पिता को एक हस्ताक्षर के लिए कलेक्टर कार्यालय की ठोकरें खाता देख बेटी खुद ही बन गई IAS ऑफिसर
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पिता को एक हस्ताक्षर के लिए कलेक्टर कार्यालय की ठोकरें खाता देख बेटी खुद ही बन गई IAS ऑफिसर

Santosh Chaudhary

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आज हमने चाहे कितनी ही तरक्की क्यूँ न कर ली हो डिजिटल इंडिया में रहने के बावजूद भी आज किसी आम आदमी को सरकारी दफ़्तर में किसी काम के लिए बड़े साहब के दस्तख़त करवाने हो तो ना जाने कितने चक्कर काटने पड़ते हैं, कितने सवालों से रूबरू होना पड़ता है, कितने ही लोगों की जी हुज़ूरी करनी पड़ती है, तब जाकर कही एक दस्तख़त मिलता है। क्या करे नौकरशाही का अंदाज ही कुछ ऐसा है, बड़े अधिकारियों का रवैया तो बहुत सहज होता है परन्तु उन तक पहुँचने के लिए जिन सीढ़ियों से गुजरना पड़ता है वो बेहद ही कठिन होती है। आज हम एक ऐसी ही बच्ची की कहानी आपको बताने जा रहे हैं जिसने अपने पिता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते हुए लाचार और परेशान देखा।

KenFolios में प्रकाशित आलेख के अनुसार पिता को एक हस्ताक्षर के लिए कई दिनों की जद्दोजहद करते देख उस बच्ची ने ठान लिया कि एक दिन बड़ी होकर उसे एक काबिल कलेक्टर बनना है और सभी की मुश्किलों को दूर करना है, जो परेशानी उसके पिता ने देखी वो परेशानी किसी और पिता को ना देखनी पड़े। हमारी आज की कहानी आईएएस अधिकारी रोहिणी भाजीभाकरे के इर्द-गिर्द घूम रही है।

बहुत साल पहले महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक किसान सरकारी दफ्तर के नीचे से लेकर ऊपर तक अपने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने के लिए दौड़-धूप कर रहा था, तब उस किसान की बेटी ने उनसे पूछा कि “पिताजी आप क्या कर रहे हैं? आपको क्यूँ इतना परेशान होना पड़ रहा है? आम जन की परेशानी खत्म हो ये सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? तब उसके पिता का जवाब था, जिला कलेक्टर। इस एक शब्द ने उस बच्ची के दिलो दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी।

उस वक़्त रोहिणी केवल 9 वर्ष की थी। गौरतलब है कि सरकार द्वारा किसानों के लिए कुछ घोषणाएँ की गयी थी और उन्हीं घोषणाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए उन्होंने अपने पिता को संघर्ष करते देखा था। रोहिणी के बाल मन ने उसी समय यह संकल्प कर लिया कि जिनके हस्ताक्षर के लिए उनके पिता को इस तरह भटकना पड़ रहा है एक दिन वो वही अधिकारी बनेंगी।

“मेरे पिता 65 वर्ष से स्वयंसेवक हैं। जब मैंने उन्हें बताया कि मैं कलेक्टर बनना चाहती हूं तो उन्होंने बोला कि मेरी सलाह है कि तुम जब एक कलेक्टर बन जाओ तो यह सुनिश्चित करना कि तुम हमेशा जरुरतमंदों की मदद करो।“

उस घटना के ठीक 23 साल बाद रोहिणी ने अपने सपने को साकर कर दिखाया और तमिलनाडु राज्य के सेलम जिले को 170 पुरुष आई.ए.एस के बाद पहली महिला कलेक्टर रोहिणी के रूप में मिली।

