पटना के प्राइवेट स्कूलों की तय होगी फीस, मनमानी पर लगेगी रोक
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पटना के प्राइवेट स्कूलों की तय होगी फीस, मनमानी पर लगेगी रोक

Santosh Chaudhary

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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने की तैयारी चल रही है. पटना प्रमंडल के सभी पटना प्रमंडल के सभी प्राइवेट स्कूलों को अब निंबधन कराना होगा. इस कदम से प्राइवेट स्कूलों की तरफ से मनमानी फीस वृद्धि पर लगाम कसा जायेगा.

प्रमंडल आयुक्त ने दिया निर्देश

प्रमंडल आयुक्त ने इस संबंध में सभी प्राइवेट स्कूलों को नोटिस भेजने का निर्देश दिया है. नोटिस के मुताबिक आरटीई से निंबधन नहीं होने पर अब कार्रवाई की जायेगी. इस संबंध में आयुक्त ने सभी स्कूलों की मीटिंग बुलाई है. प्रमंडल आयुक्त 9 सितंबर को स्कूल प्रबंधन के साथ बैठक करेंगे.

निजी स्कूल वसूलते हैं मनमानी पैसा

गौरतलब है कि निजी स्कूलों की तरफ से समय-समय पर फीस बढ़ोतरी की जाती है. इसका असर अभिभावकों के जेब पर पड़ता है. फीस बढ़ोतरी के अलावे वार्षिक शुल्क, मासिक शुल्क, प्रवेश शुल्क, पुनर्नामांकन शुल्क, विकास शुल्क, अध्ययन शुल्क, पुस्तक, पाठ्य सामग्री शुल्क पर निजी स्कूल मनमानी वसूलते हैं. इससे निपटने के लिए प्रमंडल आयुक्त सभी निजी स्कूलों के प्रबंधन के साथ बैठक करेंगे.

Input : ETV Bihar

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वशिष्ठ नारायण सिंह नासा से गुमनामी तक

Santosh Chaudhary

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बिहार के जाने-माने गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन हो गया है. दशकों से मानसिक बीमारी से जूझ रहे वशिष्ठ नारायण सिंह ने 74 साल की उम्र में पटना में आख़िरी सांस ली.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर शोक जताया है. वशिष्ठ नारायण सिंह का जीवन काफ़ी उतार-चढ़ाव से भरा रहा. उनका जीवन नासा में काम करने से लेकर गुमनाम होने तक काफ़ी दिलचस्प है.

पटना से सीटू तिवारी ने वशिष्ठ नारायण सिंह के जीवन पर 2015 में तब स्टोरी की थी जब उनकी गुमनामी चर्चा में थी. पढ़िए वो पूरी स्टोरी.

एक बूढ़े आदमी हाथ में पेंसिल लेकर यूंही पूरे घर में चक्कर काट रहे थे. कभी अख़बार, कभी कॉपी, कभी दीवार, कभी घर की रेलिंग, जहां भी उनका मन करता, वहां कुछ लिखते, कुछ बुदबुदाते हुए.

घर वाले उन्हें देखते रहते थे, कभी आंखों में आंसू तो कभी चेहरे पर मुस्कराहट ओढ़े.

यह 70 साल का ‘पगला सा’ आदमी अपने जवानी में ‘वैज्ञानिक जी’ के नाम से मशहूर था. मिलिए महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह से.

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वशिष्ठ नारायण सिंह

 

तकरीबन 40 साल से मानसिक बीमारी सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित वशिष्ठ नारायण सिंह पटना के एक अपार्टमेंट में गुमनामी का जीवन बिता रहे थे लेकिन किताब, कॉपी और एक पेंसिल उनकी सबसे अच्छी दोस्त थी.

पटना में उनके साथ रह रहे भाई अयोध्या सिंह ने कहा था, “अमरीका से वो अपने साथ 10 बक्से किताबें लाए थे, जिन्हें वो पढ़ा करते थे. बाक़ी किसी छोटे बच्चे की तरह ही उनके लिए तीन-चार दिन में एक बार कॉपी, पेंसिल लानी पड़ती थी.”

वशिष्ठ नारायण सिंह ने आंइस्टीन के सापेक्ष सिद्धांत को चुनौती दी थी. उनके बारे में मशहूर है कि नासा में अपोलो की लॉन्चिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए तो कंप्यूटर ठीक होने पर उनका और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक था.

पटना साइंस कॉलेज में बतौर छात्र ग़लत पढ़ाने पर वह अपने गणित के अध्यापक को टोक देते थे. कॉलेज के प्रिंसिपल को जब पता चला तो उनकी अलग से परीक्षा ली गई जिसमें उन्होंने सारे अकादमिक रिकार्ड तोड़ दिए.

