मुजफ्फरपुर : तंग गलियों में चलता गैस रिफिलिंग का खेल

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शहर में मुख्य सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों में रसोई गैस रिफिलिंग का खतरनाक खेल धड़ल्ले से चल रहा है। यह धंधा कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। तंग गलियों में घरेलू सिलेंडर से पांच किलो वाले छोटे सिलेंडर में गैस भरा जाता है।

घनी आबादी के बीच बड़े सिलेंडर को उल्टा कर छोटे सिलेंडरों में गैस भरा जाता है। बड़े से छोटे सिलेंडर में रिफिलिंग के दौरान गैस रिसाव से स्थानीय लोगों की जान अटकी रहती है। दम घुटने वाली गंध से लोगों को पल-पल बिताना मुश्किल होता है। सबसे अधिक दिक्कत गैस रिफिलिंग वाली दुकानों के आसपास रहने वाले बुजुर्ग, बच्चों व मरीजों को झेलनी पड़ती है। सारे नियम ताक पर रखकर शहर व आसपास के इलाकों में करीब एक हजार से अधिक गैस रिफिलिंग की दुकानें चल रही हैं। इन तमाम दुकानों में गैस रिफिलिंग का खतरनाक खेल चलता है। इन इलाकों से प्रतिदिन पुलिस के अलावा आपूर्ति व प्रशासन के अधिकारी गुजरते हैं, लेकिन वे कार्रवाई करने से हिचकते हैं। इससे धंधेबाजों का मनोबल बढ़ता जा रहा है।

रसोई गैस की होती कालाबाजारी

शहर में बड़े पैमाने पर खुलीं रिफिलिंग की दुकानें रसोई गैस की कालाबाजारी का केंद्र बनी हुई हैं। एजेंसी से घरों तक रसोई गैस पहुंचाने वाले कई वेंडर व धंधेबाजों की मिलीभगत से कालाबाजारी का खेल चलता है। वेंडर से नौ सौ रुपये में सिलेंडर लेकर धंधेबाज 12 सौ से 15 सौ रुपये तक बनाते हैं। 90 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से छोटे सिलेंडरों में गैस भरा जाता है। प्रति सिलेंडर पर धंधेबाज करीब पांच सौ रुपये की कमाई करता है।

Input : Live Hindustan