मुजफ्फरपुर, 5 फरवरी 2026 मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने पुलिस महकमे में अनुशासन और जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई की है। एसएसपी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण और वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर तुर्की और पारू के थानाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इन दोनों अधिकारियों पर कर्तव्य में लापरवाही, अकर्मण्यता और संदिग्ध आचरण के गंभीर आरोप लगे हैं।

तुर्की थानाध्यक्ष की हिरासत और वारंट में लापरवाही
एसएसपी के औचक निरीक्षण और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (पश्चिमी-2) की जांच में तुर्की थाना की गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। थानाध्यक्ष संदीप कुमार महतो पर आरोप है कि उन्होंने बिना किसी औपचारिक शिकायत या परिवाद के व्यक्ति को थाने में बंद रखा। इसके अलावा, माननीय न्यायालय द्वारा जारी किए गए वारंट और कुर्की के आदेशों को लंबे समय तक लंबित रखने की पुष्टि हुई है।

ग्रामीण पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि शराबबंदी कानून से संबंधित जब्त किए गए साक्ष्यों (प्रदर्शों) की सुरक्षा में भी घोर लापरवाही बरती गई। इन आरोपों के मद्देनजर संदीप कुमार महतो को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर भेज दिया गया है।

पारू थानाध्यक्ष की हत्या के मामले में शिथिलता
दूसरी बड़ी कार्रवाई पारू थाने में हुई है। पुलिस महानिदेशक (DGP) के निर्देश पर जब एसएसपी ने पारू थाना कांड संख्या 334/25 (हत्या का मामला) की समीक्षा की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। हत्या जैसे संवेदनशील मामले में 7 महीने बीत जाने के बाद भी अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी और न ही उनके खिलाफ वारंट प्राप्त करने की कोशिश की गई।

जांच में यह भी पाया गया कि थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने घायल स्वतंत्र गवाह का बयान तक दर्ज नहीं किया था। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए एसएसपी ने पु०अ०नि० चंदन कुमार को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

एसएसपी की इस कड़ी कार्रवाई ने जिले के अन्य पुलिस अधिकारियों के बीच एक स्पष्ट संदेश दिया है कि कार्यों में शिथिलता और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिले में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार करने की सख्त चेतावनी दी गई है।

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