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धोनी के बारे में दोस्‍त ने खोला राज- हम उसे आतंकवादी कहते थे, अब वह‍ संत बन गया

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भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 30 मई से शुरू होने वाले आईसीसी क्रिकेट वर्ल्‍ड कप 2019 में महेंद्र सिंह धोनी अहम खिलाड़ी साबित होंगे. धोनी का यह चौथा वर्ल्‍ड कप होगा और वेस्‍ट इंडीज के क्रिस गेल के बाद वे प्रतियोगिता में दूसरे सबसे अनुभवी क्रिकेटर होंगे. वे दो बार(2007 टी20 वर्ल्‍ड कप और 2011 वनडे वर्ल्‍ड कप) भारत को वर्ल्‍ड चैंपियन बना चुके हैं.

क्रिकेट की दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंट से पहले धोनी के करीबी दोस्‍त सत्‍य प्रकाश ने उनके बारे में कई दिलचस्‍प खुलासे किए हैं. बता दें कि सत्‍य प्रकाश ने ही धोनी को भारतीय रेलवे में नौकरी दिलाने में मदद की थी. दोनों बिहार के लिए साथ क्रिकेट भी खेला करते थे.

उन्‍होंने खेल मैगजीन ‘स्‍पोर्टस्‍टार’ को बताया कि वे सभी दोस्‍त धोनी को आतंकवादी बुलाते थे. सत्‍य प्रकाश ने मैगजीन को बताया, ‘हम उसे आतंकवादी बुलाया करते थे. वह 20 गेंदों में 40-50 रन बना दिया करता था. लेकिन जब से वह देश के लिए खेलने लग गया है तब से संत बन गया है और उसने अपनी अप्रोच बदल ली है. वह काफी जल्‍दी सीखता है.’

 

सत्‍य प्रकाश 18 साल से धोनी के दोस्‍त हैं. उन्‍होंने ही धोनी को भारतीय रेलवे में नौकरी दिलाने में मदद की थी. दोनों बिहार के लिए साथ क्रिकेट भी खेला करते थे.

वर्ल्‍ड कप के पहले सामने आए एमएस धोनी के भाई, किए कई बड़े खुलासे

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धोनी के संघर्ष के बारे में उन्‍होंने बताया, ‘धोनी कहता है कि फाइव स्‍टार होटल में रूकने से न तो भूख मिटती है और न अच्‍छी नींद आती है. बाकी खिलाड़ियों और धोनी यह अंतर है कि वह भावनाएं नहीं रखता. 2003 में जब हम फुटबॉल खेल रहे थे तो उसकी मां ने फोन किया. उसने कहा कि फोन बजने दो, गेम पर ध्‍यान दो. बाद में हमें पता चला कि वह मैच में काफी गंभीर था और अपनी लय तोड़ना नहीं चाहता था.’

शुरुआत में उसने न के बराबर कप्‍तानी की लेकिन देखो कैसे वह महान खिलाड़ियों का कप्‍तान बन गया. वह हमेशा हिंदी में बात करता था लेकिन अब वह फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है. हम दोस्‍त कभी उसकी काबिलियत पहचान ही नहीं पाए. — सत्‍य प्रकाश

एमएस धोनी शुरू से ही आत्‍मविश्‍वास से लबरेज रहे. उनकी इस खूबी के बारे में सत्‍य प्रकाश ने स्‍पोर्टस्‍टार को बताया, ‘एक मैच के दौरान किसी ने उसे छेड़ा और कहा कि आज तेरा दिन है और तू जितने चाहे रन बना सकता है लेकिन कल तू हमारे साथ ही खेलेगा. इस पर धोनी ने जवाब दिया कि तुम चाहे जितने रन बना लो हम 15 ओवर में जीत जाएंगे. बाद में उसकी टीम 14.4 ओवर में मैच जीत गई.’

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एमएस धोनी और सत्‍य प्रकाश 18 साल से दोस्‍त हैं.

एमएस धोनी की कप्‍तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने कई खिताब जीते हैं और बड़ी कामयाबी पाई. वे इकलौते कप्‍तान हैं जिन्‍होंने आईसीसी के तीनों टूर्नामेंट जीते हैं. धोनी ने 2007 में टी20 वर्ल्‍ड कप, 2011 में वनडे वर्ल्‍ड कप और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जीतने का कारनामा किया है.

Input : News18

SPORTS

संन्यास के बाद अपनी नई पारी के लिए फिर बीसीसीआई के पास पहुंचे युवराज

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह ने नई पारी की शुरुआत के लिए बीसीसीआई का रुख किया है. युवराज ने अब आधिकारिक तौर पर बीसीसीआई से विदेशी टी20 लीगों में खेलने की अनुमति मांगी है. पिछले हफ्ते संन्यास लेने वाले युवराज सिंह ने कहा था कि वह विदेशी लीगों में खेलने के इच्छुक हैं.

