⁃ शर्म करो आंटी. बेटे की उम्र का बॉफ़्रेंड ले कर घूम रही हो.

⁃ इसका कैरेक्टर ख़राब तभी अरबाज़ भाई ने छोड़ दिया.

⁃ यार इसका तो मेनोपॉज़ हो चुका होगा. इससे तो बच्चे भी नहीं होंगे तुम्हें.

⁃ अर्जुन तुम इस आंटी के साथ क्यूँ घूम रहे हो. तुम्हें कोई और नहीं मिली?

— ये महज़ चंद स्टेटमेण्ट है जिसे मैंने यहाँ लिखा है. बाक़ी के सैकड़ों स्टेटमेण्ट इतने भद्दे हैं कि लिख नहीं सकती यहाँ.

न्यू ईयर पार्टी के बाद जब अर्जुन कपूर, मलाईका अरोड़ा का हाथ प्यार में थामें पहली बार मीडिया के सामने आयें तब से उन्हें इस क़दर ट्रोल किया जा रहा है.

ऐसा नहीं है कि इस ट्रोल करने से मलाईका या अर्जुन की मुहब्बत पर कोई असर पड़ेगा. ये सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारे समाज की दोगली मानसिकता को दिखाता है.

जहाँ एक औरत अगर अपनी शादी में ख़ुश नहीं है और तलाक़ ले अलग होने का फ़ैसला लेती है, तो उसे तुरंत “कैरेक्टरलेस” होने का सर्टिफ़िकेट थमा दिया जाता है.

जहाँ अगर तलाक़ या पति के मौत के बाद औरतें अगर ज़िंदगी में आगे बढ़ना चाहती है किसी के साथ, तो उसे ग़लत ठहरा दिया जाता.

क्या औरतों का अपना कोई वजूद नहीं है? क्या वो ज़िंदगी में दुबारा अपनी ख़ुशी के लिए अपना महबूब नहीं चुन सकती?

ज़रा बताइए हमारा ये समाज कितने ऐसे मर्दों पर ऊँगली उठाता है जिनका तलाक़ हो चुका है?

कितने ऐसे मर्द को ग़लत ठहराया है जिन्होंने पत्नी के मर जाने के बाद दुबारा शादी की है.

जब किसी की पत्नी मर जाती है तो हम बड़े ही हमदर्दी वाले स्वर में कहते हैं, “आह बेचारे का घर उजड़ गया. दूसरी शादी कर उसे घर फिर से बसा लेना चाहिए.”

मगर हमारी इसी ज़ुबान को ताले क्यों पड़ जाते है जब कोई औरत विधवा हो जाती है? हम उसकी घर बसाने की वकालत क्यों नहीं करते?

और तो और पुरुष अपनी आधी से भी आधी उम्र की लड़की से शादी कर ले, या गर्लफ़्रेंड तो हमें चलेगा. वहाँ हम ये नहीं बोलते कि, “बेटी से क्यूँ शादी कर रहे?”
या हम ये कहते कि, “वो कितना बड़ा चार्मर है कि उसे इतनी कम उम्र की गर्ल-फ़्रेंड मिल गयी.”

ज़्यादा दूर जाने की ज़रूरत नहीं है अभी हाल में हुए प्रियंका और निक की शादी पर हमने कलेजा पीटा ही था न. प्रियंका को अपने दस-बारह साल के कम उम्र के पति चुनने पर.

अब मलाईका और अर्जुन पर पीट रहें. यहाँ तो कलेजा और पीटा जाएगा अभी क्योंकि मलाईका एक टीनएजर लड़के की माँ जो ठहरीं.

लेकिन ये कलेजा सिर्फ़ मलाईका पर ही पीटा जाएगा अरबाज़ पर नहीं. जो ख़ुद अभी किसी साईबेरियं मॉडल को डेट कर रहें. उनकी साथ वाली तस्वीरों को तो नहीं ट्रोल किया जा रहा.

ये सिर्फ़ और सिर्फ़ मलाईका के केस में हो रहा क्योंकि वो औरत है. उन्हें तो ख़ुशियों को चुनने का कोई हक़ ही नहीं है.

ख़ैर, जिस देश में एक स्त्री जो अपने दम से किसी मुक़ाम पर पहुँची है, बजाय उसकी पसंद को रेस्पेक्ट देने के हम कीचर उछाल रहें हैं. तो ज़रा सोचिएगा कि वो औरतें जो चहारदीवारी में बंद रहती हैं या जिन्हें अब भी कोई आज़ादी नहीं मिली है उनका क्या हाल होता होगा.

सच में हम वो क़ौम हैं जिन्हें मुहब्बत से नफ़रत है!

(अनु रॉय मुंबई में रहती हैं और महिला अधिकारों पर लिखती हैं. यहां व्यक्त विचार उनके निजी हैं और मुजफ्फरपुर नाउ की उनसे सहमति आवश्यक नहीं है)

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