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बारिश की मार से बिहार के किसान बेहाल

Ravi Pratap

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किसानों के जीने का सहारा उसके खेतों का फ़सल ही होता है और जब फ़सल ही बर्बाद हो जाये इससे बड़ी त्रास्दी किसानों के लिये क्या हो सकती है.

खेतों में किसान फ़सल के साथ कई अरमानों की बीज बोते है, किसी को बेटी का लग्न कराना होता है तो उसी पैसे से किसी की बीमारी की इलाज़ की आस होती है, लेकिन इस बार बेमौसम बारिश और ओले के वज़ह से सब धरा का धरा रह गया और मौसम के मार से किसान माथा पीट रहे है, किसी के पूछने पर फफक कर रोने लगते है कि कहा से इंतज़ाम हो पायेगा पैसो का.

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दरअसल फ़ागुन – चैत्र में बेमौसम बारिश ने फ़सल के साथ साथ कई अरमानों को भी बर्बाद कर दिया है, लोग बारिश की बूंदे परते ही रोने लगने लगते है की आये हो दादा !! इस गरीब के अरमानों का आसरा क्या बनेगा, जिस फ़सल को बेच कर साल भर के कामों का इंताजाम करना था वो तो बारिश की भेंट चढ़ गयी, सच में मौसम के इस मार ने किसानों के परिवार के दो वक्त की रोटी पर आफ़त कर दिया, कभी नीलगाय फ़सल को बर्बाद कर देते है तो कभी बेमौसम बारिश इस बेरहम दुनिया मे किसानों को भी बहुत झेलना पड़ता है..

खैर ! किसानों के लिये विपदा है और विपदा में किसानों का सहारा बस सरकार बन सकती है, सरकार को सही वक्त पर किसानों का सूद लेना चाहिए, उन्हें ढाढस देना चाहिए और संकट की इस विषम परिस्थितियों में हर सम्भव मदद देनी चाहिए, किसी को बेटी की शादी की फिक्र सता रही तो किसी को इलाज कराना है, जो किसान अन्नदाता कहलाता है उसके घर में ही अनाज का अकाल पड़ गया कुदरत ने सब तबाह कर दिया

Team | Abhisek Ranjan

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घर का बिल जमा करने के लिए आम जनता की लाइन में खड़ा होते थे रक्षामंत्री रहे दिवंगत मनोहर पर्रिकर

Ravi Pratap

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गोवा के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षामंत्री रहे दिवंगत मनोहर पर्रिकर की आज पुण्यतिथि है। अपनी सादगी और विनम्रता के कारण चर्चित रहे पर्रिकर को राजनीति की दुनिया का बड़ा चेहरा माना जाता था। 17 मार्च 2019 में 63 साल की आयु में पैंक्रिएटिक कैंसर के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी। ये मनोहर पर्रिकर की सादगी और ईमानदारी ही थी कि विपक्षी पार्टियां भी उनका सम्मान करती थीं। उनकी सादगी के कुछ किस्से पढ़कर आप उनकी शख्सियत से परिचित हो सकते हैं।

16 से 18 घंटे तक करते थे काम

मनोहर पर्रिकर अपने राजनीतिक जीवन में काफी सफल थे। बताया जाता है कि वे 16 से 18 घंटे तक काम में व्यस्त रहते थे। उन्होंने अपने जीवन में काम को हमेशा प्राथमिकता दी। चार बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे पर्रिकर को वहां की जनता बेहद पसंद करती थी। कई बार वो स्थानीय बाजार में खरीदारी करते भी नजर आते थे। बड़े पदों पर रहते हुए भी बिजनेस क्लास की जगह इकॉनोमी क्लास में यात्रा करना पसंद करते थे। उन्हें आम लोगों की तरह अपने घरेलू बिल को जमा करने के लिए लाइन में खड़े देखना आम था। बताया जाता है कि वे इन बिलों का भुगतान भी अपनी जेब से करते थे।

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सरकारी गाड़ी छोड़ चलाई स्कूटर

