गोविंदा ने कादर खान को पिता समान बताया तो बेटे ने सुनाई खरी-खोटी

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वेटरन एक्टर और कॉमेडियन(Comedian) कादर खान(81) का निधन 31 दिसंबर को कनाडा में हुआ और 2 जनवरी को वहीं उन्हें सुपुर्द-ए- खाक किया गया। पिता की मौत के बाद कादर खान (Kader Khan) के बेटे सरफराज (Sarfaraz) ने मीडिया के साथ इंटरेक्ट किया। इस बातचीत में सरफराज ने बताया कि जब उनके पिता तीनों बेटों के साथ कनाडा चले गए तो किस तरह इंडस्ट्री ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया? सरफराज ने कहा – “यह वाकई दुखद है कि कनाडा में अब्बा की मौत के बाद भी इंडस्ट्री के ज्यादातर लोगों ने फोन तक करने की जहमत नहीं उठाई। इंडस्ट्री में कई ऐसे लोग हैं, जो अब्बा के काफी करीबी थे। लेकिन अब्बा जिन्हें सबसे ज्यादा चाहते थे, वे बच्चन साब (अमिताभ बच्चन) थे। मैं अब्बा से पूछता था कि वे इंडस्ट्री से सबसे ज्यादा किसे याद करते हैं तो अक्सर उनका जवाब अमिताभ बच्चन होता था। मैं जानता हूं कि यह म्यूच्यूअल प्यार था। मैं चाहता हूं कि बच्चन साब को यह पता चले कि मेरे अब्बा ने उनके बारे में आखिरी वक्त तक बात की।”

गोविंदा(Govinda) के बयान पर भड़के सरफराज

– 80 और 90 के दशक में कादर खान डायरेक्टर डेविड धवन (David Dhawan), एक्टर गोविंदा(Govinda) और शक्ति कपूर(Shakti kapoor) के बेहद करीब थे। कादर खान की मौत के बाद गोविंदा ने कहा था कि वे उन्हें अपने पिता की तरह मानते थे। जब सरफराज से गोविंदा के बयान पर रिएक्शन मांगा गया तो वे भड़क गए। उन्होंने कहा, “कृपया गोविंदा से पूछिए कि उन्होंने अपने पिता समान शख्स की सेहत के बारे में कितनी बार पूछताछ की? क्या उन्होंने अब्बा की मौत के बाद भी हमें फोन करने की जहमत उठाई? हमारी फिल्म इंडस्ट्री अब ऐसी ही हो गई है। यहां उनके लिए कोई भावनाएं नहीं हैं जो इंडस्ट्री में अपना अमूल्य योगदान देने के बाद कुछ समय के लिए दूर चले गए। बड़े स्टार्स इन रिटायर हो चुके वेटरन एक्टर्स के साथ फोटो खिंचाते देखे जा सकते हैं। लेकिन यह प्यार सिर्फ फोटो तक ही सीमित रहता है। इससे ज्यादा कुछ नहीं। ललिता पवारजी और मोहन चोटीजी को याद कीजिए कि किन बुरे हालात में उनकी मौत हुई। किस्मत से मेरे अब्बा के तीन बेटे थे, जिन्होंने उनकी देखभाल की। लेकिन उनके बारे में क्या, जो बिना आर्थिक और इमोशनल सपोर्ट के चल बसे।”

गोविंदा की पोस्ट पर भड़के कादर खान के बेटे सरफराज, बोले- 'यहां कोई किसी का नहीं होता'

बहुत दर्दनाक थे कादर खान के आखिरी साल

– सरफराज ने आगे कहा, “मेरे अब्बा के आखिरी साल बहुत दर्द भरे थे। वे Degenerative Disease से जूझ रहे थे, जिसने उन्हें कुछ करने लायक नहीं छोड़ा। यहां टोरंटो में उन्हें सबसे अच्छा उपचार मिला। मेरे अब्बा ने हिंदी सिनेमा में बहुत बड़ा योगदान दिया है और मैं पूरी दुनिया के साथ-साथ उनके फैन्स को भी आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम इंडस्ट्री को उन्हें भूलने नहीं देंगे।”

Input : Dainik Bhaskar