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HRD मंत्री की देश के प्राइवेट स्कूलों से अपील, बोले- इस साल न बढ़ाएं बच्चों की फीस

Santosh Chaudhary

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लॉकडाउन (Lockdown) के बीच देशभर के छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर आई है. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल (Ramesh Pokhriyal) ने देशभर प्राइवेट स्कूलों से अपील की है कि वे लॉकडाउन के दौरान सालाना स्कूल फीस वृद्धि और तीन महीने की फीस एक साथ लेने के निर्णय पर पुनर्विचार करें.

पोखरियाल ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि, देश भर से कई अभिभावकों की मेरे पास शिकायत आई है कि इस संकट के समय में भी कई स्कूल अपनी सालाना फीस में बढ़ोतरी कर रहे हैं और तीन महीने की फीस एक साथ ले रहें हैं.

उन्होंने स्कूलों से कहा कि इस वैश्विक आपदा के समय मेरा सभी स्कूलों से निवेदन है की सालाना स्कूल फीस वृद्धि और तीन महीने की फीस एक साथ ना लेने पर सहानुभूति पूर्वक विचार करें.

उन्होंने एक और ट्वीट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस महामारी के समय मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है, इस परिप्रेक्ष्य में आशा है कि सभी स्कूल अपने टीचर्स और पूरे स्टाफ को समय पर सैलरी उपलब्ध कराने की चिंता कर रहे होंगे.

उधर, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस की वजह से शिक्षा और अर्थव्यवस्था सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. मुझे और सरकार को कई जगह से शिकायत मिल रही है कि कुछ स्कूल बढ़ा फीस ले रहे हैं. ये लोग सरकार से बिना इजाजत लिए फीस बढ़ा रहे हैं. उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) ने आदेश दिए हैं कि दिल्ली के प्राइवेट स्कूल बिना सरकार से पूछ फीस नहीं बढ़ाएंगे. उन्होंने कहा कि बच्चों से एक साथ तीन महीने की फीस नहीं वसूली जाएगी.

CBSE ने भी सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर कहा है कि वे स्कूल फीस और स्टाफ के वेतन भुगतान के मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ देखें.

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कोरोना से बचाव की गारंटी नहीं है वैक्सीन, तीव्रता होगी कम: एक्सपर्ट्स

Ravi Pratap

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देश के कुछ हिस्सों से कोरोना वायरस का टीका लगाए जाने के बावजूद संक्रमण के मामले सामने आने के बाद विशेषज्ञों ने कहा है कि कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण ”कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करता बल्कि इससे संक्रमण की तीव्रता कम होती है और मृत्यु दर में कमी आती है। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी भी क्लीनिकल स्टडी से टीकाकरण और इसके बाद बीमारी से ग्रसित होने के बीच अनौपचारिक संबंध का पता नहीं चला है। दिल्ली से चेन्नई तक और पटना जैसे टियर-2 शहरों में भी टीकाकारण के लाभार्थी कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं।

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में मामलों में नवीनतम बढ़ोतरी के बाद 37 चिकित्सक संक्रमित हो गए, जिनमें से पांच को उपचार के लिए भर्ती किया गया। यह जानकारी पिछले हफ्ते अस्पताल के सूत्रों ने दी।सूत्रों ने बताया कि उनमें से कई ने कोविशील्ड टीके की दोनों खुराकें ली थीं। दिल्ली में 54 वर्षीय एक सफाई कर्मचारी की तबियत खराब होने से 22 फरवरी को मौत हो गई। उनके बेटे धीरज ने बताया था, ”मेरे पिता ने कोविशील्ड की पहली खुराक 17 फरवरी को ली थी। उस दिन जब वह घर लौटे तो असहज महसूस कर रहे थे और अगले दिन उनके शरीर का तापमान काफी बढ़ गया, जो दो-तीन दिन तक रहा।” उन्होंने कहा कि टीकाकरण के बाद कमजोरी होने के बावजूद उनके पिता काम पर जाते रहे और ड्यूटी के दौरान ही बेहोश हो गए। बाद में अस्पताल में उनका निधन हो गया।

इसी तरह से चेन्नई में भी एक व्यक्ति ने 15 मार्च को टीका लगवाया और 29 मार्च को फिर से कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए। उन्हें 30 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया और चार मार्च को उनकी मौत हो गई, जिससे परिजन टीके के असर को लेकर सशंकित हो गए। देश के कई हिस्से में टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव (एईएफआईएस) की मामूली घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन कुछ मामलों में गंभीर प्रतिकूल प्रभाव भी हुए जिस कारण मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बहरहाल, केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों सुरक्षित हैं और लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। कई विशेषज्ञों ने कहा कि टीकाकरण से कोविड-19 के खिलाफ घातक वायरस से सुरक्षा नहीं होती, बल्कि इससे संक्रमण की तीव्रता में कमी आती है और मौत के मामले घटते हैं।

