नई दिल्ली।राज्यसभा में एक अलग ही तरह का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। बिहार स्थित गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए निर्धारित तीन-अक्षरीय कोड ‘GAY’ को लेकर भाजपा सांसद भीम सिंह ने आपत्ति जताते हुए इसे बदलने की मांग की है। उन्होंने इसे सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से असहज बताते हुए सरकार से जवाब मांगा।

सांसद का कहना था कि यह कोड कई लोगों को असहज करता है और इसे किसी अधिक सम्मानजनक और उपयुक्त कोड से बदला जाना चाहिए।

केंद्र सरकार ने क्या कहा?

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि यह कोड IATA (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) द्वारा निर्धारित किया गया है, और ऐसे कोड को आमतौर पर स्थायी माना जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कोड में बदलाव केवल विशेष परिस्थितियों, जैसे कि सुरक्षा संबंधी खतरा, के मामले में ही किया जाता है।

पहले भी हो चुकी है यह मांग

मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि गया एयरपोर्ट का कोड बदलने को लेकर पहले भी एयर इंडिया समेत कई संगठनों और नागरिकों की ओर से अनुरोध किया गया है। हालांकि, IATA के नियम (Resolution 763) के अनुसार, सामाजिक या सांस्कृतिक आपत्ति को कोड बदलने का आधार नहीं माना जा सकता।

कोड निर्धारण की प्रक्रिया

IATA द्वारा जारी किए जाने वाले तीन-अक्षरों वाले कोड को ‘लोकेशन आइडेंटिफायर’ कहा जाता है। यह कोड आमतौर पर हवाई अड्डे के स्थान के नाम के पहले तीन अक्षरों पर आधारित होता है। इसी प्रक्रिया के तहत गया को ‘GAY’ कोड दिया गया है।

मंत्री ने कहा कि यह कोड केवल तकनीकी पहचान और विमानन प्रणाली के लिए होता है और इसका सामाजिक या भावनात्मक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।

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