114 लोग भर्ती, नवजात सहित दो की मौत

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ठंड का असर बच्चों और बुजुर्गो पर गहराता जा रहा है। विभिन्न सरकारी व निजी अस्पतालों में सैकड़ों बच्चे भर्ती हो रहे हैं। सोमवार को केजरीवाल में साहेबगंज मधुबन निवासी देवेंद्र राय के नवजात पुत्र की मौत हो गई। वहीं एसकेएमसीएच में सीतामढ़ी रीगा की विधवा राजो देवी की मौत पहुंचने के साथ ही हो गई। महिला की मौत का कारण चिकित्सकों ने सीवीए (सेरीब्रो भसकुलर एक्सीडेंट)से ग्रसित होना बताया। केजरीवाल में 55 नए बच्चे भर्ती हुए। चिकित्सक के अनुसार इसमें कोल्ड डायरिया के 20 और निमोनिया के 35 बच्चे शामिल हैं। वहां145 बच्चों का इलाज पहले से चल रहा है। सदर अस्पताल में 30 बच्चों के पुर्जे कटे। वहीं एसकेएमसीएच में कोल्ड के शिकार 29 लोगों की जांच कर भर्ती किए गए।

Cambridge Montessori, School, Muzaffarpur

ठंड से बढ़ने लगे सीएवी के मरीज : एसकेएमसीएच में सोमवार को कुल 1137 मरीजों का इलाज हुआ। इसमें ठंड जनित विभिन्न बीमारी के शिकार करीब 600 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे। मालूम हो कि ठंड के बढ़ने से आम लोगों के साथ बच्चों की परेशानी बढ़ने लगी है। रक्तचाप व मधुमेह से ग्रसित सर्वाधिक मरीज सीवीए (सेरीब्रो भसकुलर एक्सीडेंट) यानी पक्षाघात के शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी से ग्रसित विगत दो दिनों में नौ मरीज इलाज को पहुंचे। इनमें दो की मौत हो चुकी है। वहीं अन्य मरीजों का इलाज चल रहा है।

एसकेएमसीएच के वरिष्ठ चिकित्सक एसएम मिश्रा और डॉ. सतीश कुमार सिंह ने बताया कि यह बीमारी ठंड के मौसम में अत्यधिक होती है। जिस व्यक्ति को रक्तचाप (ब्लड प्रेसर) की शिकायत रहती है और नियमित दवा का सेवन नहीं करते हैं, वें इस बीमारी के गिरफ्त में सर्वाधिक आते हैं।

क्या है सीवीए : सेरीब्रो भसकुलर एक्सीडेंट यानी पक्षाघात। इस बीमारी में शरीर का एक भाग काम करना बंद कर देता है। इसमें मस्तिष्क के अंदर की धमनी फट जाती है और रक्तस्राव होने लगता है। इससे लोगों के शरीर का एक भाग लकवा ग्रस्त हो जाता है। इसमें कभी-कभी लोग बेहोश भी हो जाते हैं, जिससे जान जाने की संभावना रहती है।

क्या है बचाव : इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को सर्वप्रथम ठंड से बचना चाहिए। साथ ही रक्तचाप के मरीजों को नियमित जांच व चिकित्सीय परामर्श के तहत दवा का सेवन करते रहना चाहिए।

सदर अस्पताल में बच्चा वार्ड खाली, प्राइवेट में जगह नहीं :

एक ओर प्राइवेट अस्पतालों में बच्चों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं है, वहीं सदर अस्पताल में खाली पड़ा बच्चा वार्ड व्यवस्था की पोल खोल रहा है। बात दें कि साल के अंतिम महीने में डीएम ने औचक जांच में इस पर आपत्ति जताई थी। डीएम धर्मेंद्र सिंह ने सीएस से कहा था कि महिला वार्ड में बच्चा वार्ड भी है। एक भी बच्चे को वहां भर्ती नहीं किया जा रहा है। डीएम के कहने का भी कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है।

Source : Dainik Jagran

 

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