अन्य को 113 सीट। चाणक्य ने एनडीए को 350 सीटें दी हैं।

7- सपा-बसपा का गठबंधन और बीजेपी को चुनौती:
इस लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के रूप में वह हुआ, जो पिछले कई दशक में नहीं हुआ था। मोदी सरकार को रोकने के लिए और केंद्र में बड़ी भूमिका निभाने के दृष्टिकोण से यूपी की दो सबसे ब़ड़ी पार्टियों ने हाथ मिलाया। अखिलेश यादव और मायावती एक हुए और यूपी में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। यूपी में दोनों पार्टियों ने कांग्रेस के साथ जाने का फैसला नहीं किया और उन्होंने राय बरेली और अमेठी की सीट को छोड़कर सभी जगह अपने उम्मीदवार उतारे। हालांकि, उन्होंने अपने गठबंधन में आरएलडी को शामिल किया था।

8- विपक्षी दलों ने ईवीएम का मुद्दा उठाया: 
इस बार लोकसभा चुनाव के बीच विपक्षी दलों ने ईवीएम का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। इतना ही नहीं, 21 विपक्षी दलों ने 50 फीसदी ईवीएम मशीनों में वीवीपैट होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। मगर सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी दलों की पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया। बाद में फिर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से पांच वीवीपीएटी से मिलान की बात कही थी, जिसे खारिज कर दिया गया। दरअसल, ईवीएम एवं वीवीपीएटी के मुद्दे पर कांग्रेस, सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस सहित 22 प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग का रुख किया और उससे यह आग्रह किया कि मतगणना से पहले चुनिंदा मतदान केंद्रों पर वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान किया जाए। मगर इसे भी चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया।

9- कई दिग्गज नहीं उतरे मैदान में:
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, उमा भारती, एनसीपी नेता शरद पवार और लोजपा नेता रामविलास पासवान जैसे दिग्गज नेता इस बार चुनाव मैदान में नहीं उतरे। 17वीं लोकसभा चुनाव में इन दिग्गज नेताओं की कमी खली। साथ ही चारा घोटाले में जेल की सजा काट रहे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चुनाव प्रचार में भी भाग नहीं ले पाए।

10- लोकसभा चुनाव 2019 एक नजर में:
लोकसभा चुनाव 2019 कुल सात चरणों में सपन्न हुए। देश की कुल 542 सीटों पर अलग-अलग सात चरणों में मतदान हुए। लोकसभा चुनाव के साथ ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी हुए। पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीट पर हुआ। वहीं दूसरे चरण का मतदान 18 अप्रैल को 13 राज्यों की 97 सीट पर हुआ। 23 अप्रैल को तीसरा चरण में 14 राज्यों की 115 सीटों पर मतदान हुए। चौथे चरण में 29 अप्रैल को 9 राज्यों की 71 सीट पर वोटिंग हुई। पांचवें चरण में 6 मई को 7 राज्यों की 51 सीटों पर मतदान हुआ। छठे चरण में 12 मई को 7 राज्यों की 59 सीटों पर मतदान हुआ और सातवें चरण में आठ राज्यों की 59 सीटों पर मतदान हुए थे। आज यानी 23 मई को सभी नतीजे सामने आ जाएंगे।

2014 लोकसभा चुनाव के क्या रहे थे नतीजे:
2014 लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड बहुमत से बीजेपी सत्ता में आई थी। 2014 में कुल 543 सीटों के लिए हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 282 सीटें जीत कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 336 सीटें प्राप्त हुई थीं। वहीं यूपीए को 60 सीटें मिले थे। भाजपा ने 428 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 282 सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं कांग्रेस ने 464 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और उन्हें महज 44 सीटों पर ही जीत हासिल हो पाई थी।

Input : Hindustan

 

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अलविदा राहत इंदौरी: नहीं रहा ‘आसमां को जमीन’ पर लाने वाला शायर, पढ़िए उनके चुनिंदा शेर

Muzaffarpur Now

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मशहूर शायर राहत इंदौरी (Rahat Indori) इस दुनिया में नहीं रहे. राहत इंदौरी की कोविड-19 के इलाज के दौरान मृत्यु हुई. इंदौर के जिलाधिकारी मनीष सिंह ने पुष्टि की. उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने के बाद यहां एक निजी अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया थी.