दिल्ली के अपोलो अस्पताल के डॉ. अवधेश बंसल ने कहा, ”हम जानते हैं कि टीकाकरण के बाद भी संक्रमण के मामले आए हैं और दो खुराक लेने के बावजूद मामले सामने आए हैं। लेकिन ये मामले उन लाभार्थियों से जुड़े हुए हैं जिनमें बहुत ही हल्के लक्षण थे। टीका कम से कम संक्रमण की तीव्रता को कम करता है और मृत्यु दर में कमी लाता है।”

उन्होंने कहा कि दो खुराक के बाद ही टीका पूरी तरह प्रभावी होता है। फोर्टिस अस्पताल की डॉ. ऋचा सरीन ने बंसल से सहमति जताते हुए कहा, ”दोनों खुराक लेने के बाद ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बनती है। इसलिए पहली खुराक के बाद किसी के संक्रमित होने की संभावना हो सकती है।” दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल के चिकित्सक ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि टीके से पूरी तरह सुरक्षा नहीं होती है। उन्होंने कहा कि मास्क पहनने से वायरस से लड़ा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि दो खुराक के बाद ही टीका पूरी तरह प्रभावी होता है। फोर्टिस अस्पताल की डॉ. ऋचा सरीन ने बंसल से सहमति जताते हुए कहा, ”दोनों खुराक लेने के बाद ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बनती है। इसलिए पहली खुराक के बाद किसी के संक्रमित होने की संभावना हो सकती है।” दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल के चिकित्सक ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि टीके से पूरी तरह सुरक्षा नहीं होती है। उन्होंने कहा कि मास्क पहनने से वायरस से लड़ा जा सकता है।

Input: Live Hindustan

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शवों के अंतिम संस्कार के लिए वेटिंग, सड़क किनारे फुटपाथ पर पड़ीं लाशें

Ravi Pratap

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देश और उत्तर प्रदेश में जारी कोरोना के कोहराम के बीच कोरोना संक्रमण और सामान्य मौतों से गाजियाबाद का हिंडन श्मशान घाट भी अब फुल हो गया है। यहां आने वाले लोगों को अपने परिजनों के शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हालात इस कद्र खराब हो गए हैं कि शुक्रवार को अंतिम संस्कार के लिए यहां लगाए गए शव अपनी बारी के इंतजार में सड़क किनारे फुटपाथ पर रखे दिखे। इसके साथ ही 14 एंबुलेंस कोविड संक्रमित मरीजों के शवों को लेकर श्मशान घाट के बाहर खड़ी हैं।

ऐसे ही दृश्य गुरुवार को भी देखे गए थे, जब लोगों को अर्थी को प्लैटफॉर्म से दूर रखकर घंटों तक अंतिम संस्कार के लिए बारी का इंतजार करना पड़ा। उन परिजनों की हालत तब और खराब हो गई, जिन्हें तीन बजे के बाद अंतिम संस्कार के लिए मना कर दिया गया।

वहीं, क्षमता से अधिक शवों के आज जाने से श्मशान घाट प्रबंधन भी परेशान है। यहां पर मृतकों के परिजनों को नंबर देकर शेड के लिए इंतजार कराने को कहा जा रहा है। गुरुवार को शाम से पहले सभी शेड भर चुके थे। इसके बाद शेष शवों को लौटाना पड़ा। विद्युत शवदाह गृह के संचालक विकास ने बताया कि इसमें एक शव की क्रिया में कम से कम दो घंटे लगता है। उन्होंने कहा कि एक ही शेड होने से परिजनों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।

