CAT: बिहार के मयंक को मिला 100 परसेंटाइल

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सच्ची लगन और माता-पिता के सहयोग से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। इसको सच साबित किया है वैशाली जिले पातेपुर प्रखंड के भगवानपुर खजुरी के रहने वाले मयंक ने। मयंक ने कैट की परीक्षा में 100 परसेंटाइल लाकर न केवल अपने माता पिता का बल्कि वैशाली जिले का भी नाम रोशन किया है। मयंक को बिहार में पहला स्थान मिला है।

मयंक ने जागरण से बातचीत में बताया कि उनके इस मुकाम तक पहुंचने में शिक्षक माता-पिता का काफी सहयोग रहा। यह भी बताया कि माता माधुरी कुमारी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हाजीपुर में शिक्षिका हैं। वहीं पिता काशी प्रसाद महुआ में शिक्षक हैं। माता-पिता दोनों हाजीपुर के यूसुफपुर मोहल्ले में रहते हैं। मयंक दो भाई हैं। छोटा भाई अभिषेक कुमार भी कोलकाता से इंजीनियङ्क्षरग कर रहा है।

मालूम हो कि मयंक ने 2012 में हाजीपुर के इंडियन पब्लिक स्कूल से दसवीं की परीक्षा में 10 सीजीपीए हासिल किया था। इसके बाद इंटर की पढ़ाई के लिए वे दिल्ली चले गए। वहां उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री सीनियर सेकेन्ड्री स्कूल से गणित से इंटर की परीक्षा दी और 87 प्रतिशत अंक हासिल किया। इंटर के ही साथ-साथ उन्होंने आइआइटी की परीक्षा में भी सफलता हासिल की। आइआइटी मुंबई में मयंक सिविल इंजीनियङ्क्षरग में फाइनल इयर में हैं।

मयंक के पिता श्री प्रसाद ने भी बताया कि मयंक शुरू से ही होनहार रहा है। यह पूछे जाने पर कि आइआइटी के बाद मैनेजमेंट की ओर कैसे मुड़े तो उन्होंने बताया कि मैनेजमेंट में टीम को लीड करना सिखाया जाता है। आइआइटी के बाद आइआइएम करना सोने पर सुहागा जैसा है। इसी चीज ने उन्हें मैनेजमेंट की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया। आइआइटी में जाने के बाद भी वह प्रतिदिन दो घंटा मैनेजमेंट की तैयारी के लिए निकाल लेते थे।

Cambridge Montessori, School, Muzaffarpur

मयंक की सफलता पर स्कूल प्रबंधन से जताई खुशी

इंडियन पब्लिक स्कूल के छात्र मयंक के द्वारा आइआइटी के बाद मैनेजमेंट में 100 परसेंटाइल लाने पर स्कूल प्रबंधन ने काफी खुशी जताई। स्कूल के डायरेक्टर विनायक ने बताया कि शुरू से ही बच्चों को इस तरह से तैयार किया जाता है कि वे आगे चलकर काफी अच्छा करें।

मयंक की सफलता पर स्कूल में खुशी का माहौल है। इनसे बच्चे सीख लेकर आगे अच्छा करेंगे। स्कूल के प्राचार्य अनिल प्रकाश के अलावा आरएन ङ्क्षसह, राकेश समेत कई शिक्षक-शिक्षिकाओं ने खुशी जाहिर की और कहा कि यहां पढऩे वाले बच्चे जब अच्छा करते हैं तो हमलोगों को अपने आप पर गर्व महसूस होता है।

Source : Dainik Jagran

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