अलविदा राहत इंदौरी: नहीं रहा 'आसमां को जमीन' पर लाने वाला शायर, पढ़िए उनके 20 चुनिंदा शेर

आज ही (मंगलवार) सुबह 70 वर्षीय शायर ने खुद ट्वीट कर अपने संक्रमित होने की जानकारी थी. उन्होंने कहा, “कोविड-19 के शुरूआती लक्षण दिखायी देने पर कल (सोमवार) मेरी कोरोना वायरस की जांच की गई जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई.” इंदौरी ने ट्वीट में आगे कहा, “दुआ कीजिये (मैं) जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं.” 1 जनवरी 1950 को इंदौर, मध्य प्रदेश में जन्में राहत कुरेशी उर्फ राहत इंदौरी के पिता का नाम रफ्तुल्लाह कुरैशी था जोकि कपड़ा मिल के कर्मचारी थे उनकी माता का नाम मकबूल उन निशा बेगम था.

उर्दू को विश्व पटल को एक नई और आधुनिक पहचान देने वाले शायरों में से एक राहत इंदौरी का इस दुनिया को छोड़ के जाना एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. आज हम आपको मशहूर शायर राहत इंदौरी के कुछ चुनिंदा शेर शेयर कर रहे हैं. राहत इंदौरी जब अपने खास और बेहद कमाल के लहजे में स्टेज पर शेर पढ़ते थे तालियों की गड़गड़ाहट रुकती नहीं थी. उनका एक शेर ‘आसमान लाये हो ले आओ ज़मीन पर रख दो..’ लोगों को बेहद पसंद है.

राहत इंदौरी के चुनिंदा शेर

1. आसमान लाये हो ले आओ ज़मीन पर रख दो.

मेरे हुजरे में नहीं, और कहीं पर रख दो,
आसमां लाये हो ले आओ, जमीं पर रख दो!
अब कहाँ ढूड़ने जाओगे, हमारे कातिल,
आप तो क़त्ल का इल्जाम, हमी पर रख दो!
उसने जिस ताक पर, कुछ टूटे दिये रखे हैं,
चाँद तारों को ले जाकर, वहीँ पर रख दो!

2. बुलाती है मगर जाने का नहीं
बुलाती है मगर जाने का नहीं
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं

ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो
चले हो तो ठहर जाने का नहीं

सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नहीं

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नहीं

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नहीं

3. ‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’

अगर खिलाफ हैं, होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुँआ है, कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.

4. तूफ़ानों से आँख मिलाओ
तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे
जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे

5. फकीरी पे तरस आता है
अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है
जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे

जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे

फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो
इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो

6. बहुत हसीन है दुनिया
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

7. उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है
बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं

8. बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं

9. आँख में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

10. बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ

11. तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

12. अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए

13. न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा

14. मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे
मेरे भाई, मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले

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शिक्षा मंत्री ने 11वीं क्लास में लिया दाखिला, मैट्रिक तक पढ़े होने के कारण होती थी फजीहत

Ravi Pratap

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झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने 11वीं क्लास में पढ़ेंगे. इसके लिए उन्होंने बोकारो जिला के बेरमो प्रखंड के नावाडीह देवी महतो कॉलेज में जगरनाथ महतो ने एडमिशन ले लिया है. मंत्री जी की शिक्षा को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे. मात्र मैट्रिक तक की इनकी शिक्षा पर निशाना साधा जा रहा था. इससे आजिज होकर इन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण करने का निर्णय लिया.

एडमिशन करवाने के बाद श्री महतो ने कहा कि अब वह उच्च शिक्षा हासिल करेंगे. इसलिए आर्ट्स संकाय में एडमिशन करवाया है. कॉलेज जाकर मंत्री महतो ने नामांकन फॉर्म भरा. इसके बाद एक हजार एक सौ रुपये नामांकन शुल्क जमा कर रशीद लिया.

मंत्री जी के नामांकन को लेकर जब पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने कहा कि वह सारा काम देखते हुए सब कुछ करेंगे. ‘क्लास भी करेंगे और मंत्रालय भी संभालेंगे. घर में किसानी का काम भी करेंगे, ताकि मेरे काम को देखकर अन्य लोग भी प्रेरित हों.’

