NASA ने भी माना इसरो का लोहा, कहा- चंद्रयान 2 मिशन ने हमें प्रेरित किया है
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NASA ने भी माना इसरो का लोहा, कहा- चंद्रयान 2 मिशन ने हमें प्रेरित किया है

Santosh Chaudhary

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इसरो के अतंरिक्ष मिशन चंद्रयान 2 की सराहना की है। नासा की जारी बयान में कहा कि अंतरिक्ष मिशन कठिन होते है। हम इसरो के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उनके चंद्रयान 2 मिशन को उतारने के प्रयास की सराहना करते हैं। आपने हमें अपनी यात्रा से प्रेरित किया है और हम आपके साथ अपने सौर मंडल के बारे जानने के लिए भविष्य के अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

वहीं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)  स्पेस एजेंसी की ओर से  कहा गया कि चंद्रयान 2 से संपर्क टूटने पर हम अपनी ओर से इसरो का पूरा सहयोग करेंगे। साथ ही भारत के इस कदम ने साबित किया है कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत बड़ी भूमिका निभाएगा और नए आयाम स्थापित करेगा।

आपको बता दें कि चांद पर नीचे की तरफ आते समय 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर जमीनी स्टेशन से इसका संपर्क टूट गया। ‘विक्रम ने ‘रफ ब्रेकिंग और ‘फाइन ब्रेकिंग चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया, लेकिन ‘सॉफ्ट लैंडिंग से पहले इसका संपर्क धरती पर मौजूद स्टेशन से टूट गया। इसके साथ ही वैज्ञानिकों और देश के लोगों के चेहरे पर निराशा की लकीरें छा गईं। इसरो अध्यक्ष के. सिवन इस दौरान कुछ वैज्ञानिकों से गहन चर्चा करते दिखे। उन्होंने घोषणा की कि ‘विक्रम लैंडर को चांद की सतह की तरफ लाने की प्रक्रिया योजना के अनुरूप और सामान्य देखी गई, लेकिन जब यह 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था तो तभी इसका जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया। डेटा का अध्ययन किया जा रहा है।

Input : Hindustan

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लिंचिंग पर पीएम को पत्र लिखने वालों के खिलाफ आखिर मुजफ्फरपुर में ही केस क्यों ?

Ravi Pratap

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मॉब लिंचिंग के विरोध में इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले देश की तमाम मशहूर शख्सियतों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश जिला अदालत ने दिया है.मुजफ्फरपुर के स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा ने दो महीने पहले मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी सीजेएम सूर्यकांत तिवारी की कोर्ट में अर्जी दी थी कि इन लोगों ने ऐसा करके देश के प्रधानमंत्री की छवि धूमिल की है जो कि राजद्रोह जैसा जुर्म है, इसलिए इनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए.

 

सीजेएम ने ओझा की याचिका पिछले महीने बीस अगस्त को स्वीकार कर ली थी जिसके इसके बाद गुरुवार यानी तीन अक्टूबर को सदर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई. एफआईआर में ओझा ने आरोप लगाया है कि देश की इन जानी-मानी हस्तियों ने देश और प्रधानमंत्री मोदी की छवि को कथित तौर पर धूमिल किया. याचिकाकर्ता ने इन सभी लोगों पर अलगाववादी प्रवृत्ति का समर्थन करने का भी आरोप लगाया.

23 जुलाई को प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े देश के तमाम लोगों ने मांग की थी कि मॉब लिंचिंग जैसे मामलों में जल्द से जल्द और सख्त सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए. पत्र लिखने वालों में इतिहासकार रामचंद्र गुहा, फिल्मकार मणि रत्नम, अपर्णा सेन, गायिका शुभा मुद्गल, अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा, फिल्मकार श्याम बेनेगल, अनुराग कश्यप सहित विभिन्न क्षेत्रों की कम से कम 49 हस्तियां शामिल थीं.

