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फिर एक बार मोदी सरकार या कांग्रेस करेगी चमत्कार?

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देश के सबसे बड़े सियासी दंगल यानी 11 अप्रैल से लेकर 19 मई तक सात चरणों में हुए लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आज सबके सामने आ जाएंगे। लोकसभा चुनाव के वोटों की गिनती आज यानी 23 मई 2019 को सुबह 8 बजे से शुरू होगी और धीरे-धीरे नतीजे सबके सामने आ जाएंगे। आज के नतीजों से साफ हो जाएगा कि 17वीं लोकसभा चुनाव में देश में किसकी सरकार बनेगी और कौन विपक्ष में बैठेगा। इतना ही नहीं, आज के नतीजों से यह भी साफ हो जाएगा कि एग्जिट पोल के आंकडे कितने सटीक थे और कितने गलत। लोकसभा चुनाव 2019 के निर्णायक नतीजे से इस सवाल का जवाब मिल जाएगा कि मोदी सरकार अपनी सत्ता बचाने में कामयाब होती है या राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए गठबंधन बीजेपी नीत एनडीए को मात देकर केंद्र की सत्ता हासिल करती है या फिर तीसरा मोर्चे को मौका मिलता है। इस बार के चुनाव में नजर सिर्फ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के प्रदर्शन पर ही नहीं होंगी, बल्कि इस बार क्षेत्रीय पार्टियों के नतीजों पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा। लोकसभा चुनाव 2019 के सियासी दंगल में सपा, राजद, टीएमसी, वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी, टीआरएस, बीजेडी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के नतीजों पर भी सबकी निगाहें होंगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए या फिर कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाले यूपीए को स्पष्ट बहुमत न मिल पाने की स्थिति में इन्हीं क्षेत्रीय पार्टियों के हाथ में सत्ता की कुंजी हो सकती है और ये पार्टियां ही केंद्र में सरकार बनाने के लिहाज से अहम रोल अदा कर सकती हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले ध्यान देने वाली बात है कि तमिलनाडु की वेल्लोर लोकसभा सीट पर मतदान नहीं हो पाने की स्थिति में इस बार 542 लोकसभा सीटों पर मतदान हुए। तो चलिए जानते हैं लोकसभा चुनाव 2019 से जुड़ी दस अहम बातें…

1- लोकसभा चुनाव में बयानबाजी:
लोकसभा चुनाव 2019 में जिस तरह से राजनेताओं ने बयानबाजी की और भाषा के स्तर को गिराया, वह पूरे चुनाव में चर्चा का विषय रहा। इस लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान पीएम मोदी, अमित शाह, आजम खां, मेनका गांधी, मायावती, योगी आदित्यनाथ, और साध्वी प्रज्ञा जैसे नेता अपने विवादित बयानों को लेकर भी चर्चा में रहे। पीएम मोदी के भाषणों में सर्जिकल स्ट्राइक और राजीव गांधी का जिक्र खूब किया गया। वहीं साध्वी प्रज्ञा ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताकर विवाद को खड़ा कर दिया था, हालांकि उन्हें बाद में माफी मांगनी पड़ी थी। वहीं आजम खान जयाप्रदा को लेकर अंडरवियर वाले बयान से विवादों में रहे थे। मायावती और योगी ने अली और बजरंग बली वाले बयानों से भी चर्चा में रहे थे।

2- नेताओं पर चुनाव आयोग का डंडा: 
लोकसभा चुनाव 2019 में भले ही विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग को निशाने पर लिया, मगर कई राजनेताओं के ऊपर चुनाव आयोग ने उनके बयानबाजी को लेकर डंडा भी चलाया। मायावती, सीएम योगी, मेनका गांधी, आजम खान, साध्वी प्रज्ञा समेत कई नेताओं पर चुनाव आयोग ने प्रचार से बैन लगाया था। इन नेताओं ने अपने भाषणों से आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने पीएम मोदी और अमित शाह पर भी आचार संहिता के उल्लंघन का मामला उठाया, मगर चुनाव आयोग ने पूरी तरह से इन दोनों कद्दावर नेताओं को क्लीनचिट दे दी। इसे लेकर चुनाव आयोग विपक्षी पार्टियों के निशाने पर भी रहा।

