इबादत का महीना और चाँद का इंतज़ार- गज़ब का नज़ारा होता है ईद की शाम का और उससे भी ज़्यादा गज़ब होती हैं उसकी तैयारियां। आज मोतीझील में एक चप्पल की दुकान में उस बच्ची को देखकर मन आनंदित हो उठा। “अम्मी, अफ़साना के लिये भी एक नहीं सैंडिल ले लें? सोचिये अम्मी, जब वो देखेगी तो कितनी खुश होगी”, कहकर वो बच्ची पास पड़ी एक सैंडिल को घुमा-घुमा कर निहारने लगी। मैंने ऐसे ही पूछ दिया, “ये अपनी छोटी बहन के लिये ले रही क्या बेटा”…”नहीं, वो फ़रज़ाना आंटी की बेटी है। जब आंटी बीमार होती हैं तो उनके साथ काम में मदद करने आजाती है कभी-कभी हमारे घर”, उसने मुझे समझाया। “अब्बू बोले हैं कि खुद भी नयी चीज़ें लो और हो सके तो ज़रूरतमंदों को भी दो, इसीलिये हम अम्मी से उसके लिये भी खरीदवा रहे हैं”, बड़ी मासूमियत से बोली वो।

सच में, आपसी प्रेम और भाईचारा का अनूठा त्यौहार है ईद। ईद की मिठास तो लच्छेदार सेवइयों के साथ और भी ज़्यादा बढ़ जाती है। देखिये न, कम्पनी बाग़ तो पूरी बाग़-बाग़ हो गयी है इन लज़्ज़तदार सेवइयों से। रंग बिरंगे कपडे टंगे हैं ईद के सुअवसर पर, घर के रोजाना वाले कामों से निश्चिन्त होकर रोज़ा और धूप के बावजूद औरतें खूब खरीददारी कर रही हैं।

मुझे तो सेवइयों के साथ-साथ उस मीठी फिरनी का भी इंतज़ार है जो मेरी दोस्त मुझे ईद की शाम खिलाने वाली है। आप भी कमेंट करके हमें बतायें कि ईद की शाम आप क्या-क्या करने वाले हैं। ढेरों मुबारकबाद के साथ आप सभी की ईद मज़ेदार रहे।

 

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