पुलिस के मुताबिक इस मामले में भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है इसमें राजद्रोह, उपद्रव करने, शांति भंग करने के इरादे से धार्मिक भावनाओं को आहत करने से संबंधित धाराएं लगाई गईं हैं. अब इन लोगों को या तो अग्रिम जमानत लेनी होगी या फिर गिरफ्तार होने के लिए तैयार रहना होगा.

क्या है बिहार कनेक्शन

जिन हस्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है उनमें से शायद ही किसी का संबंध बिहार से हो. फिर भी यह मामला बिहार के मुजफ्फरपुर में क्यों दर्ज हुआ, यह सवाल उठना लाजिमी है. हालांकि ऐसे पहले भी कई मामले सामने आते रहे हैं जिनमें वादी का सीधे तौर पर किसी मामले से संबंध न हो और उस जगह का भी संबंध न हो जहां शिकायत की जा रही हो, फिर भी कई बार अदालतों के आदेश पर या सीधे ही पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दी जाती है.

सुप्रीम कोर्ट में वकील दुष्यंत पाराशर कहते हैं, “यदि कोई मामला जनहित का हो या फिर देश और समाज के बड़े हिस्से के हितों से सरोकार रखता हो तो उन्हें कोई भी और किसी भी जगह दर्ज करा सकता है. ऐसे में कोर्ट खुद संज्ञान लेती है कि मामले में कितनी गंभीरता है. ऐसे मामलों में न्यायाधिकार क्षेत्र नहीं देखा जाता है.”

दुष्यंत पाराशर कहते हैं कि किसी व्यक्ति के बयान से यदि किसी की भावना आहत होती है तो जरूरी नहीं कि उस व्यक्ति ने जहां बयान दिया है या वो जहां से ताल्लुक रखता है, वहीं केस दर्ज कराया जाए. पीड़ित व्यक्ति या आहत व्यक्ति कहीं भी केस दर्ज करा सकता है. उनके मुताबिक, ये विवेचना और फिर कोर्ट में सुनवाई के दौरान पता चल जाएगा कि मामले में कितना दम है या फिर जिस व्यक्ति की भावना आहत हुई है क्या वह सचमुच ऐसा मामला है जो व्यापक स्तर पर जनसमुदाय की भावनाओं से सरोकार रखता हो.

हालांकि कुछ जानकारों का ये भी कहना है कि ऐसे मामलों में जो प्रार्थना पत्र दिया जाता है उसमें इस बात को स्पष्ट करना जरूरी होता है कि क्या यह मामला सच में जनहित या देशहित से जुड़ा है और इसमें न्यायाधिकार क्षेत्र का मुद्दा नहीं आएगा. उत्तर प्रदेश में अभियोजन विभाग में अतिरिक्त निदेशक रह चुके हरिहर पांडेय कहते हैं, “सामान्य मामलों में तो इस बात का ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि मामला किस न्यायाधिकार क्षेत्र का है लेकिन कुछ मामलों में इसका विस्तार भी होता है और राजद्रोह जैसे मामलों में इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता. लेकिन यह भी सच है कि इसमें इस बात को पूरे प्रमाणों और दस्तावेजों के साथ बताना भी पड़ेगा कि ये कैसे राजद्रोह है.”

केस दर्ज करने के कैसे कैसे आधार

वरिष्ठ वकीलों और कानूनी जानकारों के मुताबिक, ऐसे मामलों को कहीं भी दर्ज कराने में कोई दिक्कत भले ही न हो लेकिन इस तरह के मामलों में नोटिस जारी करके या फिर एफआईआर के आदेश देने के पीछे कई बार जजों के ‘चर्चा में आने की ख्वाहिश’ भी रहती है.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील डॉक्टर सुरत सिंह कहते हैं कि जनहित याचिकाओं और न्यायिक सक्रियता के मामलों में अदालतों की आलोचना इसीलिए हुई क्योंकि कई ऐसे मामले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्राथमिकता के तौर पर सुने जाने लगे, जो कि जनहित के नाम पर तो लाए गए थे लेकिन उससे भी व्यापक जनहित के मामलों को इनकी तुलना में नजरअंदाज कर दिया गया. ऐसा सिर्फ इसलिए कि उन मामलों की चर्चा होती थी और अखबारों में खबरें छपती थीं.

