नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है, लेकिन केंद्र सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार हालात पर लगातार नजर रख रही है और पूरे देश में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान गोयल ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए संबंधित विभाग सतर्क हैं और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए लगातार समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में फिलहाल ईंधन की उपलब्धता पर्याप्त है और स्थिति की बारीकी से निगरानी की जा रही है।

लोगों से घबराने की जरूरत नहीं

केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने भी होटल-रेस्टोरेंट संचालकों और आम लोगों से घबराने की जरूरत नहीं होने की अपील की है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे कुछ जगहों पर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि सरकार इस समस्या के समाधान के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर उनकी केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से फोन पर बातचीत हुई है और होटल उद्योग से जुड़ी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया गया है। साथ ही युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास भी जारी हैं।

आयात पर निर्भरता बनी चुनौती

मंत्री ने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से आयात करता है। मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति में दबाव बढ़ा है, जिसका असर पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर पड़ सकता है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू

इसी बीच केंद्र सरकार ने घरेलू ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसी एक्ट) के तहत कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और देश में इसकी स्थिर आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत कुछ हाइड्रोकार्बन संसाधनों को एलपीजी पूल की ओर मोड़ने का भी फैसला किया गया है।

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता

सरकार ने संशोधित आपूर्ति व्यवस्था में घरेलू उपभोक्ताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
• घरेलू और वाहन उपयोग: घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और वाहनों के लिए CNG की 100% आपूर्ति सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया गया है।
• उद्योग और वाणिज्यिक क्षेत्र: औद्योगिक इकाइयों और चाय प्रसंस्करण जैसे विनिर्माण क्षेत्रों को उनकी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
• उर्वरक संयंत्र: उर्वरक उद्योग को उनकी औसत खपत का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा।

सप्लाई में कटौती और वैकल्पिक रास्तों की तलाश

अधिकारियों के अनुसार घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को मिलने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में लगभग 35 प्रतिशत तक कटौती की गई है। साथ ही सरकार प्राकृतिक गैस की खरीद के लिए वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय मार्गों और स्रोतों की तलाश भी कर रही है।

छोटे कारोबारियों पर असर

हालांकि जमीनी स्तर पर कुछ छोटे और मध्यम व्यवसायों को कमर्शियल एलपीजी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हैदराबाद के एक रेस्टोरेंट संचालक अलीम खान ने बताया कि पिछले दो दिनों से उन्हें कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पाया है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।

वैश्विक तनाव से बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का दायरा बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। ईरान द्वारा मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में कई रणनीतिक ठिकानों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया है। इससे विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, जबकि भारत के प्राकृतिक गैस आयात का करीब 30 प्रतिशत भी इसी रास्ते से आता है।

सरकार का कहना है कि मौजूदा संकट के बावजूद देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

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