राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने शहीद सैनिकों के आश्रितों को सरकारी जमीन बंदोबस्ती के संबंध में एक नई, स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। विभाग स्तर पर गठित समिति के विचार-विमर्श के बाद यह निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत युद्ध में वीरगति प्राप्त सैनिकों के आश्रितों को उनके गृह जिला के गृह प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में कृषि अथवा आवासीय उपयोग के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।

नई व्यवस्था के अनुसार, शहीद सैनिकों के आश्रितों को कृषि कार्य के लिए एक एकड़ या आवासीय उपयोग के लिए पांच डिसमिल सरकारी जमीन का बंदोबस्त किया जाएगा। यह भूमि पूरी तरह विवादमुक्त और ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होगी।

उपमुख्यमंत्री का बयान

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार शहीद सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा,

“नई बंदोबस्ती प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले जवानों के आश्रितों को उनके गृह जिले में सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए भूमि उपलब्ध हो। हमने स्पष्ट, पारदर्शी और व्यवहारिक मानक तय किए हैं, ताकि पात्र परिवारों को बिना अनावश्यक विलंब के तत्काल लाभ मिल सके। यह निर्णय हमारे सैनिकों के प्रति कृतज्ञता और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है।”

पांच साल तक नहीं लगेगा लगान

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यह सुविधा उन सैनिकों के आश्रितों को मिलेगी, जिन्होंने कम से कम छह माह तक लगातार सैनिक सेवा की हो और कार्यरत रहते हुए युद्ध में शहादत पाई हो। ऐसे मामलों में आश्रितों से केवल सलामी ली जाएगी, जबकि पांच वर्षों तक वार्षिक लगान नहीं लिया जाएगा।

पैरामिलिट्री बलों के आश्रित भी होंगे पात्र

निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह सुविधा केवल सेना तक सीमित नहीं रहेगी। युद्धकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अन्य बलों के जवानों के आश्रित भी इसके पात्र होंगे। इनमें शामिल हैं—
• बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF)
• बिहार मिलिट्री पुलिस
• टेरिटोरियल आर्मी
• सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF)
• बॉर्डर स्काउट्स
• बीआरएफ
• लोक सहायक सेवा
• एनसीसी
• होमगार्ड
• असम राइफल्स

हालांकि, इसके लिए सेलर्स, सोल्जर्स एवं एयरमेन बोर्ड की अनुशंसा तथा न्यूनतम छह माह की संतोषजनक सेवा का प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा।

बिहार का निवासी होना जरूरी

विभाग ने यह शर्त भी तय की है कि भूमि बंदोबस्ती से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शहीद का आश्रित बिहार राज्य का निवासी हो और उसके पास आवासीय उपयोग के लिए पहले से कोई निजी जमीन उपलब्ध न हो। यदि निजी आवासीय जमीन पाई जाती है, तो बंदोबस्ती नहीं की जाएगी।

डीएम को मिलेगा अधिकार

नई व्यवस्था के तहत जिला पदाधिकारी (डीएम) को पूर्व की तरह ही भूमि बंदोबस्ती का अधिकार रहेगा। हालांकि, यह केवल ग्रामीण क्षेत्र की सरकारी और विवादमुक्त जमीन पर ही लागू होगा। चयनित भूमि—
• भूदान
• भू-हदबंदी
• सैरात
• कब्रिस्तान
• श्मशान
• धार्मिक स्थल
• अतिक्रमण
• न्यायालयीन विवाद

से पूरी तरह मुक्त होनी चाहिए।

पुराने आदेश निरस्त

विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश की तिथि से पूर्व सैनिकों के साथ भूमि बंदोबस्ती से संबंधित सभी पुराने आदेश और पत्र स्वतः प्रभावहीन माने जाएंगे। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

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