3- लोकसभा चुनाव में चर्चा में रहे ये वीआईपी सीट:
2014 में जहां देश और मीडिया का ध्यान सिर्फ वाराणसी की सीट पर था, मगर इस चुनाव में यह परिपार्टी टूटती दिखी। इस बार वाराणसी से ज्यादा चर्चा बिहार की बेगूसराय सीट की रही। क्योंकि यहां से कन्हैया कुमार और गिरिराज सिंह के बीच मुकाबले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। बहरहाल, जानते हैं कि इस बार कौन-कौन सीटें वीआईपी रहीं। देश की वीआईपी सीटों में सबसे पहला नंबर आता है वाराणसी का। वाराणसी से नरेंद्र मोदी, अमेठी और वायनाड से राहुल गांधी, भोपाल से दिग्विजय सिंह और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर प्रसाद, बेगूसराय से कन्हैया कुमार, गिरिराज सिंह और तनवीर हसन, उत्तर पूर्वी दिल्ली से शीला दीक्षित और मनोज तिवारी, आजमगढ़ से अखिलेश यादव और निरहुआ के साथ ही रामपुर से आजम खान और जयाप्रदा शामिल हैं।

4- लोकसभा चुनाव में वीआईपी उम्मीदवार: 
इस लोकसभा चुनाव में वीआईपी उम्मीदवारों की लिस्ट थोड़ी लंबी है। इस लिस्ट में वाराणसी से नरेंद्र मोदी, बेगूसराय से कन्हैया कुमार, गिरिराज सिंह, पटना साबिह से शत्रुघ्न सिन्हा, रविशंकर प्रसाद, अमेठी और वायनाड से राहुल गांधी, रायबरेली से सोनिया गांधी, भोपाल से साध्वी प्रज्ञा और दिग्विजय सिंह, मुजफ्फरनगर से अजीत सिंह, मथुरा से हेमा मालिनी, फतेहपुर सीकरी से राज बब्बर, गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह, आजमगढ़ से अखिलेश यादव और दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ, मैनपुरी से मुलायम सिंह, गाजीपुर से मनोज सिन्हा, कन्नौज से डिंपल यादव, लखनऊ से राजनाथ सिंह और पूनम सिन्हा, रामपुर से जयाप्रदा और आजम खान, फिरोजाबाद से शिवपाल यादव आदि शामिल हैं।

5- पश्चिम बंगाल में हर चरण में हिंसा की खबरें:
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव हिंसापूर्ण माहौल में हुआ। लोकसभा चुनाव के पहले चरण को छोड़ दें तो पश्चिम बंगाल में हर चरण में हिंसा हुई। चुनाव में पश्चिम बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ताओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच काफी झड़प हुई। शहरों में तोड़फोड़ और आगजनी भी हुई इसके साथ मीडिया कर्मियों के साथ भी मारपीट हुई। इतना ही नहीं, रोड शो और चुनावी प्रचार के दौरान भी आगजनी की खबर आई। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की रैली में हमला हुआ। वहीं फिर ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने का मामला भी सामने आया और इस मूर्ति को तोड़ने का आरोप बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लगा।

6- 2019 लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल में फिर एक बार मोदी सरकार:
नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल में एक बार फिर से मोदी सरकार के आने की संभावना जताई गई है। ज्यादातर एग्जिट पोल में बीजेपी की पूर्ण बहुमत से सरकार बनती दिख रही है। वहीं एक पोल एजेंसी ने बीजेपी को पूर्ण बहुमत का आंकलन नहीं दिखाया है। कई एग्जिट पोल में यह अनुमान लगाया गया है कि बीजेपी को उत्तर प्रदेश में करीब 20 से 30 सीटों का नुकसान हो सकता है। अलग-अलग टीवी चैनलों ने अलग- अलग एग्जिट पोल के नतीजे दिए हैं। इंडिया टुडे एक्सिस ने एनडीए को 352 प्लस, यूपीए को 93 प्लस और अन्य को 82 प्लस सीट दिया है। वहीं, टाइम्स नाउ ने एनडीए को 306 प्लस, यूपीए को 132 प्लस और अन्य को 104 प्लस सीट दिया है। रिपब्लिक जन की बात ने एनडीए को 305, यूपीए को 124 और अन्य को 113 सीट। चाणक्य ने एनडीए को 350 सीटें दी हैं।

