NRC पर NDA में मतभेद फिर उजागर, JDU के प्रशांत किशोर के बाद केसी त्‍यागी ने भी कही ये बात
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NRC पर NDA में मतभेद फिर उजागर, JDU के प्रशांत किशोर के बाद केसी त्‍यागी ने भी कही ये बात

Santosh Chaudhary

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 नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) को लेकर राष्‍ट्रीय जनतंत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दलों में फिर मतभेद दिख रहा है। एनआरसी की कड़ी आलोचना करते हुए जनता दल यूनाइटेड (JDU) उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) के ट्वीट के बाद इसपर सियासी चर्चा फिर आरंभ हो गई है। जेडीयू के राष्‍ट्रीय महासचिव केसी त्‍यागी (KC Tyagi) ने भी कहा कि सभी दल यह मान रहे कि एनआरसी संपूर्ण नहीं है।

असम में एनआरसी की अंतिम सूची से करीब 19 लाख लोगों के बाहर हो जाने को लेकर सियासत गर्म है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जेडीयू के रिश्ते पर भी बात शुरू है। चर्चा का एक कोण यह भी है कि जेडीयू के उपाध्‍यक्ष प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए काम कर रहे हैं। एनआरसी का पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) विरोध कर रहीं हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि एनआरसी की सूची से बाहर रखे जाने वालों में पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद (Fakhruddin Ali Ahmed) के परिजन भी हैं। सरकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि असली भारतीयों को इससे बाहर नहीं किया जाए।

प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर किया विरोध

प्रशांत किशोर ने अपने ट्वीट के आरंभ में ही यह कहा है कि एनआरसी ने अपने ही देश के लाखों लोगों को विदेशी मूल का बना दिया। प्रशांत किशोर ने अपने ट्वीट में यह कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस जटिल मुद्दे के समाधान को ठीक से समझा नहीं गया। नीतिगत  चुनौतियों का ध्यान नहीं रखा गया।

केसी त्‍यागी बोले: एनआरसी संपूर्ण नहीं

इसपर जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी का कहना है कि विदेश मंत्रालय ने तो यह स्पष्ट किया है कि एनआरसी में नाम नहीं रहने की वजह से किसी को देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा। सभी दल यह मान रहे कि एनआरसी संपूर्ण नहीं है। असम में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने भी एनआरसी पर आपत्ति की है।

यागी का कहना है कि असम गण परिषद ने इस मसले को उठाया तो जेडीयू ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि इनकी बात सुनी जानी चाहिए। कांग्रेस व वामदलों ने भी एनआरसी के मसले पर वही राय दी है जो हमलोग कह रहे। यह सच है कि बहुत सारे लोगों के नाम एनआरसी मेंं दर्ज नहीं हो पाए हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) भी इस मसले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

Input : Dainik Jagran

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वशिष्ठ नारायण सिंह के पार्थिव शरीर को एम्बुलेंस नहीं मिला, मुख्यमंत्री आने को हुए तो अधिकारियों ने रेड कारपेट बिछा दी

Ravi Pratap

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महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन के बाद पहले सिस्टम का शर्मनाक चेहरा उजागर हुआ और अब पटना जिला प्रशासन की तरफ से वीवीआइपी के लिए रेड कारपेट बिछाया गया। जी हां, वशिष्ठ नारायण सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहुंचे थे। जहां वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर कुल्हड़िया कांप्लेक्स के पास रखा गया।

शर्मनाक : ये हैं PMCH कैंपस में महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर है, जिनके परिजनों को एम्बुलेंस तक मुहैया…

Posted by Muzaffarpur Now on Wednesday, November 13, 2019

मुख्यमंत्री के आने की सूचना के साथ पटना जिला प्रशासन एक्शन में दिखा। मुख्यमंत्री के आने के पहले आनन-फानन में कुल्हड़िया काम्प्लेक्स परिसर में रेड कारपेट बिछाया गया। उसके बाद पहुंचे मुख्यमंत्री ने महान गणितज्ञ को श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

वशिष्ठ नारायण सिंह को श्रद्धांजलि देने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि महान गणितज्ञ के सम्मान में बिहार सरकार कुछ बड़ा फैसला लेगी। वशिष्ठ नारायण सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

आपको बता दें कि देश-दुनिया में गणित के फॉर्मूले का लोहा मनवाने वाले महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का आज निधन हो गया है। वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन की खबर मिलते ही देश भर में शोक की लहर छा गई है। देशभर के तमाम दिग्गजों ने उनके निधन पर शोक जताया है।

Input : First Bihar Jh

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MUZAFFARPUR

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड की सुनवाई टली, वकीलों के स्ट्राइक के कारण महापापियों को आज नहीं मिली सजा