पिता की बात को शिरोधार्य करते हुए रोहिणी ने अपने कार्य क्षेत्र में कदम रखा। अपनी प्रशासनिक क्षमताओं के साथ–साथ उन्होंने नौकरी के दौरान अपनी बोल चाल की भाषा को भी निखारा है और अब तो वे मदुरई जिले में फ़र्राटे से तमिल भी बोल लेती हैं। 32 साल की रोहिणी का स्थानांतरण सेलम में सामाजिक योजनाओं के निदेशक के पद किया गया। इस पद पर नियुक्ति से पूर्व रोहिणी मदुरई में जिला ग्रामीण विकास एजेंसी में अतिरिक्त कलेक्टर और परियोजना अधिकारी के पद पर नियुक्त थी।

रोहिणी अपने काम और शालीन व्यवहार के चलते लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। रोहिणी कहती हैं कि ‘मैंने सरकारी स्कूल में अध्ययन किया है और मेरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई एक सरकारी कॉलेज से हुई, साथ ही मैंने सिविल सेवा परीक्षा में कोई निजी कोचिंग की सहायता भी नहीं ली। मेरे अनुभव ने मुझे यह यकीन दिलाया है कि हमारे सरकारी स्कूलों में भी बहुत अच्छे शिक्षक हैं और यदि कोई कमी है तो केवल बुनियादी सुविधाओं की।” रोहिणी की ख़ासियत है कि वे अपने प्रत्येक कार्य को सूझबूझ और सोच विचार के बाद ही करती हैं। यहाँ तक की कहने के पहले कुछ सेकंड रुकती हैं और अपने विचारों को पुन: एकत्रित कर अपनी बात को स्पष्ट करती हैं।

अपनी जिम्मेदारी के बारे में रोहिणी का मानना है कि “जिले की पहली महिला कलेक्टर होने के साथ-साथ कई सारी जिम्मेदारियां अपने आप ही आ जाती है। मैं अपनी जिम्मेदरियों को महिला सशक्तिकरण के संकेत के रूप में देखती हूँ।”

वर्तमान समय में रोहिणी सेलम के लोगों को और विद्यालयों में जाकर स्वछता के लिए जागरूक करने का अपना दायित्व निभा रही हैं। क्योंकि स्वछता और स्वास्थ्य संबंधी दो ऐसी समस्याएँ हैं जिनसे निपटना आवश्यक है।

रोहिणी जैसी अधिकारी जो जनता के लिए कार्य करती हैं, उनका स्थान अपने मन में जनता स्वयं निर्धारित करती है। इन अधिकारियों के पास वो शक्ति है जो आम लोगों की मुश्किलों का खात्मा कर सकती है और रोहिणी जैसी अधिकारी अपने दायित्वों को भलीभांति पूरा करते हुए समाज में मिसाल पेश कर रही हैं।

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झारखंड में BJP को बड़ा झटका दे सकती है JDU-LJP, साथ चुनाव लड़ने के दिए संकेत

Ravi Pratap

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लोक जन शक्ति पार्टी (LJP) के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Election) एनडीए से अलग लड़ने का ऐलान किया तो यह बीजेपी (BJP) के लिए एक बड़ा झटका माना गया. यह इसलिए कि एनडीए (NDA) की बड़ी सहयोगी जेडीयू (JDU) पहले से ही अकेले लड़ने की घोषणा कर चुकी है. अब ये दोनों पार्टियां मिलकर झारखंड के साथ दिल्ली में भी बीजेपी को और बड़ा झटका दे सकती है. दरअसल, जेडीयू के बड़े नेता ने ये संकेत दिए हैं कि एलजेपी और जेडीयू इन दोनों प्रदेशों में एक साथ चुनाव लड़ सकती हैं.

जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने न्यूज 18 से बात करते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि एलजेपी तो एक तरह से जेडीयू का ही हिस्सा है. वैचारिक तौर पर नीतीश कुमार और रामविलास पासवान की विचारधारा समान है. समरस विचार की दोनों पार्टियां झारखंड और दिल्ली में अगर एक साथ संयुक्त अभियान चलाएगी तो समाज का बड़ा तबका इनके साथ आएगा.