7- सपा-बसपा का गठबंधन और बीजेपी को चुनौती:
इस लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के रूप में वह हुआ, जो पिछले कई दशक में नहीं हुआ था। मोदी सरकार को रोकने के लिए और केंद्र में बड़ी भूमिका निभाने के दृष्टिकोण से यूपी की दो सबसे ब़ड़ी पार्टियों ने हाथ मिलाया। अखिलेश यादव और मायावती एक हुए और यूपी में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। यूपी में दोनों पार्टियों ने कांग्रेस के साथ जाने का फैसला नहीं किया और उन्होंने राय बरेली और अमेठी की सीट को छोड़कर सभी जगह अपने उम्मीदवार उतारे। हालांकि, उन्होंने अपने गठबंधन में आरएलडी को शामिल किया था।

8- विपक्षी दलों ने ईवीएम का मुद्दा उठाया: 
इस बार लोकसभा चुनाव के बीच विपक्षी दलों ने ईवीएम का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। इतना ही नहीं, 21 विपक्षी दलों ने 50 फीसदी ईवीएम मशीनों में वीवीपैट होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। मगर सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी दलों की पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया। बाद में फिर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से पांच वीवीपीएटी से मिलान की बात कही थी, जिसे खारिज कर दिया गया। दरअसल, ईवीएम एवं वीवीपीएटी के मुद्दे पर कांग्रेस, सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस सहित 22 प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग का रुख किया और उससे यह आग्रह किया कि मतगणना से पहले चुनिंदा मतदान केंद्रों पर वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान किया जाए। मगर इसे भी चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया।

9- कई दिग्गज नहीं उतरे मैदान में:
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, उमा भारती, एनसीपी नेता शरद पवार और लोजपा नेता रामविलास पासवान जैसे दिग्गज नेता इस बार चुनाव मैदान में नहीं उतरे। 17वीं लोकसभा चुनाव में इन दिग्गज नेताओं की कमी खली। साथ ही चारा घोटाले में जेल की सजा काट रहे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चुनाव प्रचार में भी भाग नहीं ले पाए।

10- लोकसभा चुनाव 2019 एक नजर में:
लोकसभा चुनाव 2019 कुल सात चरणों में सपन्न हुए। देश की कुल 542 सीटों पर अलग-अलग सात चरणों में मतदान हुए। लोकसभा चुनाव के साथ ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी हुए। पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 91 सीट पर हुआ। वहीं दूसरे चरण का मतदान 18 अप्रैल को 13 राज्यों की 97 सीट पर हुआ। 23 अप्रैल को तीसरा चरण में 14 राज्यों की 115 सीटों पर मतदान हुए। चौथे चरण में 29 अप्रैल को 9 राज्यों की 71 सीट पर वोटिंग हुई। पांचवें चरण में 6 मई को 7 राज्यों की 51 सीटों पर मतदान हुआ। छठे चरण में 12 मई को 7 राज्यों की 59 सीटों पर मतदान हुआ और सातवें चरण में आठ राज्यों की 59 सीटों पर मतदान हुए थे। आज यानी 23 मई को सभी नतीजे सामने आ जाएंगे।

2014 लोकसभा चुनाव के क्या रहे थे नतीजे:
2014 लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड बहुमत से बीजेपी सत्ता में आई थी। 2014 में कुल 543 सीटों के लिए हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 282 सीटें जीत कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 336 सीटें प्राप्त हुई थीं। वहीं यूपीए को 60 सीटें मिले थे। भाजपा ने 428 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 282 सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं कांग्रेस ने 464 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और उन्हें महज 44 सीटों पर ही जीत हासिल हो पाई थी।

Input : Hindustan

 

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पिता बनना चाहते थे IAS लेकिन बन नहीं पाए, फिर बेटी पढ लिखकर IAS बनी और पूरा किया पिता का सपना

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जरूरी नहीं कि एक बेटा ही पिता का सपना पूरा करता है बेटियों को मौका तो दीजिए बेटियां भी देशभर में पिता का नाम रौशन करती है। ऐसी ना जाने कितनी कहानियां हैं जिनमें बेटियों ने मां बाप का सिर गर्व से ऊंचा किया। आज एक ऐसी ही कहानी हम आपको बता रहे हैं। ये कहानी है साक्षी की। जो उत्तर प्रदेश के रॉबर्टगंज की रहनी वाली हैं। साक्षी 2018 में IAS बनीं।