Santosh Chaudhary

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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में दिल्ली का साकेत कोर्ट आज फैसला सुनाने वाला था। लेकिन, अब कोर्ट ने फिलहाल यह फैसला टाल दिया है, अब कोर्ट ने इसकी अगली तारीख 12 दिसंबर रखी गई है। साकेत कोर्ट ने पहले बताया था कि बाल दिवस के अवसर पर पी’ड़ित बच्चियों को इंसाफ मिलेगा, लेकिन साकेत कोर्ट के वकीलों के प्रदर्शन के कारण 14 नवंबर को आने वाला फैसला दो दिनों के लिए टल गया है।

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में दिल्ली की साकेत अदालत ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाने की संभावना जताई थी। इसे गुरुवार के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच हाल ही में हुई झड़पों के बाद यहां सभी छह जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल अभी तक समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में फैसले की तिथि टल गई है।

अदालत ने 30 सितंबर को सीबीआई के वकील और 11 आरोपियों के मामले में अंतिम बहस के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था। बालिका गृह में कई लड़कियों के साथ यौन और शारीरिक हमले का आरोप है। इस मामले में ब्रजेश ठाकुर मुख्य आरोपी है। फैसले पर हाेने वाली सुनवाई के लिए शहर के कई अधिवक्ता और ब्रजेश ठाकुर समेत अन्य आराेपियाें के परिजन दिल्ली पहुंच चुके हैं।

यह मामला 7 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मुजफ्फरपुर की स्थानीय अदालत से दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर में पॉक्सो कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था। इसमें बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री और तत्कालीन जदयू नेता मंजू वर्मा को भी आरोपों का सामना करना पड़ा था। इसमें आरोप था कि ब्रजेश ठाकुर का मंत्री के पति पति के साथ नजदीकी थी।

सीबीआई ने विशेष अदालत को बताया था कि मामले के सभी 21 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। मामले की सुनवाई में काेर्ट में पीड़ित किशाेरियाें का बयान दर्ज कराया जा चुका है। कई किशाेरियां आराेपियाें काे देखकर चिह्नित भी कर चुकी हैं।

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BIHAR

वशिष्ठ नारायण सिंह को CM नीतीश ने दी श्रद्धांजलि, लेकिन PMCH नहीं दे सका एंबुलेंस

Ravi Pratap

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महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद पटना में निधनहो गया. वशिष्ठ नारायण सिंह की मौत के बाद पटना के पीएमसीएच (PMCH) प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है.

शर्मनाक : ये हैं PMCH कैंपस में महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर है, जिनके परिजनों को एम्बुलेंस तक मुहैया…

Posted by Muzaffarpur Now on Wednesday, November 13, 2019

वशिष्ठ बाबू के निधन के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा उनके परिजनों को शव ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मुहैया कराया गया. इस महान विभूति के निधन के बाद उनके छोटे भाई ब्लड बैंक के बाहर शव के साथ खड़े रहे.

निधन के बाद पीएमसीएच प्रशासन द्वारा केवल डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाणपत्र) देकर पल्ला झाड़ लिया गया. इस दौरान जब वशिष्ठ नारायण सिंह के छोटे भाई से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम अपने पैसे से अपने भाई का शव गांव ले जाएंगे. उन्होंने कहा कि मेरे भाई के निधन की खबर के बाद से न तो कोई अधिकारी आया है और न ही कोई राजनेता. वशिष्ठ नारायण सिंह के छोटे भाई ने कैमरे के सामने रोते हुए कहा कि अंधे के सामने रोना, अपने दिल का खोना. उन्होंने कहा कि मेरे भाई के साथ लगातार अनदेखी हुई है. जब एक मंत्री के कुत्ते का पीएमसीएच में इलाज हो सकता है तो फिर मेरे भाई का क्यों नहीं.

 

बता दें कि 74 वर्षीय महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने अपनी जिंदगी के 44 साल मानसिक बीमारी सिजेफ्रेनिया में गुजारा. आज भी कहा जाता है कि इस बीमारी के शुरुआती वर्षों में अगर उनकी सरकारी उपेक्षा नहीं हुई होती तो आज वशिष्ठ नारायण सिंह का नाम दुनिया के महानतम गणितज्ञों में सबसे ऊपर होता. उनके बारे में मशहूर किस्सा है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा में अपोलो की लॉन्चिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए तो कंप्यूटर ठीक होने पर उनका और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक था.

कई संस्थानों में दी थी सेवा

वर्ष 1969 में वशिष्ठ नारायण सिंह ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए. नासा में भी उन्होंने काम किया. भारत लौटने के बाद उन्होंने आईआईटी कानपुर, आईआईटी बॉम्बे और आईएसआई कोलकाता में अपनी सेवा दी.

Input : News

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