तीन साल पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के एक जज को इसलिए निलंबित कर दिया था क्योंकि वो आए दिन किसी न किसी मामले में चर्चित राजनीतिक हस्तियों या फिर ऐसे ही लोगों को नोटिस जारी करके कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश देते थे. साल 2016 में महोबा के एक सिविल जज अंकित गोयल को इसलिए निलंबित कर दिया गया था क्योंकि वह न्यायिक कार्यों में अविवेकपूर्ण फैसले लेते थे. उनके खिलाफ यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस के आदेश पर की गई थी.

दरअसल अंकित गोयल ने सितंबर 2015 में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह के खिलाफ नोटिस जारी कर उन्हें हाजिर होने को कहा था. इसके अलावा उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को भी किसी मामले में खुद ही संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ धारा 124A और आईपीसी की धारा 505 के तहत मामला दर्ज किया था. उन्होंने तत्कालीन मंत्री आजम खान को भी किसी मामले में हाजिर होने का निर्देश दिया था.

रिपोर्ट : निधि चोपड़ा

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प्लास्टिक की जगह अब बांस की बोतल में पीएं पानी, गडकरी आज करेंगे लॉन्च

Santosh Chaudhary

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2 अक्टूबर से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्र’तिबंध लगाने की तैयारी में है. इसीलिए सरकार एक नया विकल्प लाई है. इसके विकल्प के तौर पर एमएसएमई मंत्रालय (MSME) के अधीन कार्यरत खादी ग्रामोद्योग आयोग ने बांस की बोतल का निर्माण किया है, जो प्लास्टिक बोतल की जगह इस्तेमाल होगी. केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने बांस की इस बोतल को एक कार्यक्रम के दौरान लॉन्च कर दिया है.

क्या होगी इस बोतल की कीमत- इस बांस की बोतल की क्षमता कम से कम 750 एमएल की होगी और इसकी कीमत 300 रुपये से शुरू होगी. यह बोतलें पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ टिकाऊ भी हैं. दो अक्तूबर से खादी स्टोर में इस बोतल की बिक्री की शुरुआत होगी.

2 अक्टूबर है और इस दिन गांधी जयंती के अवसर पर सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर सरकार पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रही है.

हालांकि केवीआईसी द्वारा पहले ही प्लास्टिक के गिलास की जगह मिट्टी के कुल्हड़ का निर्माण शुरू किया जा चुका है. इस प्रक्रिया के तहत अभी तक मिट्टी के एक करोड़ कुल्हड़ बनाए जा चुके हैं.

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ये चीजें भी की गई लॉन्च

केवीआईसी ने वित्त वर्ष के अंत तक एक करोड़ की क्षमता को तीन करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. माना जा रहा है कि इससे रोजगार भी पैदी होगा.

गडकरी बांस की बोतल के अलावा खादी के अन्य प्रोडक्ट्स भी लॉन्च किया है. नितिन गडकरी ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर 2 अक्टूबर से खादी ग्रामोद्योग उत्पादों पर विशेष छूट दिए जाने की घोषणा की और कई नए उत्पादों का उद्घाटन किया.

इसके साथ सोलर वस्त्र(सोलर चरखा से बना), गोबर से बना साबुन और शैम्पू, कच्ची घानी सरसो तेल सहित कई उत्पाद लांच किया गया है.