पाँच भाई-बहनों के परिवार में आर्थिक तंगी हमेशा डेरा जमाए रहती थी. लेकिन इससे उनकी प्रतिभा पर ग्रहण नहीं लगा.

वशिष्ठ नारायण सिंह

प्रतिभा की पहचान

वशिष्ठ नारायण सिंह जब पटना साइंस क़ॉलेज में पढ़ते थे तभी कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन कैली की नज़र उन पर पड़ी. कैली ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और 1965 में वशिष्ठ नारायण अमरीका चले गए.

साल 1969 में उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए. नासा में भी काम किया लेकिन मन नहीं लगा और 1971 में भारत लौट आए.

पहले आईआईटी कानपुर, फिर आईआईटी बंबई और फिर आईएसआई कोलकाता में नौकरी की.

इस बीच 1973 में उनकी शादी वंदना रानी सिंह से हो गई. घरवाले बताते हैं कि यही वह वक्त था जब वशिष्ठ जी के असामान्य व्यवहार के बारे में लोगों को पता चला.

उनकी भाभी प्रभावती बताती हैं, “छोटी-छोटी बातों पर बहुत ग़ुस्सा हो जाना, कमरा बंद करके दिन-दिन भर पढ़ते रहना, रात भर जागना उनके व्यवहार में शामिल था. वह कुछ दवाइयां भी खाते थे लेकिन वे किस बीमीरी की थीं, इस सवाल को टाल दिया करते थे.”

वशिष्ठ नारायण सिंह

बीमारी और सदमा

इस असामान्य व्यवहार से वंदना भी जल्द परेशान हो गईं और तलाक़ ले लिया. यह वशिष्ठ नारायण के लिए बड़ा झटका था.

तक़रीबन यही वक्त था जब वह आईएसआई कोलकाता में अपने सहयोगियों के बर्ताव से भी परेशान थे.

भाई अयोध्या सिंह कहते हैं, “भैया (वशिष्ठ जी) बताते थे कि कई प्रोफ़ेसर्स ने उनके शोध को अपने नाम से छपवा लिया और यह बात उनको बहुत परेशान करती थी. ”

साल 1974 में उन्हें पहला दौरा पड़ा, जिसके बाद शुरू हुआ उनका इलाज. जब बात नहीं बनी तो 1976 में उन्हें रांची में भर्ती कराया गया.

घरवालों के मुताबिक़ इलाज अगर ठीक से चलता तो उनके ठीक होने की संभावना थी. लेकिन परिवार ग़रीब था और सरकार की तरफ़ से मदद नहीं मिली.

1987 में वशिष्ठ नारायण अपने गांव लौट आए. लेकिन 89 में अचानक ग़ायब हो गए. साल 1993 में वह बेहद दयनीय हालत में डोरीगंज, सारण में पाए गए.

वशिष्ठ नारायण सिंह

‘रद्दी हो जाएगा सब’

आर्मी से सेवानिवृत्त डॉ वशिष्ठ के भाई अयोध्या सिंह बताते हैं, ” उस वक्त तत्कालीन रक्षा मंत्री के हस्तक्षेप के बाद मेरा बेंगलुरु तबादला किया गया जहां भैया का इलाज हुआ. लेकिन फिर मेरा तबादला कर दिया गया और इलाज नहीं हो सका. तब से अब तक वह घर पर हैं.”

डॉ वशिष्ठ का परिवार उनके इलाज को लेकर अब नाउम्मीद हो चुका था. घर में किताबों से भरे बक्से, दीवारों पर वशिष्ठ बाबू की लिखी हुई बातें, उनकी लिखी कॉपियां उनको डराती थीं. डर इस बात का थआ कि क्या वशिष्ठ बाबू के बाद ये सब रद्दी की तरह बिक जाएगा.

जैसी कि उनकी भाभी प्रभावती कहती भी हैं, “हिंदुस्तान में मिनिस्टर का कुत्ता बीमार पड़ जाए तो डॉक्टरों की लाइन लग जाती है. लेकिन अब हमें इनके इलाज की नहीं किताबों की चिंता है. बाक़ी तो यह पागल ख़ुद नहीं बने, समाज ने इन्हें पागल बना दिया.”

