MUZAFFARPUR : जिले में शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने शुक्रवार को तीन अधिकारियों-कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। लापरवाही, भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों को गंभीरता से लेते हुए एक लिपिक के निलंबन की अनुशंसा, एक कार्यपालक पदाधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की मांग और जिला नियोजन पदाधिकारी का वेतन स्थगित कर प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि अब गड़बड़ियों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ लागू होगा।

अवैध वसूली और अभिलेख छुपाने का आरोप — लिपिक पर निलंबन की अनुशंसा
बागमती प्रमंडल, रुन्नीसैदपुर के निम्न वर्गीय लिपिक जितेंद्र प्रसाद कुशवाहा गंभीर लापरवाही, आदेश अवहेलना और भू-स्वामियों से अवैध राशि वसूली के आरोपों में घिर गए हैं। भूमि मुआवजा भुगतान के दौरान पैसे मांगने की शिकायतें प्रमाणित होने के बाद जिलाधिकारी ने प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग को उनके निलंबन और विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा भेजी है।

सीतामढ़ी स्थानांतरण के बाद भी उन्होंने पुनर्वास संबंधी महत्वपूर्ण अभिलेख उच्च अधिकारियों को सुपुर्द नहीं किए, जबकि कई बार स्मरण-पत्र भेजे गए। यही कारण रहा कि अधीक्षण अभियंता ने भी उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी।
स्ट्रीट लाइट, हाई मास्ट, रिफ्यूज कंपैक्टर—खरीद में भारी गड़बड़ी, ईओ दोषी
नगर परिषद साहेबगंज के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी रंधीर लाल पर जेम पोर्टल के माध्यम से उपकरणों की खरीद में वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के गबन का आरोप साबित हुआ है।

जिलाधिकारी ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों की समिति गठित की, जिसने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रंधीर लाल को दोषी पाया। इसके बाद डीएम ने नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव को कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है।
बार-बार अनुपस्थित, कार्यालय संचालन ठप — जिला नियोजन पदाधिकारी का वेतन रोका
जिला नियोजन पदाधिकारी श्वेता वशिष्ठ पर भी प्रशासन का शिकंजा कस गया है। 2 दिसंबर को कार्यालय निरीक्षण के दौरान उनकी अनुपस्थिति सामने आई, जबकि 21 नवंबर के एक महत्वपूर्ण मामले में भी वे उपस्थित नहीं थीं।

लगातार लापरवाही को देखते हुए जिलाधिकारी ने उनका वेतन अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है और पूछा है कि क्यों न उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की जाए।
जिलाधिकारी का दो-टूक संदेश: “लापरवाही बर्दाश्त नहीं”
कार्यवाही के बाद जिलाधिकारी ने कहा—
“हर अधिकारी-कर्मी निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य करें। अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार और स्वेच्छाचारिता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।”
जिलास्तर पर एक साथ तीन कड़े निर्णयों ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासन अब भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और लापरवाही को लेकर पूरी तरह सख्त है। आने वाले दिनों में ऐसे मामलों पर और भी तेज कार्रवाई देखी जा सकती है।