बीसीसीआई के एक सूत्र ने पीटीआई को मंगलवार को बताया , ‘उन्होंने बोर्ड को पत्र लिखा है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल से संन्यास के बाद मुझे नहीं लगता कि बोर्ड को उन्हें अनुमति देने में कोई परेशानी होगी.’

पिछले सप्ताह संन्यास की घोषणा के वक्त युवराज ने कहा था कि वह विदेशी टी20 लीग में खेलना चाहते हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं टी20 क्रिकेट में खेलना चाहता हूं. इस उम्र में मैं मनोरंजन के लिए कुछ क्रिकेट खेल सकता हूं. मैं अब अपनी जिंदगी का लुत्फ उठाना चाहता हूं. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल के बारे में सोचना काफी तनावपूर्ण होता है.’

सक्रिय खिलाड़ी नहीं बन सकते विदेशी लीगों का हिस्सा

बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक सक्रिय भारतीय क्रिकेटर्स विदेशी टी-20 लीग में हिस्सा नहीं ले सकते हैं. इससे पहले संन्यास लेने के बाद वीरेंद्र सहवाग और जहीर खान जैसे क्रिकेटर यूएई में हुई टी-10 लीग में खेल चुके हैं. पिछले महीने इरफान पठान कैरिबियन क्रिकेट लीग में हिस्सा लेने वाले पहले खिलाड़ी बने थे जिनका नाम ड्रॉफ्ट में शामिल था. वह सक्रिय फर्स्ट क्लास खिलाड़ी थे और बीसीसीआई से उन्होंने अनुमति नहीं ली थी. इससे पहले बीसीसीआई ने उनके भाई युसुफ पठान को हॉन्गकॉन्ग टी20 लीग में खेलने की अनुमति नहीं दी थी.

Input:News 18

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INDIA

मैच से पहले एड वॉर: यहां भारत बना ‘बाप’, PAK में अभिनंदन का मजाक

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ये विज्ञापन ठीक उसी तर्ज पर बनाया गया है जैसा पिछले वर्ल्डकप में मौका-मौका था. वो विज्ञापन काफी हिट हुआ और लोगों ने खुलकर शेयर किया. शायद इसी ‘मौके’ को एक बार फिर से भुनाने की कोशिश की गई है.

टीम इंडिया वर्ल्डकप जीतने के मिशन पर इंग्लैंड में है. शुरुआती दो मैच में शानदार जीत भी हुई है लेकिन इंतजार 16 जून का है. जब भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला होना है. मैच से पहले स्टार स्पोर्ट्स ने एक विज्ञापन बनाया है, जिसमें सीधे तौर पर ना सही लेकिन घुमा-फिराकर भारत को पाकिस्तान टीम का ‘बाप’ बताया गया. ऐड में पिता-पुत्र का जिक्र इसलिए है क्योंकि 16 जून को फादर्स डे है. भले ही इस विज्ञापन को हिट्स मिल रहे हों लेकिन सोशल मीडिया पर एक तीखी बहस छिड़ी है. ना सिर्फ बहस छिड़ी है, बल्कि दोनों देशों की तरफ से विज्ञापन एक-दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल हो रहे हैं.

दरअसल, ये विज्ञापन ठीक उसी तर्ज पर बनाया गया है जैसा पिछले वर्ल्डकप में मौका-मौका था. वो विज्ञापन काफी हिट हुआ और लोगों ने खुलकर शेयर किया. शायद इसी ‘मौके’ को एक बार फिर से भुनाने की कोशिश की गई है. नए विज्ञापन में भी वही एक्टर है जिसने पाकिस्तानी फैन की भूमिका निभाई थी, बस इस बार बांग्लादेश और भारत वाले किरदार बदले हैं.

पहले आपको बताते हैं कि नए विज्ञापन में क्या है. होता यूं है कि बांग्लादेश (किरदार) पाकिस्तान (किरदार) के पास आता है और फिर कहता है कि भाईजान! मौका-मौका सातवीं बार. फिर पाकिस्तान जवाब देता है कि अब्बू ने कहा है कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती और सामने बैठा हिंदुस्तान कह रहा है कि मैंने तुम्हें कब सिखाया? यहां देखें विज्ञापन…

बस विवाद इसी पर छिड़ा है, सोशल मीडिया यूजर्स लिख रहे हैं कि आखिर हम किसी देश को अपना बेटा कैसे कह सकते हैं. जब देश इतना आगे बढ़ गया है, हर चीज में हम नंबर वन बन रहे हैं तो फिर भी इतनी छोटी सोच क्यों है कि तू मेरा बेटा और मैं तेरा बाप!