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न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

Santosh Chaudhary

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बिहार में तीन दिनों से जारी भारी बारिश ने नीतीश सरकार की विकास के दावों की पोल खोल कर रख दी है. राजधानी पटना बाढ़ और बारिश के पानी में पूरी तरह डूब चुका है जबकि पूर्वी बिहार के ज्यादातर हिस्सों में भी बारिश के रौद्र रूप ने लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. राज्य में भारी बारिश और बाढ़ से अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है. पटना में आई बाढ़ ने आम आदमी तो क्या सरकार के मंत्रियों को भी नहीं बख्शा है और हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि डिप्टी सीएम सुशील मोदी का भी एनडीआरएफ को रेस्क्यू करना पड़ा. सुशील मोदी के सरकारी आवास में भी बाढ़ का पानी घुस चुका है. सुशील मोदी रेस्क्यू के बाद अपने सामान के साथ एक फ्लाईओवर पर खड़े नजर आए जिसके बाद उनकी यह तस्वीर वायरल हो गई.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

 

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

सारण से बीजेपी सांसद और पूर्व मंत्री रह चुके राजीव प्रताप रूडी के भी आवास में बाढ़ का पानी भर गया है. अगर आप इन दिनों उनके घर जाना चाहेंगे तो पैदल या गाड़ी से नहीं बल्कि नाव से जाना होगा. पूरा पटना जलमग्न हो गया है.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

राजधानी पटना में आई बरसाती बाढ़ से आम और खास सब डूबे हुए है. कई इलाकों में मकानों की पहली मंजिल आधे से ज्यादा डूब चुकी है. इसी बीच पटना के कदम कुआं इलाके से हाईकोर्ट के जज साहब और उनके परिवार का रेस्क्यू करना पड़ा.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

बिहार की स्वरकोकिला शारदा सिन्हा का भी पटना के राजेन्द्रनगर स्थित घर में पानी घुस गया जिसके बाद उन्हें एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित जगह पहुंचाया.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

पटना साहिब सीट से बीजेपी के सांसद और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राजधानी पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और उन्होंने बताया कि इससे पहले उन्होंने ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी थी.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

गली, मोहल्ले, स्कूल-कॉलेज, सड़क, बाजार से शोरूम तक के अंदर पानी घुस गया है. पटना में जलजमाव से प्रभवित लोगों की मदद के लिए बिहार सरकार ने गृह मंत्रालय से 2 हेलिकॉप्टर की मांग की है. साथ ही कोल इंडिया से जल जमाव को निकालने के लिए पम्प की भी मांग की है.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के मद्देनजर रविवार को फिर बैठक की और पटना में जलजमाव वाले इलाकों का दौरा की हालात का जायजा लिया. बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के दोनों किनारे स्थित 12 जिलों में लोगों के लिए दिक्कत की स्थिति पैदा हो गई है.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

पानी में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने की कोशिश की जा रही है. पानी का कर्फ्यू लागू है और सहमा हुआ सा शहर अपनी बेबसी पर रोता नजर आ रहा है. बिहार में बारिश और बाढ़ से बिगड़े हालात को देखते हुए स्कूलों और कॉलेजों की दो दिन की छुट्टी कर दी गई है. पटना दरिया हो चुका है.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

मूसलाधार बारिश के मद्देनजर रविवार को फिर बैठक की और पटना में जलजमाव वाले इलाकों का दौरा की हालात का जायजा लिया. बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के दोनों किनारे स्थित 12 जिलों में लोगों के लिए दिक्कत की स्थिति पैदा हो गई है.

न कोई राजा-न रंक..बिहार बाढ़ की इन 10 तस्वीरों ने विकास के दावों की खोल दी पोल

पानी में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने की कोशिश की जा रही है. पानी का कर्फ्यू लागू है और सहमा हुआ सा शहर अपनी बेबसी पर रोता नजर आ रहा है. बिहार में बारिश और बाढ़ से बिगड़े हालात को देखते हुए स्कूलों और कॉलेजों की दो दिन की छुट्टी कर दी गई है. पटना दरिया बन चुका है.

Input : Ajj Tak

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