साक्षी ने बताया कि वह पढ़ाई में शुरू से ही अच्छी रही है और स्नातक तक की पढ़ाई उसने राबर्ट्सगंज में रहकर ही की है। हाईस्कूल में 76 प्रतिशत और इंटर में 81.4 प्रतिशत अंक लाकर उसने अपने स्कूल का नाम रोशन किया था। राजकीय महिला महाविद्यालय से साक्षी ने बीए की डिग्री हासिल की।

इंटर के बाद से ही मन बना लिया: यूपीएससी की तैयारी के सवाल पर साक्षी ने बताया कि इंटर में 81 प्रतिशत अंक आने के बाद उसने मन ही मन में यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला कर लिया था, लेकिन राबर्ट्सगंज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अच्छे साधन नहीं होने के कारण उसने ग्रेजुएशन तक इंतजार करने का फैसला किया।

पिता के सपने को किया साकार : साक्षी ने बताया कि ग्रेजुएशन करने के बाद उसने दिल्ली आने का फैसला किया। जब उसने अपने पिता को बताया कि वह पढ़लिख कर आईएएस बनना चाहती है तो उसके पिता ने साक्षी को बहुत सपोर्ट किया। साक्षी के पिता कृष्ण कुमार गर्ग पेश से व्यापारी हैं और माता रेनु गर्ग एक घरेलू महिला हैं।

साक्षी ने बताया कि उसके पिता आईएएस बनना चाहते थे, लेकिन किन्हीं वजहों से वह अपना सपना पूरा नहीं कर पाए, इसलिए उन्होंने साक्षी को हमेशा यूपीएससी के लिए ना केवल मानसिक रूप से तैयार किया बल्कि हर कदम पर उसका सपोर्ट भी किया। साक्षी के पिता कृष्ण कुमार गर्ग ने बताया कि वह खुद आईएएस बनना चाहते थे, मगर जब उनका सपना पूरा नहीं हुआ तो बेटी को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

Input:Live Bavaal

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ममता बनर्जी को 10 लाख ‘जय श्री राम’ लिखे पोस्ट कार्ड भेजेगी बीजेपी

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पश्चिम बंगाल से बीजेपी के नवनिर्वाचित सांसद अर्जुन सिंह ने कहा, “हमने मुख्यमंत्री के आवास पर ‘जय श्री राम’ लिखे 10 लाख पोस्टकार्ड भेजने का निर्णय लिया है.”

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनावों में हार का सामना करने वाली तृणमूल कांग्रेस के जख्मों पर नमक छिड़कते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ‘जय श्री राम’ लिखे 10 लाख पोस्टकार्ड भेजने का निर्णय लिया है.

पश्चिम बंगाल से बीजेपी के नवनिर्वाचित सांसद अर्जुन सिंह ने कहा, “हमने मुख्यमंत्री के आवास पर ‘जय श्री राम’ लिखे 10 लाख पोस्टकार्ड भेजने का निर्णय लिया है.”

तृणमूल कांग्रेस के विधायक रह चुके अर्जुन सिंह आम चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे. उन्होंने ये बात बीजेपी कार्यकर्ताओं के समूह पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने के बाद कही, जो उस स्थान पर ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे जहां तृणमूल कांग्रेस के नेता बैठक कर रहे थे.

सूत्रों ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेता उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाडा में एकत्रित हुए थे, ताकि पार्टी के उन कार्यालयों को फिर से वापस लेने की रणनीति बनाई जा सके जिन्हें कथित रूप से बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ले लिया है.

तृणमूल कांग्रेस नेता एवं राज्य के मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने दावा किया कि अर्जुन सिंह और बीजेपी नेता मुकुल रॉय के पुत्र शुभ्रांशु रॉय ने क्षेत्र में मुश्किल पैदा करन की साजिश रची है. उन्होंने आरोप लगाया कि शुभ्रांशु पिछले मंगलवार तृणमूल छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे.

पुलिस सूत्रों ने कहा कि बैठक स्थल के बाहर एकत्रित लोगों ने नारेबाजी की और आरोप लगाया कि मलिक तथा मदन मित्रा, तपस रॉय और सुजीत बोस जैसे तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की मौजूदगी क्षेत्र में शांति के लिए हानिकारक है.

