विश्व प्रसिद्ध कोलकाता के काली मंदिर की खास बातें, जानिए कैसा है मंदिर का स्वरूप

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अभी माघ मास की गुप्त नवरात्रि चल रही है। देवी पूजा का ये पर्व 14 फरवरी तक चलेगा। इन दिनों में देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में देवी मां के दर्शन करने और पूजा करने से भक्त की सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं। मां काली के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है कोलकाता का मां दक्षिणेश्वर काली मंदिर। जानिए काली मंदिर से जुड़ी खास बातें…

1. इस मंदिर का निर्माण 1847 में शुरू हुआ था। यहां मान्यता प्रचलित है कि यहां की महारानी रासमणि ने स्वप्न देखा था। स्वप्न में मां काली ने उन्हें निर्देश दिया कि मंदिर का निर्माण किया जाए। उसके बाद इस भव्य मंदिर में मांं की मूर्ति श्रद्धापूर्वक स्थापित की गई। सन् 1855 में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ। यह मंदिर 25 एकड़ क्षेत्र में स्थित है।

2. भीतरी भाग में चांदी से बनाए गए कमल के फूल हैं। मंदिर का विशेष आकर्षण यह है कि इस मंदिर के पास ही पवित्र गंगा नदी भी है। बंगाल में इसे हुगली नदी के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में कई गुंबद हैं। मंदिर के चारों ओर भगवान शिव के बारह मंदिर हैं।

3. विश्व प्रसिद्ध रामकृष्ण परमहंस ने मां काली के मंदिर में देवी की आध्यात्मिक दृष्टि प्राप्त की थी। उन्होंने इसी जगह पर धर्म-एकता के लिए प्रवचन दिए थे। रामकृष्ण परमहंस इस मंदिर के पुजारी थे। वे मंदिर में ही रहते थे।

4. मां काली का ये मंदिर विशाल इमारत के रूप में ऊंचे स्थान पर स्थित है। इसमें सीढि़यों के माध्यम से प्रवेश कर सकते हैं।

5. दक्षिण की ओर स्थित यह मंदिर तीन मंजिला है। ऊपर की दो मंजिलों पर कई गुंबद समान रूप से फैले हुए हैं। गुंबदों की छत पर सुंदर आकृतियां बनाई गई हैं। मंदिर के भीतरी स्थल पर मां काली, भगवान शिव की प्रतिमा है।

कैसे पहुंच सकते हैं कोलकाता

वायु मार्ग- कोलकाता वायु मार्ग द्वारा मुंबई, दिल्ली, चेन्नई सहित सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग- कोलकाता में मुख्य तौर पर दो स्टेशन हैं- शियालदाह और हावड़ा। कोलकाता रेल मार्ग के माध्यम से भी सभी प्रमुख बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग- देश के हर प्रमुख शहर से सड़क मार्ग द्वारा कोलकाता पहुंचा जा सकता है।

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