लेकिन सोशल मीडिया पर एक तबका और है जो इस विज्ञापन का दीवाना हो रहा है. लोगों को ये वीडियो मौका-मौका ही लग रहा है और उन्हें अपना दीवाना बना रहा है. क्रिकेट फैंस को लग रहा है कि हर वर्ल्डकप की तरह इस बार भी भारत पाकिस्तान को हराएगा और क्रिकेट का बाप साबित होगा.

जब स्टार स्पोर्ट्स के इस विज्ञापन पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी थी, तब पाकिस्तान ने भी एक विज्ञापन जारी किया. इसमें भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन का मज़ाक उड़ाया गया है. इस विज्ञापन पर भारतीय नाराज़ हो गए हैं.

हालांकि, जवाब में पाकिस्तानी खिलाड़ी भी तर्क दे रहे हैं कि जब अपने विज्ञापन में इंडिया उन्हें बेटा बता रहा है तो फिर पाकिस्तानी एड में अभिनंदन का मज़ाक उड़ना मुद्दा क्यों बन रहा है.

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान का क्रिकेट मैच कोई आम मैच नहीं होता है. दोनों देशों के समर्थक इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं और जब बात वर्ल्डकप की हो तो फिर जोश चरम पर होता है. इस बार मैच इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों देशों के बीच बातचीत रुकी हुई है, बीते दिनों तो युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी. पुलवामा में हमला हुआ, बालाकोट में एयरस्ट्राइक हुई. ऐसे में क्रिकेट फैंस की भावनाएं वर्ल्डकप के इसी मैच के लिए खूब हिलोरें मार रही है.अब सबको बेसब्री से 16 जून का इंतजार है.

Input : Ajj Tak

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SPORTS

युवराज सिंह: बल्ले की ‘दहाड़’ से संन्यास के ‘आंसुओं’ तक

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2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप में जीत के हीरो रहे युवराज सिंह ने मुंबई के साउथ होटल में एक प्रेस कॉन्फ्रेस में अपने संन्यास का ऐलान किया.

युवराज सिंह

युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की है.

2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप में जीत के हीरो रहे युवराज सिंह ने मुंबई के साउथ होटल में एक प्रेस कॉन्फ्रेस में अपने संन्यास का ऐलान किया.

युवराज सिंह

37 वर्षीय युवराज सिंह ने भारत के लिए अपना आखिरी वनडे मैच 30 जून 2017 को वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ खेला था.

युवी ने अपना आखिरी टी-20 मैच 1 फ़रवरी 2017 को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेला. जबकि आखिरी टेस्ट मैच दिसंबर 2012 में इंग्लैंड के ही ख़िलाफ़ खेला था.

बीते दो सालों में युवराज सिंह ने भारत के लिए किसी भी फॉर्मेट में क्रिकेट नहीं खेला है.

 

युवराज सिंह

यादगार पारियां

अपने संन्यास की घोषणा करते हुए युवराज ने क्रिकेट के मैदान से जुड़ी अपनी यादों को ताज़ा किया.

क्रिकेट के मैदान में सबसे अनमोल तीन मैचों के बारे में युवराज में बताया.

युवराज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी तीन सबसे बेहतरीन पारियों में, 2011 में विश्व कप जीतना, 2007 टी20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एक ओवर में लगाए गये छह छक्के और 2004 में लाहौर में बनाया अपना पहला टेस्ट शतक को बताया.

‘कैंसर होना आसमान से ज़मीन पर गिरने जैसा’

संन्यास का ऐलान करते हुए भावुक युवराज ने कहा, “मैं बचपन से ही अपने पिता के नक्शेकदम पर चला और देश के लिए खेलने के उनके सपने का पीछा किया. मेरे फैन्स ने हमेशा मेरा समर्थन किया. मेरे लिए 2011 वर्ल्ड कप जीतना, मैन ऑफ़ द सिरीज़ मिलना सपने की तरह था. इसके बाद मुझे कैंसर हो गया. यह आसमान से ज़मीन पर आने जैसा था. उस वक्त मेरा परिवार, मेरे फैन्स मेरे साथ थे.”

उन्होंने कहा, “एक क्रिकेटर के तौर पर सफ़र शुरू करते वक्त मैंने सोचा नहीं था कि कभी भारत के लिए खेलूंगा. लाहौर में 2004 में मैने पहला शतक लगाया था. टी-20 वर्ल्ड में 6 गेंदों में 6 छक्के लगाना भी यादगार था.”

