बिहार अब सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। राज्य में ऐसी हाईटेक सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है, जिन पर जरूरत पड़ने पर हवाई जहाज और लड़ाकू विमान भी उतर सकेंगे। इसके लिए तीन प्रमुख सड़कों की डीपीआर में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) या हाईवे रनवे का प्रावधान शामिल किया गया है।

नेपाल सीमा के नजदीक स्थित होने के कारण इन परियोजनाओं को रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पटना से पूर्णिया तक बनने वाले लगभग 245 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे में ELF की सुविधा विकसित की जाएगी। इस परियोजना पर करीब 18,242 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसी तरह, गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच प्रस्तावित 420 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे में भी इमरजेंसी लैंडिंग की व्यवस्था की जाएगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 23,434 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा, रामजानकी मार्ग पर सीतामढ़ी के आगे नेपाल के भिट्ठामोड़ से नरहिया तक के हिस्से में भी ELF विकसित करने का प्रस्ताव है।

इन सभी परियोजनाओं को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और भारतीय वायुसेना के सहयोग से तैयार किया जाएगा, ताकि युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में विमानों का संचालन संभव हो सके। आमतौर पर इस तरह के सड़क रनवे की लंबाई करीब 3 से 5 किलोमीटर तक होती है।

उच्च तकनीकी मानकों पर होगा निर्माण
ऐसे रनवे के लिए सड़क निर्माण सामान्य हाईवे से काफी अलग और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित होता है। सड़क का चयनित हिस्सा पूरी तरह सीधा और समतल होना चाहिए, जहां जमीन मजबूत हो और किसी प्रकार का धंसाव या ढलान न हो। साथ ही, आसपास बिजली के खंभे, मोबाइल टावर या अन्य अवरोध नहीं होने चाहिए।

सड़क के दोनों किनारों पर पर्याप्त जगह होनी चाहिए, जहां जरूरत पड़ने पर पोर्टेबल लाइटिंग सिस्टम लगाकर विमानों को सुरक्षित लैंडिंग के लिए गाइड किया जा सके। डिवाइडर को भी इस तरह डिजाइन किया जाता है कि उन्हें तुरंत हटाया जा सके। इसके अलावा, अस्थायी रूप से एयरबेस जैसी सुविधाएं भी यहां विकसित की जा सकती हैं।

भारत में पहले भी हो चुका है प्रयोग
देश में पहली बार 21 मई 2015 को यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क रनवे का परीक्षण किया गया था, जब मिराज-2000 लड़ाकू विमान ने सफलतापूर्वक टचडाउन किया था। इसके बाद असम में भी इस तरह की सुविधा विकसित की जा चुकी है।

भारत के अलावा सिंगापुर, स्वीडन, फिनलैंड, जर्मनी, पोलैंड और ताइवान जैसे देशों में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा चुका है। वहीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान के पास भी ऐसे दो हाईवे रनवे मौजूद हैं, जिनका उपयोग आपातकालीन परिस्थितियों में किया जा सकता है।
इस पहल के जरिए बिहार न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाएगा।
Input : Hindustan








