साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच में युजवेंद्र चहल की शानदार गेंदबाजी (4/51) के अलावा रोहित शर्मा की शतकीय पारी (नाबाद 122) ने सुर्खियां बटोरीं. लेकिन इस मैच के दौरान सबसे ज्यादा चौंकाया महेंद्र सिंह धोनी के विकेटकीपिंग ग्लव्स ने.

साउथेम्प्टन में टीम इंडिया ने अपने वर्ल्ड कप अभियान का शानदार आगाज किया. मौजूदा ‘क्रिकेट महाकुंभ’ में लगातार फिसड्डी साबित हो रही दक्षिण अफ्रीकी टीम को विराट ब्रिगेड ने भी मात दी. बुधवार रात भारत को साउथ अफ्रीका पर 6 विकेट से धमाकेदार जीत हासिल हुई.

इस मैच में युजवेंद्र चहल की धारदार गेंदबाजी (4/51) के अलावा रोहित शर्मा की जोरदार शतकीय पारी (नाबाद 122) ने सुर्खियां बटोरीं. लेकिन मैच के दौरान सबसे ज्यादा चौंकाया महेंद्र सिंह धोनी के विकेटकीपिंग ग्लव्स ने. दरअसल, उनके ग्लव्स पर अनोखा निशान (प्रतीक चिह्न) देखने को मिला, जिसे हर कोई इस्तेमाल में नहीं ला सकता. दरअसल, यह बैज पैरा-कमांडो लगाते हैं. इस बैज को ‘बलिदान बैज’ के नाम से जाना जाता है.

balidan_060519105821.jpg
बलिदान बैज

क्या है बलिदान बैज?

पैराशूट रेजिमेंट के विशेष बलों के पास उनके अलग बैज होते हैं, जिन्हें ‘बलिदान’ के रूप में जाना जाता है. इस बैज में ‘बलिदान’ शब्द को देवनागरी लिपि में लिखा गया है. यह बैज चांदी की धातु से बना होता है, जिसमें ऊपर की तरफ लाल प्लास्टिक का आयत होता है. यह बैज केवल पैरा-कमांडो द्वारा पहना जाता है.

धोनी के ग्लव्स पर ये निशान कैसे? क्या है फैक्ट –

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को क्रिकेट में उनकी उपलब्धियों के कारण 2011 में प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक दी गई थी. धोनी यह सम्मान पाने वाले कपिल देव के बाद दूसरे भारतीय क्रिकेटर हैं.

धोनी को मानद कमीशन दिया गया क्योंकि वह एक युवा आइकन हैं और वह युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. धोनी एक प्रशिक्षित पैराट्रूपर हैं. उन्होंने पैरा बेसिक कोर्स किया है और पैराट्रूपर विंग्स पहनते हैं.

महेंद्र सिंह धोनी ने प्रादेशिक सेना (टीए) की 106 पैराशूट रेजिमेंट में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में अपनी रैंक को साबित कर दिखाया है.

धोनी अगस्त 2015 में प्रशिक्षित पैराट्रूपर बन गए थे. आगरा के पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में भारतीय वायु सेना के एएन-32 विमान से पांचवीं छलांग पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित पैरा विंग्स प्रतीक चिह्न (Para Wings insignia) लगाने की अर्हता प्राप्त कर ली थी. यानी इसी के साथ धोनी को इस बैज के इस्तेमाल की योग्यता हासिल हो गई.

गौरतलब है कि तब धोनी 1,250 फीट की ऊंचाई से कूद गए थे और एक मिनट से भी कम समय में मालपुरा ड्रॉपिंग जोन के पास सफलतापूर्वक उतरे थे.

dhoni-padma-bhushan-reuters_060519114104.jpg

धोनी को 2018 में पद्म भूषण से नवाजा गया

नवंबर 2011 में धोनी को प्रादेशिक सेना (TA) में लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद रैंक से सम्मानित किया गया था. तब उन्होंने कहा था कि वह सेना में अधिकारी बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें क्रिकेटर बना दिया.

Input : Ajj Tak

I just find myself happy with the simple things. Appreciating the blessings God gave me.