सीड के अनुसार वर्ष 2017 में मुज़फ्फरपुर की एयर क्वालिटी ‘ख़तरनाक’

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सीड के अनुसार वर्ष 2017 में मुज़फ्फरपुर की एयर क्वालिटी ‘ख़तरनाक’ आंकी गई 50% से अधिक दिनों में शहर में हवा की गुणवत्ता ‘ख़राब’ पाई गई।

मुज़फ्फरपुर, 10 जनवरी 2018: सेंटर फॉर एन्वॉयरोंमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) द्वारा हाल में किये गये एक अध्ययन के मुताबिक वर्ष 2017 में मुज़फ्फरपुर में एयर क्वालिटी खतरनाक स्तर पर कायम रही, जिसने जनस्वास्थ्य की समस्या पैदा कर दी है। सीड ने मुज़फ्फरपुर की साल 2017 की वायु की गुणवत्ता को समझने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रियल टाइम मॉनिटरिंग स्टेशनों से प्राप्त ‘एंबियंट एयर क्वालिटी’ के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में मुज़फ्फरपुर में आधे से अधिक दिनों (58%) में हवा की गुणवत्ता सांस लेने योग्य नहीं थी। इनमें से 43% ‘बहुत ख़राब से गंभीर’ की श्रेणी में पाए गए। शेष दिनों में इसे ‘अच्छी/गुड’ (18%) और ‘संतोषजनक’ (24%) की केटेगरी में आँका गया। वर्ष 2017 में 28 फरवरी के दिन पीएम2.5 का संकेंद्रण सर्वाधिक यानी 985 μg/m3 रहा, जो कि राष्ट्रीय मानक से 16 गुना ज़्यादा था।

सीड द्वारा 2016 में इसी प्रकार की एक वायु गुणवत्ता बुलेटिन प्रकाशित की गई थी, जिसका उद्देश्य मुज़फ्फरपुर की हवा की गुणवत्ता को समझना था। दोनों तथ्यों की तुलना के आधार पर यह पता चलता है कि मुज़फ्फरपुर में पीएम2.5 की वार्षिक औसत एकाग्रता 2017 में 114 μg/m³ पाई गई, जबकि पिछले वर्ष यह 119 μg/m³ थी। हालांकि, यह अभी भी राष्ट्रीय मानक से तीन गुना अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार फरवरी वर्ष 2017 का सबसे प्रदूषित महीना था। फरवरी के महीने में पीएम 2.5 की मासिक औसत एकाग्रता 225 µg/m³, जनवरी में 223 µg/m³ तथा दिसंबर के महीने में 217 µg/m³ रही। पीएम 2.5 की 24 घंटे की एकाग्रता का विश्लेषण करने पर यह पता चला कि 341 ‘मॉनीटर्ड’ दिनों में 117 दिन पीएम 2.5 की एकाग्रता सुरक्षित सीमा से 2-6 गुना अधिक दर्ज की गई थी।

रिपोर्ट के निष्कर्षों के बारे में विस्तार से बताते हुए सीड की सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर अंकिता ज्योति ने कहा कि “यातायात संबंधी उत्सर्जन के अतिरिक्त रसोई के लिए ठोस ईंधन जलावन व ईंट भट्ठे से उत्सर्जन के कारण शहर में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो चुकी है। इसके अलावा कूड़े का खुले में जलावन और शहर के बाहर के स्रोतों का हवा को पर्टिकुलेट मैटर से प्रदूषित करने में सबसे ज्यादा योगदान होता है। उन्होंने आगे कहा कि “स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को एक सकारात्मक व प्रभावी ‘क्लीन एयर एक्शन प्लान’ बनाना चाहिए। क्योंकि ऐसे एक्शन प्लान से ही प्रदूषित स्रोतों के अनुरूप विभिन्न कदमों की पहचान, समुचित रेगुलेशन और संस्थागत व्यवस्थाओं को पूरा करना संभव होता है और यही प्रदूषण को कम करने की दिशा में उठाया गया सही कदम साबित होगा। यह भी जरूरी है कि शहर में प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और उनकी प्रोफाइलिंग के लिए सोर्स एपोर्शमेंट स्टडी भी होना चाहिए।”

बिहार को भी सभी स्रोतों से उत्सर्जन में लक्षित आधार पर कमी करने पर काम करना चाहिए और स्वच्छ हवा के लिए सख्त और कड़े कदम उठाने चाहिए। सीड सरकार से अपील करता है कि राज्य में हवा की दशा सुधारने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाये जायें, ताकि आबोहवा स्वच्छ होने के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य भी बेहतर हो सके।

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Source : CEED- Centre for Environment and Energy Development


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