युवराज सिंह

सबसे ख़राब प्रदर्शन

इस दौरान युवराज ने 2014 के टी20 वर्ल्ड कप फ़ाइनल में श्रीलंका के ख़िलाफ़ 21 गेंद में 11 रन बनाने को अपना सबसे ख़राब प्रदर्शन बताया.

उन्होंने कहा, “2014 में टी-20 फ़ाइनल मेरे जीवन का सबसे ख़राब मैच था. तब मैंने सोच लिया था कि मेरा क्रिकेट करियर ख़त्म हो गया है. तब मैं थोड़ा रुका और सोचा कि क्रिकेट खेलना शुरू क्यों किया था. फिर मैं वापस घरेलू क्रिकेट में गया और बहुत मेहनत की. फिर मैंने तीन साल बाद वनडे क्रिकेट में वापसी की क्योंकि मैंने कभी खुद में विश्वास करना नहीं छोड़ा.”

2017 में युवराज सिंह ने क्रिकेट के मैदान में तीन साल के बाद वापसी की और अपने करियर की सबसे बड़ी पारी (150 रन) खेली.

युवराज ने कहा, “डेढ़ साल बाद मैंने टी-20 में वापसी की. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ आखिरी ओवर में छक्का लगाया. 3 साल बाद मैंने वनडे में वापसी की. 2017 में कटक में मैंने 150 रन बनाए, जो मेरे करियर का सबसे बड़ा वनडे स्कोर है.”

इस दौरान युवराज ने अपने माता-पिता और पत्नी के साथ-साथ क्रिकेट के मैदान से जुड़े कई लोगों को धन्यवाद दिया.

उन्होंने कहा, “मैंने सौरव गांगुली की कप्तानी में खेलना शुरू किया. फिर मैंने राहुल द्रविड़, जवगल श्रीनाथ जैसे क्रिकेटर्स के साथ खेला. आशीष नेहरा, भज्जी जैसे दोस्त मिले.”

उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा खुद पर भरोसा रखा. यह मायने नहीं रखता कि दुनिया क्या कहती है. मैंने सौरव की कप्तानी में करियर शुरू किया था. सचिन, राहुल, अनिल, श्रीनाथ जैसे लीजेंड के साथ खेला. जहीर, वीरू, गौतम, भज्जी जैसे मैच विनर्स के साथ खेला.”

“महेंद्र सिंह धोनी जैसे कप्तान और गैरी कर्स्टन जैसे सबसे नायाब कोच के साथ मुझे खेलने का मौका मिला.”

युवराज सिंह

संन्यास के फ़ैसले पर क्या बोले युवराज

संन्यास के फैसले को लेकर पूछे गए सवाल पर युवराज ने कहा, “सफलता भी नहीं मिल रही थी और मौके भी नहीं मिल रहे थे. 2000 में करियर शुरू हुआ था और 19 साल हो गए थे. उलझन थी कि करियर कैसे ख़त्म करना है. सोचा कि पिछला टी-20 जो जीते हैं, उसके साथ ख़त्म करता तो अच्छा होता, लेकिन सब कुछ सोचा हुआ नहीं होता. जीवन में एक वक्त आता है कि वह तय कर लेता है कि अब जाना है.”

उन्होंने कहा, “मेरे करियर का सबसे बड़ा लम्हा 2011 वर्ल्ड कप जीतना था. जब मैंने पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 84 रन बनाए थे, तब वह करियर का बड़ा मोड़ था. इसके बाद कई मैच में फेल हुआ, लेकिन बार-बार मौके मिले. मैंने कभी 10 हज़ार रन के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन वर्ल्ड कप जीतना ख़ास था. मैन ऑफ़ द सिरीज़ रहना, 10 हज़ार रन बनाना, इससे ज़्यादा ख़ास वर्ल्ड कप जीतना था. यह केवल मेरा नहीं, बल्कि पूरी टीम का सपना था.”

 

युवराज सिंह के छह छक्केइमेज कॉपीरइटPTI

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रिकॉर्ड

वनडे क्रिकेट में युवराज सिंह ने 304 मैचों में 36.56 की औसत से 14 शतक और 52 अर्धशतकों समेत 8701 रन बनाए और 111 विकेट चटकाये.

टी20 क्रिकेट में युवराज ने भारत के लिए 58 मैचों में आठ अर्धशतकों समेत 1177 रन बनाए. इस फॉर्मेट में युवी 136.38 की स्ट्राइक रेट से खेले.

युवराज को अपने करियर में केवल 40 टेस्ट खेलने का मौका मिला और इस दौरान उन्होंने 33.93 की औसत से 1900 रन बनाये.

Input : BBC Hindi

 

 

 

 

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