चार बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे मनोहर पर्रिकर की सादगी को लेकर कई बातें कही जाती हैं। वह अक्सर अपनी स्कूटर से विधानसभा जाया करते थे। बताते हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सुरक्षा कारणों और प्रोटोकॉल के चलते उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं मिली। परिकर ऑटो से चलना भी पसंद करते थे। बताते हैं कि वह हवाई यात्रा भी इकोनॉमी क्लास में करना पसंद करते थे और महंगे रेस्तरां में जाना नापसंद था। सादगी पसंद जीवन के चलते उन्होंने अपने दोनों बेटों को भी कभी राजनीति की चकाचौंध में आने के लिए प्रेरित नहीं किया। उनके बेटे इंजीनियर और बिजनेसमैन हैं। उनका पूरा परिवार जनता के बीच अपनी सादगी के चलते लोकप्रिय है।

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Chanakya Niti: ऐसे करें सच्चे मित्र की पहचान, नहीं मिलेगा जीवन में कभी धोखा

Md Sameer Hussain

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आचार्य चाणक्य ने मनुष्य के जीवन के रहस्यों को सुलझाने के लिए नीतियां बनाईं. इन नीतियों के बारे में कहा जाता है कि जिसने इन नीतियों का पालन किया उसकी सफलता निश्चित है. आचार्य चाणक्य (Chanakya) ने धर्म, न्याय, शांति, सुरक्षा और राजनीति समेत कई विषयों पर नीतियां निर्धारित की हैं. आइए जानते हैं चाणक्य नीति (Chanakya Niti) के मुताबिक सच्चे मित्र की पहचान कैसे हो…

चाणक्य नीति (Chankya Niti)

1. भूलकर भी ऐसे मित्र का साथ नहीं देना चाहिए जो सामने से आपकी प्रशंसा करता है, मधुर व्यवहार करता है और आपके मन को खुश करने वाली बातें करता है, लेकिन मौका देखकर आपके पीछे बुराइयां करता है और आपके काम बिगाड़ देता है. ऐसे मित्र दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं. इसलिए ऐसे मित्रों से दूर रहना चाहिए.

2. जिसे आप सबसे अच्छा मित्र मानते हैं उस पर भी आंख बंद करके विश्वास नहीं करना चाहिए. क्योंकि अगर आप अपने पक्के दोस्त के सामने अपने सभी सीक्रेट चीजों का खुलासा कर देते हैं तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि रिश्तों में खटास आने पर या मित्रता खत्म होने पर आपके सभी सीक्रेट्स को सबसे सामने रख सकता है.

3. दोस्ती हमेशा बराबर वालों से करनी चाहिए. अगर आप अपने बराबर वालों से दोस्ती नहीं करते हैं और अपने से नीचे या ऊपर के स्तर के लोगों के साथ दोस्ती करते हैं तो इस रिश्ते में दरार के आने की संभावना ज्यादा होती है. निर्धन का कोई मित्र नहीं होता जबकि धनवान व्यक्ति के आस पास मित्र के रूप में लोगों की भरमार होती है. यह वह स्थिति होती है जब धनवान यह समझ कर खुश होता है कि उसके काफी मित्र हैं और उसके दोस्त इसलिए खुश होते हैं कि धनवान उनके काम में मदद करेगा. ऐसें लोगों की पहचान करें.

4. दुख के समय में जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से आपका साथ दे वही आपका सच्चा मित्र हो सकता है. अगर कोई मित्र संकट में, बीमारी में, दुश्मन के हमला करने पर, राज दरबार में और शमशान में आपके साथ खड़ा रहता है तो वो आपका सच्चा मित्र है. यही वो समय होते हैं जब आप अपनी मित्रता को परखते हैं.

5. विपरीत स्वभाव वाले दो व्यक्तियों में कभी भी आप स में दोस्ती नहीं हो सकती. अगर ऐसा होता है तो वह रिश्ता दिखावे का होता है. क्योंकि सांप और नेवले की, बकरी और बाघ की, हाथी और चींटी की व शेरनी और कुत्ते की कभी दोस्ती नहीं हो सकती. इसी प्रकार सज्जन और दुर्जन में भी दोस्ती असंभव है.

6. अपने संगत का खयाल रखना आवश्यक है. क्योंकि संगत का असर अवश्य होता है फिर चाहे वो अच्छा हो या फिर बुरा. धीरे-धीरे ही सही लेकिन ज्यादा समय उनके साथ बिताने पर आपके दोस्तों वाले गुण आपके अंदर आने लगते हैं. इसलिए दोस्ती करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि आपके दोस्तों की संगत आपके अनुकूल हो.

