जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी की अनुशंसा पर स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बंदरा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पंकज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

बताया गया है कि 4 जून को प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में हुई भीषण अग्निकांड की घटना के दौरान डॉ. पंकज कुमार ड्यूटी पर तैनात थे। आरोप है कि आग लगने के समय उन्होंने मरीजों को छोड़कर अस्पताल परिसर से चले गए। इसके अलावा सरकारी सेवा में रहते हुए निजी अस्पताल में सेवाएं देने तथा पीएचसी बंदरा से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के आरोप भी उनके खिलाफ लगाए गए हैं।

प्रशासन के अनुसार प्रसाद हॉस्पिटल में हुई घटना अत्यंत संवेदनशील थी और उस समय ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। ऐसे हालात में ड्यूटी छोड़ना गंभीर प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी लापरवाही की श्रेणी में माना गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने कर्तव्य के प्रति लापरवाही और मरीजों के प्रति संवेदनहीनता को गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(क) के तहत डॉ. पंकज कुमार को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना द्वारा निर्धारित किया जाएगा। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार केवल जीवन-निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की विस्तृत विभागीय जांच भी कराई जाएगी।

निजी अस्पतालों पर लगातार चल रहा जांच अभियान

प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों की जांच को लेकर लगातार कार्रवाई कर रहा है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित विशेष टीम द्वारा निजी अस्पतालों, नर्सिंग होमों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की जांच की जा रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार अब तक 25 स्वास्थ्य संस्थानों को सरकारी प्रोटोकॉल और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के मामले में सील किया जा चुका है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

इस संबंध में जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरीजों के जीवन की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और आपातकालीन परिस्थितियों में तैनात चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से पूर्ण जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

एईएस और आपदा प्रबंधन को लेकर सतर्क रहने का निर्देश

जिलाधिकारी ने जिले में एईएस (चमकी बुखार) तथा संभावित आपदाओं के खतरे को देखते हुए सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्यकर्मी अपनी ड्यूटी के प्रति पूर्णतः सजग एवं उत्तरदायी रहें तथा किसी भी आपदा या आपातकालीन स्थिति में निर्धारित प्रोटोकॉल का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें।

जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में आगे भी निगरानी और कार्रवाई का अभियान जारी रहेगा।

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