बता दें कि मंगलवार को चिराग पासवान ने यह ऐलान कर दिया था कि झारखंड में एलजेपी 50 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी. हालांकि, उसके बाद जेडीयू के साथ चुनाव लड़ने की भी खबरें सामने आने लगी हैं. राजनीतिक गलियारों से मिल रही खबरों पर यकीन करें तो कहा जा रहा है कि जेडीयू-एलजेपी के बीच बातचीत भी जारी है.

दूसरी तरफ, जेडीयू नेता और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने झारखंड में एलजेपी और जेडीयू के साथ चुनाव लड़ने की अटकलों पर कहा कि चिराग ने अपने तरीके से फैसला लिया है, जबकि जेडीयू ने पहले से ही अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं. गठबंधन के लिए चिराग ने देर से फैसला लिया है. जेडीयू में किस स्तर पर बात हो रही पता नहीं. सूत्रों की मानें तो एलजेपी ने दिल्ली में भी अकेले चुनाव लड़ने का मन बना लिया है. जाहिर है महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के अलगाव के बाद जेडीयू-बीजेपी का इन प्रदेशों में इकट्ठे आना एक बड़ा सेटबैक साबित हो सकता है.

Input : News18

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तेज प्रताप यादव ने BMW कार की आटो से ट’क्कर के बाद मांगा 1,80,00 ह’र्जा’ना, चालक को पी’टा

Santosh Chaudhary

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बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे और राजद के नेता तेज प्रताप यादव की कार गुरुवार की सुबह वाराणसी में दुर्घ’टनाग्रस्‍’त होने की जानकारी होने के बाद पु’लिस प्र’शासन में ह’ड़कंप म’च गया।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव की कार गुरुवार को वाराणसी में राेहनिया के करनाडाडी क्षेत्र से गुजर रही थी कि कार रोहनिया के पास दु’र्घटनाग्र’स्‍त हो गई। ‘हा’दसे की जानकारी होने के बाद पुलिस स’क्रिय होकर मौके पर पहुंच गई। हा’दसे की जानकारी होने के बाद तेज प्रताप यादव ने कार में जा रहे लोगों से पल पल की जानकारी भी ली। वहीं दुर्घ’टनाग्र’स्‍त होने के बाद कार स्‍टार्ट न होने और आगे न जा पाने की स्थिति होने की वजह से मौके पर ही सड़क के किनारे खड़ी कर दी गई।

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दरअसल इन दिनों तेज प्रताप यादव वृंदावन में हैं और उनको लेने के लिए बिहार से होकर रोहनिया के रास्‍ते उनकी बीएमडब्‍ल्‍यू कार गुजर रही थी कि सुबह करीब 6:30 बजे आटो में पीछे से उसने टक्‍कर मार दी। पुलिस के अनुसार तेज प्रताप की कार में उनके पीए स्रजन स्‍वराज और ड्राइवर जयापाल ही मौजूद थे। हादसे के बाद कार सड़क पर ही खड़ी हो गई। वहीं कार के साथ ही स्‍कोर्ट के अलावा दो अन्‍य गाडियां भी चल रही थीं जिनको तेज प्रताप यादव को लेने वृंदावन जाना था।

हादसे के बाद क्षतिग्रस्त बीएमडब्लू कार।

हादसे के बाद तेज प्रताप के चालक ने आटो चालक से 180000 रुपये हर्जाना मांगा तो आटो चालक ने असमर्थता जता दी। इसके बाद तेज प्रताप यादव के चालक ने आटो ड्राइवर को मारकर साथ में चल रही स्‍कोर्ट की गाड़ी में बैठा लिया। बीच सड़क पर वीआइपी गाड़ी के चालक द्वारा मारपीट की जानकारी होने के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ लग गई तो सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले आई। वहीं तेज प्रताप ने फोन पर अपने पीए को पुलिस थाने जाने से मना कर दिया। हालांकि मौके पर समझौता नहीं होने पर दोनों ही पक्षों को पुलिस रोहनिया थाने लेकर पहुंच गई और आवश्‍यक कार्रवाई में जुट गई है। चूंकि मामला वीआइपी व्‍यक्ति के वाहन से जुड़ा हुआ है लिहाजा पुलिस ने भी शीर्ष अधिकारियों को घटनाक्रम से अवगत करा दिया है।