7. स्वार्थ के बल पर की हुई दोस्ती, हमेशा दुश्मनी का कारण बन जाती है. इसलिए समझदार व्यक्ति को चाहिए कि वह हमेशा मित्रों के चयन से पहले उसे जांच परख ले तथा खूब सोच विचार कर ले क्योंकि एक बार यदि दोस्ती गाढ़ी हो गई तो उसके बाद उसके परिणाम और दुष्परिणाम सामने आने लगते हैं.

8. वाकई में अगर आपको मित्रता निभानी है तो ऐसी निभाई जाए जैसे कृष्ण और सुदामा की, कृष्ण और अर्जुन की, विभीषण और राम की बताई जाती है. ऐसे में मित्र बनाते समय उसके गुण और दोष को जान लें. वो ऐसा हो जो आपके स्वभाव से मेल खाए, संकट काल में, बिमारी में, अकाल में और कष्ट में आपके कदम से कदम मिलाकर चले.

Input : Aaj Tak

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ये रोज रोज बंद क्यों ?

Muzaffarpur Now

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दो दिन पहले वामपंथियों नें बंद का ऐलान किया। सड़क जाम, आ’गजनी, हं’गामा, रेल परिचालन बाधित। क्या मिला ? अरे एक बार निर्जला अनशन करके देखो पुरा देश देखेगा कितने प्र’दर्शनकारी संविधान की तथाकथित रक्षा के लिए खड़े होते हैं।

क्या खेल चल रहा है ? दो दिन पहले वामपंथी दलों ने बंद किया तो माननीय श्री तेजस्वी यादव जी ने उसका समर्थन किया किंतु इसमें शामिल होने की घोषणा नहीं की शायद ऐसा करके तेजस्वी जी उस भीड़ मे अपनी पहचान खो देते, शायद वो हिरो नहीं बन पाते। हां, आजकल देश में प्रदर्शन करनें वाले, पब्लिक प्रोपर्टी को नष्ट करने वाले, पुलिस पर पथराव करनेवाले ही तथाकथित उदारवादियों के द्वारा हिरो घोषित कर दिए जाते हैं।

खैर ये बात और है कि कुछ लोग प्याज के लिए बसों में आग लगाते हैं, कुछ लोग ठंड की वजह से, कुछ लोग नागरिकता संसोधन कानून के विरोध के लिए, कुछ लोगो को मालूम भी नहीं, खैर कोई बात नहीं प्रदर्शन करना इनका हक है और फैशन भी। राजनीति की गरम गरम रोटियां सेंकीं जा रही है जो लगातार एक खास वर्ग की थाली में परोस दी जाती है।

एक दल जिसनें दो दिन पहले ही बंद की आड़ लेकर अपनी जनता की पब्लिक प्रोपर्टी को बरबाद किया वो आज राजद के बंद पर कहते हैं सड़क जाम करनें से लोगों को परेशानी हो रही है। उनकी प्रदर्शन के दौरान उन्होंने शायद हेलीकॉप्टर से लोगों को एक जगह से दूसरे जगह भेजा था तब कोई परेशानी ही नहीं हुई। दिल्ली जल रहा है, यूपी जल रहा है, बिहार जल रहा है। जला कौन रहा है ? बड़ा सवाल ये हैं, क्यों जला रहा है ? सोचिए और फैसला किजिए।

कुछ सवालों के साथ इस आर्टिकल में आपको छोड़े जाता हूं।
१. क्या कभी पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसी प्रदर्शन की गई ?
२. क्या जलसंरक्षण के लिए आपने पुरे देश में प्रदर्शन की ?
३. क्या आपने कभी लोगों को जागरूक करने के लिए विशाल जनसभा का आयोजन किया ?

शायद इसलिए नहीं की होगी क्योंकि इसमें मजा नहीं आता होगा, और राजनैतिक नफ़ा भी नहीं।

नोट : उपयुक्त आर्टिकल लेखक के निजी विचार है जिसका मुजफ्फरपुर नाउ से कोई संबंध नहीं है। नाम न छापनें के शर्त पर यह आर्टिकल प्रकाशित की गई है।

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