सुबह आंख खुलते ही सोशल मीडिया पर एक लड़की की अ’धजली ला’श देखना हर उस मां बाप के लिए दुखद है जिनकी बेटियां हर रोज पढ़ने या नौकरी के लिए घरों से निकलती हैं। हैदराबाद में पशु डॉक्टर की रे’प के बाद ज’लाकर ह’त्या कर दी गई और इस घ’टना से पूरे देश में न केवल रोष और त’कलीफ बढ़ी है बल्कि एक ड’र और शंका फिर से ताजी हुई है। ऐसी घटना’एं न सिर्फ संवेदनाओं को झ’कझरोती है बल्कि आगे बढ़ रही उन तमाम लड़कियों के मनोबल को भी कम करती हैं जिन्होंने ठान लिया था कि वो पुरुषों से किसी मायने में कम नहीं है। लेकिन वो वाकई इन जैसों की बराबरी तो कभी कर ही नहीं सकतीं।
प्रियंका पेशे से पशु डॉक्टर थीं, वो अपने प्यार और देखभाल से बेजुबानों को भी प्रेम करना सिखा देती थीं लेकिन वो नाकाम रहीं उन पाश्विक प्रवृत्ति के हैवानों का इलाज करने में जो जानवरों से कहीं ज्यादा बदतर हैं। प्रियंका अपने घर से 30 किलोमीटर दूर के वेटनरी हॉस्पिटल में काम करती थीं वो हर दिन शम्शाबाद टोल प्लाजा तक अपनी स्कूटी से जाती थीं और वहां से कैब करती थीं। बुधवार को जब वो घर से निकली थीं तो उन्हें नहीं पता था कि अब दूसरी सुबह उनके नसीब में नहीं होगी। रात को घर लौटते समय उनकी स्कूटी का टायर पंचर हो गया और उन्होंने फोन करके अपनी बहन को बताया कि एक आदमी उनकी मदद के लिए आया है। दोबारा कॉल करके प्रियंका ने कहा कि उस आदमी का कहना है कि सारी दुकानें बंद हो चुकी हैं और गाड़ी को कहीं और ले जाना होगा। ये रात के 9 बजकर 22 मिनट की बात थी। प्रियंका ने ये भी बताया कि आस-पास कई अजनबी लोग इकट्ठा हो रहे हैं और वो उसे अजीब तरह से घूर रहे हैं, उसे अब डर लग रहा है। इसके बाद प्रियंका का फोन ऑफ हो गया।
परिवार के लोगों ने दूसरे गुमशुदा की रिपोर्ट भी दर्ज कराई। दूसरे दिन सुबह एक किसान ने जली हुई लड़की की लाया देखी और पुलिस को बताया। अधजले स्कार्फ और गोल्ड पैंडेट से शव की पहचान हो चुकी थी। इस देश में एक सूनसान सड़क पर स्कूटी का खराब होना इतना घातक हो सकता है ये किसी ने सोचा भी नहीं होगा।
बीते मंगलवार को केरल में असम के प्रवासी मजदूर ने 42 वर्षीय महिला की कथित तौर पर बलात्कार के बाद पीट-पीटकर हत्या कर दी। आरोपी ने महिला से बलात्कार किया और इसके बाद फावड़े से लगातार उसके चेहरे और सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी। बुधवार को ही उत्तरप्रदेश के चित्रकूट के एक गाँव से नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार की घटना सामने आई है। राजस्थान में एक मुस्लिम महिला को पति ने पहले तीन तलाक दिया और उसके बाद ससुर समेत सभी रिश्तेदारों ने उसका रेप किया ये कहकर कि अब वो बहू नहीं है। निर्भया, दामिनी, फलक, गुड़िया, कठुआ, इंदौर, दिल्ली, पठानकोट, अजमेर, न जाने कितने नाम, कितने शहर, कितनी विभत्स कहानियां हैं और इनके बाद हमारा खून दो, तीन दिनों के लिए खौलता भी है लेकिन उसके बाद हम भूल जाते हैं।
हाल ही में आई राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड 2017 की रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में 32,559 रेप केस दर्ज हुए। इसमें मध्य प्रदेश पहले और उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर था। बीते कुछ समय से रेप के बाद हत्या के मामले भी बढ़े हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला दिया था कि रेप के दोषी की पहचान हो जाने पर उसे तुरंत सजा का प्रावधान दिया है।
हमारे देश हर मुद्दे को लेकर नए-नए कानून बनते हैं, उनमें लगातार संशोधन भी होते हैं लेकिन बलात्कार जैसे गंभीर मुद्दे पर सरकारों की नीदें नहीं टूटती, उनके लिए न कानूनों में संशोधन होते हैं और न कड़े कानून बनते हैं। निर्भया केस के बाद बने फास्ट ट्रैक कोर्ट और जेएस वर्मा कमिटियां सुस्त पड़ी है। रेप के आरोपियों की सजाएं कितनी हल्की हैं इसका साक्षात उदाहरण कठुआ केस था। बीते वर्षों में जिस तरह से रेप की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है उसके बाद तो कम से कम महिला सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सरकारों को सजग होना ही चाहिए। या फिर हम लौट चले दोबारा उसी जमाने में जहां बहू बेटियों को दहलीज लांघने की इजाजत नहीं थी कम से कम इससे सुरक्षित तो रहेगीं।
हमारे यहां रेप के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं क्योंकि आरोपियों में रत्ती भर भी डर नहीं है, दिन दहाड़े बलात्कार के बाद लड़की के हाथ काट दिए जाते हैं, सर कुचल दिया जाता है, उसे अंगों को क्षत-विक्षत कर दिया जाता है। आरोपियों का पता चलने पर हम इनपर धर्म का अमली जामा पहचानने लगते हैं, मुस्लिम लड़की के रेप पर मुस्लिम समाज का ही खून खौलेगा और हिंदू पर हिंदू का। ये सीमाएं भी हमीं ने बनाई हैं, हमारे यहां अब बलात्कार पीड़िताएं नहीं होती बल्कि उनका धर्म होता है, रेप अपराधियों का भी धर्म होता है इसलिए ये घटनाएं धर्म की राजनीति के भेंट चढ़ जाती है और ये खबरें अब इतनी आम हो चुकी हैं कि मीडिया को भी इनमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखती क्औयोंकि ये टीआरपी बटोरने में नाकाम हैं। इनपर चैनल कोई बहस भी नहीं कराते क्योंकि ये मुद्दा उनके लिए चटकारे लेने वाला नहीं है। रही बात सोशल मीडिया पर तेजी से आए तूफान की तो वो भी दो-चार दिन में थम जाता है और हम मशगूल हो जाते हैं पाकिस्तान में टमाटर की कमी और अभिनेत्रियों की शादियों के एक्सक्लूजिव तस्वीरों को देखने में। और अगले दिन फिर किसी प्रियंका की लाश मिलती हैं कभी जली हुई तो कभी कुचली हुई।
Input : india web
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