Input : BBC Hindi

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24 घंटे में फिर बढ़ा प्रदूषण, सास की बीमारी का ख’तरा

Himanshu Raj

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शहर में वायु प्रदूषण का स्तर एक दिन पूर्व के मुकाबले गुरुवार को और अधिक खराब स्थिति में पहुंच गया। हालत लगातार बिगड़ती नजर आ रही है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर लोगों को सास की बीमारी हो सकती है। फेफड़े और दिल की बीमारियों वाले लोगों पर इसका प्रभाव खतरनाक हो सकता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन केंद्र, मुजफ्फरपुर के अनुसार एयर क्वालिटी 326 से बढ़कर 341 पर पहुंच गई। यह काफी खराब स्थिति है और रेड जोन की ओर तेजी से बढ़ रही है। शाम आठ बजे कलेक्ट्रेट कैंपस में अवस्थित प्रदूषण केंद्र से ये आंकड़ा सामने आया। दिल्ली में एयर क्वालिटी वैल्यू 456 से बढ़कर 463 तो पटना में ये 373 से बढ़कर 389 हो गई। प्रदूषण के गिरते स्तर को देखते हुए जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने कहा कि मौजूदा हालात पर पैनी नजर रखी जा रही है।

एहतियातन जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण कमेटी की मंगलवार को बैठक बुलाई गई है। हर स्तर पर नजर रखी जा रही है। प्रमुख सड़कों पर पानी का छिड़काव हो रहा है। धुआं उगलने वाले वाहनों की चेकिंग बढ़ा दी गई है। प्रदूषण नियंत्रण की मॉनीटरिग के लिए तीन सेंटर बनाने हैं। एक जगह पहले से है तो दूसरा जिला स्कूल में होगा। तीसरे के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। डेंजर लेबल की ओर तेजी से बढ़ रहा प्रदूषण का स्तर एयर क्वालिटी इंडेक्स के हिसाब से बुधवार को जहां खराब स्थिति दर्ज की गई थी। वहीं अगले 24 घंटे में ही यह बढ़कर और बदतर हो गई। यह स्तर अत्यंत खतरनाक जोन से सिर्फ एक पायदान पीछे का है। अगर प्रदूषण का स्तर यूं ही जारी रहा तो लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल, जो स्थिति है बेहद चिंताजनक है। उसके मुताबिक स्वस्थ लोग भी सांस की बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। फेफड़े/हृदय रोगियों के लिए आबोहवा जानलेवा साबित हो सकती है। जैसे-जैसे हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है सबकी चिंता बढ़ा दी है। बुलाई गई है प्रदूषण नियंत्रण समिति की बैठक

जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने बताया कि प्रदूषण की स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर है। एहतियातन जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। नगर निगम व जिला परिवहन विभाग को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण समिति की बैठक बुलाई गई है।

Input: Jagran

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ड्राइविंग लाइसेंस के लिए डीटीओ कार्यालय में हंगामा, पिटाई

Himanshu Raj

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ड्राइविंग लाइसेंस के लिए काफी दिनों से जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) आ रहे युवक ने गुरुवार को अपना धैर्य खो दिया। आक्रोशित हो डीटीओ, एमवीआइ एवं कर्मियों को भद्दी-भद्दी गाली देने लगे। अधिकारियों एवं कर्मियों को धमकी दी। उसकी इस हरकत से कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। कर्मियों ने उसे समझाने की कोशिश की। मगर वह नहीं माना और हंगामा करने लगा। इस पर वहां तैनात सुरक्षा बल एवं कर्मियों ने युवक की जमकर पिटाई कर दी। इससे कुछ देर के लिए भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। मौके पर पहुंचे डीटीओ मो. नजीर अहमद एवं एमवीआइ दिव्य प्रकाश ने इसकी सूचना नगर थाने को दी। बाद में युवक के गलती मानने एवं लिखित माफी मांगने पर छोड़ दिया गया। अधिकारियों के जांच में निकलते ही पहुंचा था युवक दोपहर में डीटीओ, एमवीआइ एवं प्रवर्तन अवर निरीक्षक की टीम वाहन जांच को निकली। अधिकारियों के निकलते ही युवक हंगामा करने लगा। गाली देने के साथ ही सबको देख लेने की धमकी देने लगा। कर्मियों ने समझाया तो उससे भी उलझ गया। बाद में पिटाई की नौबत आ गई। हंगामे की सूचना मिलते ही सभी अधिकारी रास्ते से ही लौट आए। दोस्त के काम से आया था

 

युवक बीबीगंज का रहने वाला

बीबीगंज निवासी युवक ने बताया कि बेंगलुरू में रह रहे अपने दोस्त के डीएल संबंधी मामले में वह काफी दिनों से आ रहा है। इस मामले में कोर्ट का भी आदेश है। इसके बावजूद काम के नाम पर उसे पिछले कई दिनों से परेशान किया जा रहा था। गुरुवार को भी काम नहीं किया गया। युवक को छोड़ा गया डीटीओ मो. नजीर अहमद ने कहा कियुवक को कोई परेशानी थी तो मुझसे मिलना चाहिए था। इस तरह से गाली-गलौज एवं धमकी देना उचित नहीं। सुरक्षा बलों एवं कर्मियों ने उसे समझाया तो उससे ही उलझ गया। लिखित में माफीनामा देने के बाद उसे छोड़ दिया गया।

 

Input: Jagran

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