देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुकी मधुबनी पेंटिंग अब मास्क पर भी दिखने लगी है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए हर किसी को मास्क की जरूरत है। मगर, बाजार में इसकी किल्लत है। ऐसे में आर्थिक संकट से जूझ रहे मधुबनी पेंटिंग के कलाकारों ने आमदनी का नया रास्ता खोज लिया है। ये सूती कपड़े के मास्क पर मछली, अरिपन, सूर्य देवता, तरह-तरह के फूल-पत्ती और पक्षी बना रहे हैं। इसे सैनिटाइज कर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। बाजार में इसकी डिमांड बढ़ रही। शहर के लहेरियागंज निवासी लक्ष्मी पांडेय का पूरा परिवार इस काम में तन्मयता से जुटा है। मास्क की मांग देखते हुए वे घर पर एक दर्जी से मानक के अनुरूप दो लेयर में मास्क तैयार करा उस पर मधुबनी पेंटिंग बनाती हैं। बीते 10 दिनों में तीन सौ से अधिक लोगों को मास्क उपलब्ध करा चुकी हैं। फिलहाल पांच सौ से अधिक मास्क के आर्डर को पूरा करने में जुटी हैं।

एक मास्क पर 25 रुपये की बचत : 70 रुपये में बिकनेवाले इस मास्क को तैयार करने पर करीब 45 रुपये का खर्च आता है। इससे कलाकार को एक मास्क पर 25 रुपये की बचत हो रही है। दिनभर में अधिकतम 12 मास्क बनाने पर एक कलाकार को तीन सौ रुपये की बचत हो रही है। मधुबनी पेंटिंग वाले मास्क का निर्माण शुरू करने वाली लक्ष्मी का कहना है कि अधिक डिमांड आने पर अन्य स्थानीय कलाकारों को भी जोड़ेंगी। ताकि, समय पर लोगों को मास्क मिल सके। शहर के श्याम कुमार ने बताया कि बाजार में मिलने वाले साधारण मास्क की अपेक्षा सूती कपड़े से तैयार मधुबनी पेंटिंग की छटा वाले मास्क का उपयोग करने से वायरस से बचाव के साथ अपनी कला को सम्मान देने की अनुभूति होती है।

दीवार से कागज फिर कपड़े और खिलौने के बाद मास्क पर मधुबनी पेंटिंग की नई पहल निश्चित रूप से आगे चलकर कला को नई पहचान देगी। कलाकारों की आमदनी में भी इजाफा होगा।

– दुलारी देवी, मधुबनी पेंटिंग की प्रसिद्ध कलाकार

Input : Dainik Jagran

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