स्मार्ट सिटी रैकिंग : मुजफ्फरपुर शहर फिर साबित हुआ फिसड्डी, देश के सौ सिटी में 79वां स्थान

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स्मार्ट सिटी परियोजना के कार्यान्वयन के आधार पर हुई रैंकिंग में मुजफ्फरपुर शहर एक बार फिर फिसड्डी साबित हुआ। मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एवं अर्बन अफेयर मिनिस्ट्री ने इसकी घोषणा की। देश के सौ स्मार्ट शहरों में मुजफ्फरपुर 79 वें स्थान पर रहा। राज्य के चारों स्मार्ट सिटी की रैंकिंग में भी मुजफ्फरपुर अंतिम पायदान पर रहा। शहर को100 अंकों में से सिर्फ 11.576 अंक प्राप्त हुए।

जबकि 95.2 अंक लेकर भागलपुर देश में 29 वें एवं राज्य में पहले स्थान पर रहा। जबकि 93.29 अंक लेकर पटना देश में 30 वें एवं राज्य में दूसरे तथा बिहारशरीफ 32.07 अंक लेकर देश में 61 वें एवं राज्य में तीसरे स्थान पर रहा। रैंकिंग में पिछडऩे से शहरवासियों में निराशा है। वहीं मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी कंपनी एवं कंसल्टेंट की कार्यप्रणाली भी कठघरे में आ गई है।

अक्षमता से जमीन पर नहीं उतर पाई योजनाएं 

रैंकिंग में शहर की पिछडऩे के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी के कंसल्टेंट की अक्षमता को कारण बताया जा रहा है। स्मार्ट सिटी परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी कंपनी लिमिटेड कोलकाता की श्रेयी इंफ्रास्ट्रक्चर फिनांस लिमिटेड को प्रोजेक्ट मैनेजर कंसल्टेंट के रूप में एक साल पूर्व बहाल किया। एजेंसी पर योजनाओं का डीपीआर बनाने से लेकर जमीन पर उतारने तक की जिम्मेवारी थी। एजेंसी ने ढाई अरब की ग्यारह योजनाओं का डीपीआर तैयार किया, लेकिन उनमें से एक भी जमीन पर नहीं उतर पाई। एक भी योजना को अबतक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

अपना कार्यालय तक नहीं खोल पाई कंपनी, नहीं हुई बहाली 

स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को पूरा करने की बात तो दूर एक साल में शहर में स्मार्ट सिटी कंपनी का कार्यालय तक नहीं खुल पाया। कंपनी संयुक्त भवन स्थित एक छोटे से कमरे में कैंप कार्यालय में काम कर रही है। इतना ही नहीं कंपनी ने काम के लिए कर्मचारियों की बहाली भी नहीं कर पाई है।

इस आधार पर किया गया रैकिंग

शहरी मंत्रालय द्वारा देश के सौ शहरों में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन के आधार पर रैकिंग जारी की। इसमें जारी किए टेंडर, वर्क आर्डर और पूरे हुए विकास कार्यों के लिए अलग-अलग अंक निर्धारित किए गए थे। जारी फंड के उपयोग के लिए भी अंक निर्धारित किए गए थे। तय मापदंड को पालन करने में शहर पूरी तरह से पिछड़ गया।

मैनेजिंग डायरेक्टर सह नगर आयुक्त संजय दुबे ने कहा कि कंसल्टेंट के कार्यों की धीमी गति के कारण योजनाएं अबतक जमीन पर उतर नहीं पाई। अब योजनाओं के क्रियान्वयन की गति को तेज किया गया है। ढाई अबर की योजनाएं जमीन पर उतरने को तैयार है।

Input : Dainik Jagran