Input : Dainik Jagran

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Children’s Day: गुरुग्राम की दिव्यांशी सिंघल को इस तस्वीर के लिए Google देगा 7 लाख की स्कॉलरशिप

Ravi Pratap

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Google Doddle पर आज चिल्ड्रन्स डे (Children’s Day) मनाया जा रहा है. इस दिन पहले और पूर्व प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) का जन्म हुआ था. गूगल ने ये डूडल चाचा नेहरू (Chacha Nehru) को समर्पित किया है. आपको बता दें, ये गूगल डूडल गुरुग्राम की दूसरी क्लास में पढ़ने वाली सात साल की लड़की दिव्यांशी सिंघल ने बनाया है. दिव्यांशी ने इस तस्वीर में पेड़-पौधों को चलते हुए दिखाया है और नाम दिया है ‘वॉकिंग ट्री’ (Walking Tree).


साल 2009 से गूगल हर साल 14 नवंबर को ‘Doodle 4 Google’ नाम की एक प्रतियोगिता रखता है. इस साल इस कॉम्पिटिशन की थीम थी “When I grow up, I hope”. इस बाल दिवस (Children’s Day) की प्रतियोगिता में गूगल को 1.1 लाख एंट्रीज़ मिली, ये सभी चित्र 1 से 5 तक की कक्षा वाले बच्चों ने बनाए थे, जिसमें दिव्यांशी सिंघल की इस पेंटिंग को चुना गया.

बता दें, पहले बाल दिवस (Bal Diwas) हर साल 20 नवंबर को मनाया जाता था, लेकिन 1969 में जवाहर लाल नेहरू की मौत के बाद चिल्ड्रन्स डे (Happy Children’s Day) को चाचा नेहरू के जन्मदिन 14 नवंबर को मनाया जाने लगा.

Children’s Day पूरे भारत में मनाया जाता है. इस दिन बच्चे स्कूलों में नाच-गाने वाले प्रोग्राम करते हैं. चाचा नेहरू के जन्मदिन पर खास भाषण दिया जाता है. वहीं, बाल दिवस के मैसेजेस से एक-दूसरे को चिल्ड्रंस डे की बधाई दी जाती हैं.
गूगल देता है स्कॉलरशिप
हर साल गूगल भारत के 1 से 5 कक्षा तक के बच्चों के लिए गूगल 4 डूडल नाम की प्रतियोगिता रखता है. इसमें जीतने वाले बच्चे (नेशनल विनर) को 5 लाख की कॉलेज स्कॉलरशिप और 2 लाख टेक्नोलॉजी पैकेज दिया जाता है. ये पूरी स्कॉलरशिप बच्चे के स्कूल को दी जाती है. इसके साथ ही बच्चे को सर्टिफिकेट/ट्रोफी और गूगल ऑफिस में भी घुमाया जाता है.

नेशनल विनर के अलावा, रनर-अप रहे 4 बच्चों की तस्वीरों को चिल्ड्रन्स डे पर बनाई गई गूगल गैलरी (Google Gallery) में शोकेस किया जाता है. इन बच्चों को भी 2.5 लाख कॉलेज स्कॉलरशिप और 1 लाख टेक्नोलॉजी पैकेज दिया जाता है. साथ ही सर्टिफिकेट/ट्रोफी के अलावा गूगल इंडिया ऑफिस में घुमाया जाता है.

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