एक दिन में रिकॉर्ड 538 संक्रमित मिले

गाजियाबाद जिले में गुरुवार को अभी तक के सबसे ज्यादा एक दिन में 538 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। ये जिले का एक दिन में सर्वाधिक मरीज मिलने का रिकॉर्ड है। इससे पहले सितंबर 2020 माह को 377 संक्रमित मिलने का रिकॉर्ड था। जिले में कोरोना के कुल मरीजों की संख्या 29,375 पहुंच गई है, जिसमें से 27,548 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और 104 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। वहीं वर्तमान में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 1723 पहुंच गई है। 15 अप्रैल 2020 को जिले में केवल एक संक्रमित मिला और कुल केस 32 थे। इस महीने में संक्रमण दर तीन फीसद के करीब पहुंच गई है। अप्रैल 2021 के 15 दिनों में अब तक 2078 कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। 15 दिन के भीतर ही संक्रमण दर 0.69 से सीधे 2.80 फीसद पर पहुंच गई है। स्वस्थता दर में कमी आ रही है। वहीं, रजापुर ब्लॉक के लिए नामित किए गए नर्विाचन अधिकारी जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास चंद्रा भी कोरोना पॉजिटिव हो गए।

नाइट कर्फ्यू का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई

गाजियाबाद में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू नाइट कर्फ्यू के समय में बदलाव किया गया है। अब नाइट कर्फ्यू रात आठ बजे से सुबह सात बजे तक लागू रहेगा। उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पिछले सप्ताह रात दस बजे से सुबह छह बजे तक नाइट कर्फ्यू घोषित किया गया था, यह व्यवस्था लगातार जारी थी। पुलिस बाजारों में सक्रिय होकर दुकानदारों को दुकानें बंद करने के निर्देश दे रही थी। वहीं, व्यापार संघ के पदाधिकारी भी लगातार दुकानदारों से दस बजे से पहले अपने सभी प्रतिष्ठान बंद करने के आह्वान कर रहे थे। अब अचानक मामले बढ़ने के साथ ही कर्फ्यू का समय भी बढ़ा दिया गया है। शासन के आदेश पर जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने जिले में नाइट कर्फ्यू का समय रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। नाइट कर्फ्यू के नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। समय बढ़ाने के साथ ही पूर्व में जिन लोगों को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया था, वह व्यवस्था आगे भी लागू रहेगी। नगर निगम को साफ-सफाई के साथ सैनिटाइजेशन करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

Input: Live Hindustan

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INDIA

कर्फ्यू और लॉकडाउन से न थमे इकॉनमी की रफ्तार, नया पैकेज लाएगी मोदी सरकार

Ravi Pratap

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कोरोना के बढ़ते मामले के बीच अर्थव्यवस्था की रिकवरी पटरी से न उतरे इसके लिए केंद्र सरकार एक और राहत पैकेज ला सकती है। ज्यादातर राज्य कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण नाइट कर्फ्यू और प्रतिबंध लगा रही हैं और इससे अर्थव्यवस्था के सुधार पर असर पड़ सकता है।

अगर महामारी की दूसरी लहर गरीबों की आजीविका को बाधित करती है, यह पैकेज गरीबों को राहत दे सकता है। इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने इसकी जानकारी दी। सरकार ने पिछले साल 26 मार्च से 17 मई के बीच आर्थिक प्रोत्साहन-सह-राहत पैकेज की घोषणा की थी। ताकि, कोविड-19 से बुरे तरीके से प्रभावित कारोबारी गतिविधियों को सुधारा जा सके। केंद्र सरकार ने 20.97 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया था।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य प्रमुख विभाग एक अन्य प्रोत्साहन के लिए जरूरत और समय के लिए हितधारकों के संपर्क में हैं। नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि एक राष्ट्रव्यापी सख्त लॉकडाउन को प्रधानमंत्री ने खारिज कर दिया गया है। सरकार उद्योग की किसी भी आवश्यकता, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) का जवाब देगी। ताकि, आर्थिक गतिविधियों और आजीविका बाधित न हो।

केंद्र अपने टीकाकरण अभियान का विस्तार भी कर सकता है ताकि कोविड -19 के प्रसार को कम किया जा सके। इस मामले से जुड़े व्यक्ति ने बताया कि औद्योगिक श्रमिकों का टीकाकरण विचाराधीन है। उनकी उम्र चाहे कितनी भी हो इससे फर्क नहीं पड़ने वाला और उन्हें टीकाकरण की उपलब्धता के आधार पर टीका लगाया जाएगा

भारत ने मंगलवार को ड्रग रेगुलेटर ने स्पुतनिक वी वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। इस कदम से आने वाले महीनों में वैक्सीन की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। वित्त मंत्रालय अन्य मंत्रालयों और उद्योग प्रतिनिधियों से विशिष्ट जानकारी ले रहा है। इनपुट्स के आधार पर सरकार प्रभावित क्षेत्रों को राहत देने के लिए कई घोषणाओं की एक सीरिज ला सकता है।

Input: Live Hindustan

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