उन्होंने कहा कि शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती. अन्य नौकरियों में रहते हुए लोग आईएएस, आईपीएस की तैयारी करते हैं और सफल भी होते हैं.

बता दें कि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने वर्ष 1995 में चंद्रपुरा प्रखंड के नेहरू उच्च विद्यालय तेलो से मैट्रिक की परीक्षा सेकेंड क्लास में पास की थी. और इन्होंने जिस कॉलेज की स्थापना इनेक सहयोग से ही हुआ है. उसी कॉलेज में इन्होंने अपना नामांकण कराया है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिस दिन वह झारखंड के शिक्षा मंत्री बने थे, उसी दिन सोच लिया था कि अब आगे की पढ़ाई करेंगे. उनके मंत्री बनने के बाद लोगों ने कहा था कि दसवीं पास विधायक को शिक्षा मंत्री बनाया गया है. इसलिए हमने तय किया कि हम पढ़ेंगे. उच्च शिक्षा हासिल करेंगे और राज्य के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा सुविधा देंगे.

Input : Live Cities

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14 साल बाद मिला खोया हुआ पर्स, पुलिस ने शख्स को लौटाए पैसे

Muzaffarpur Now

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मुंबई में एक शख्स को उसको खोया हुआ पुराना पर्स वापस मिल गया। ये पर्स 14 साल पहले मुंबई की लोकल ट्रेन में खोया था और इस पर्स में उस समय 900 रुपये थे। साल 2006 में खोया हुआ ये पर्स शख्स को 14 साल बाद अब मिला है और पुलिस ने शख्स को उसकी राशि भी लौटा दी है।

14 साल पहले मुंबई लोकल में खो गया था ...

हेमंत पेडलकर साल 2006 में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-पनवेल लोकल ट्रेन में सफर कर रहे थे, जिस वक्त उनका पर्स ट्रेन में गुम हो गया। आज सरकारी रेलवे पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में बताया। इस साल अप्रैल महीने में हेमंत को जीआरपी की ओर से कॉल आई और उन्हें जानकारी दी गई कि उनका 14 साल पहले खोया हुआ पर्स अब मिल गया है।  हालांकि तब मुंबई में कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन के कारण हेमंत अपना पर्स लेकर नहीं आ पाए थे। लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद पेडलकर जो कि पनवेल में रहते हैं, वाशी के जीआरपी ऑफिस गए और अपना पर्स वहां से बरामद किया और पुलिस ने हेमंत को पर्स में रखी राशि भी लौटाई।

हेमंत पेडलकर ने बताया कि मेरे पर्स में 900 रुपये थे, जिसमें एक पांच सौ का नोट भी था जो साल 2016 में बंद कर दिया गया। पुलिस ने हेमंत को तीन सौ रुपये लौटा दिए और स्टाम्प पेपर काम के लिए पुलिस ने सौ रुपये काट लिए। हेमंत ने बताया कि पुलिस उसको 500 रुपये बदलकर देगी।

हेमंत ने कहा कि जब वो जीआरपी ऑफिस गए थे तो वहां कई लोग थे जो अपने चुराए हुए पैसे वापस लेने आए थे। इसमें कई हजारों नोट थे जो नोटबंदी के दौरान बंद हो चुके थे, इन लोगों को इस बात की चिंता थी कि उन्हें उनका पैसा कैसे और कब वापस मिलेगा।

हेमंत पेडलकर ने बताया कि वो उनके पैसे वापस मिलने पर बेहद खुश हैं। एक जीआपरी अधिकारी ने बताया कि जिसने हेमंत पेडलकर का पर्स चुराया था, उसे कुछ समय पहले ही गिरफ्तार किया गया था। अधिकारी ने बताया कि हमें आरोपी से हेमंत का पर्स मिला, जिसमें 900 रुपये थे।

अधिकारी ने बताया कि हमने हेमंत को 300 रुपये लौटा दिए हैं और 500 रुपये तब लौटा दिए जाएंगे, जब पुराना नोट नए नोट से बदल दिया जाएगा।

Input : Amar Ujala

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