मुजफ्फरपुर जिले में ड्राइविंग लाइसेंस ट्रायल को तकनीक आधारित और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा तुर्की स्थित भूमि को परिवहन विभाग को उपलब्ध करा दिए जाने के बाद अब वहां ऑटोमेटिक टेस्टिंग ट्रैक निर्माण की तैयारी तेज हो गई है।

जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) कुमार सत्येंद्र यादव ने इस परियोजना के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजते हुए निर्माण मद में राशि स्वीकृत करने का अनुरोध किया है। जानकारी के अनुसार, डीपीआर तैयार होने के बाद परिवहन विभाग द्वारा फंड जारी किया जाएगा।

तुर्की गांव जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है, और यहां कुल तीन एकड़ से अधिक भूमि टेस्टिंग ट्रैक के लिए चिन्हित की गई है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को डिजिटल मोड में लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत प्रत्येक जिले में कम-से-कम एक ऑटोमेटिक टेस्टिंग ट्रैक का संचालन अनिवार्य किया गया है।

हाजीपुर में यह व्यवस्था पहले ही शुरू हो चुकी है, जबकि दरभंगा में जल्द शुरू होने की संभावना है। अब मुजफ्फरपुर भी इस सूची में शामिल होने की तैयारी में है।

इससे पहले बेला औद्योगिक क्षेत्र में बियाडा की जमीन पर परिवहन विभाग ने एक ऑटोमेटिक ट्रैक का निर्माण कराया था। निर्माण पूर्ण होने के बावजूद ट्रैक शुरू नहीं हो सका, क्योंकि बियाडा ने अपनी भूमि विभाग को हस्तांतरित नहीं की।

इसके बाद लंबे समय तक ट्रायल मैनुअल तरीके से बाहर संचालित किए गए, लेकिन लगभग एक वर्ष से बेला में यह प्रक्रिया बंद है। वर्तमान में पताही एयरपोर्ट परिसर में अस्थायी रूप से लाइसेंस ट्रायल कराया जा रहा है।

Input : Hindustan

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