सूत्रों ने बताया कि पुलिस और आरएएफ कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति हाथ से निकलते देख लाठीचार्ज किया. मलिक ने कहा, “यह अभूतपूर्व है. हमने इस तरह की संस्कृति बंगाल में नहीं देखी है. यह बीजेपी की संस्कृति है.”

वहीं अर्जुन सिंह ने इन आरोपों को नकार दिया है. उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस के नेता व्यर्थ की बातें कर रहे हैं. लोगों ने तृणमूल कांग्रेस को खारिज किया है और यह उनकी प्रतिक्रिया है.”

हाल में संपन्न लोकसभा चुनावों में बीजेपी कुल 42 सीटों में से 18 सीटें जीतकर बंगाल में एक राजनीतिक ताकत के तौर पर उभरी है. उसके बाद से तृणमूल कांग्रेस के नेता बीजेपी में शामिल हो रहे हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या तृणमूल कांग्रेस प्रदर्शन को लेकर पुलिस में कोई शिकायत दर्ज कराएगी, मलिक ने कहा कि उनकी पार्टी इससे राजनीतिक रूप से निपटेगी. राज्य के मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार पर हमले का प्रयास किया.

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि वहां तनाव उत्पन्न होने पर दुकानें और बाजार बंद हो गए. उन्होंने कहा, “किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन एक पुलिस पिकेट स्थापित किया गया है. हम इसके लिए सभी उपाय कर रहे हैं कि क्षेत्र में शांति भंग न हो.”

शुक्रवार को पश्चिम बंगाल बीजेपी ने ममता बनर्जी पर लोगों के उस समूह पर भड़कने के लिए निशाना साधा जो उनकी कार के आगे ‘जय श्री राम’ बोल रहे थे. बीजेपी ने सवाल किया कि क्या राज्य में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाना अपराध है.

गुरुवार को ममता बनर्जी उस वक्त नाराज हो गई थीं जब कुछ व्यक्तियों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए. इन लोगों ने उस वक्त ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया जब उनका काफिला बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के भाटपारा क्षेत्र से गुजर रहा था.

Input : News18

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प्रेग्नेंट महिला की जान बचाने के लिए मुस्लिम शख्स ने रोजा तोड़ दिया अपना खून, हर तरफ हो रही है तारीफ

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इस्लाम धर्म में रमजान (Ramadan) के दौरान रोजे का बहुत महत्व है. रमजान के पूरे गर्मी भरे महीने भूखे-प्यासे रहना और वक्त पर नमाज़ अदा करना. समय पर सेहरी खाना और शाम के समय सही वक्त पर इफ्तार लेना. रमजान का ये पूरा महीना मुस्लिमों के लिए बहुत खास होता है, लेकिन राजस्थान के एक शख्स ने अपना रोजा सिर्फ इसलिए तोड़ दिया क्योंकि एक महिला को खून की ज़रुरत थी.

रमज़ान के महीने में गरीबों को दान करना और मदद करना अच्छा माना जाता है, लेकिन किसी जरुरतमंद के लिए रोज़ा तोड़ने जैसी घटना बहुत कम देखी है.

दरअसल, राजस्थान के अलवर में एक प्रेग्नेंट महिला को खून की सख्त जरुरत थी. अशरफ खान नाम के इस व्यक्ति ने इंसानियत दिखाई और महिला को खून देने के लिए अपना रोजा तोड़ दिया.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सावित्री देवी नाम की इस गर्भवती महिला का हीमोग्लोबिन बहुत लो था, इसे तुंरत खून की जरुरत थी.

अशरफ खान के मुताबिक, “मुझे फोन पर मैसेज आया कि एक आदमी को अपनी साली के लिए तुंरत बी ब्लड ग्रुप का खून चाहिए. मैंने तुरंत उस आदमी को फोन किया और कहा कि मैं शाम को इफ्तार के बाद आ जाउंगा, लेकिन उस आदमी ने मुझसे कहा कि डॉक्टर ने जितना जल्दी हो सके खून मांगा है, क्योंकि उसकी साली प्रेग्नेंट है.”

फिर क्या था अशरफ खान तुंरत हॉस्पिटल पहुंचे और उन्होंने अपना रोज़ा तोड़ महिला को खून देकर उसकी और उसके बच्चे की जान बचाई.

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