बिहार विश्वविद्यालय में एकबार तय की जा चुकी परीक्षा तिथि अब नहीं बदलेगी
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बिहार विश्वविद्यालय में एकबार तय की जा चुकी परीक्षा तिथि अब नहीं बदलेगी

Santosh Chaudhary

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बिहार विश्वविद्यालय में अध्ययनरत लाखों छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। राजभवन ने कह दिया है कि परीक्षा की तिथि एकबार निर्धारित होने के बाद किसी भी परिस्थिति में उसकी अनुमति के बिना बदलाव नहीं हो सकेगा। लंबित परीक्षाओं का आयोजन तथा परीक्षाफल का प्रकाशन जून, 2020 तक हर हाल में करने का आदेश भी राजभवन ने दिया है। छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष बसंत कुमार सिद्धू ने कहा है कि परीक्षा तिथि में बार-बार बदलाव को लेकर ऊहापोह में रहने को विवश विद्यार्थियों के लिए वाकई यह बड़ी राहत वाली बात है।

तमाम कुलपतियों की बैठक में कुलाधिपति सह राज्यपाल ने आदेशित किया कि परीक्षाओं तथा परीक्षाफल के प्रकाशन की जो तिथि निर्धारित की जा चुकी है, उसमें किसी भी प्रकार का संशोधन राजभवन की अनुमति के बिना नहीं किया जाए। निर्धारित तिथि पर परीक्षा आयोजन नहीं होने तथा उसमें विलंब के लिए दोषी कर्मचारी तथा पदाधिकारियों पर कार्रवाई होगी। सत्र 2019-22 के स्नातक सत्र में प्रवेश परीक्षा की रस्साकशी को लेकर नामांकन में काफी विलंब हो गया है। हालांकि, प्रवेश परीक्षा नहीं लेकर सीधे नामांकन की प्रक्रिया आखिरकार शुरू हुई है। राजभवन को विश्वविद्यालय ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक अभी उसके समक्ष स्नातक में 18 पीजी में 10 व प्रोफेशन कोर्स में चार परीक्षा व रिजल्ट कराने का दायित्व है। फिलहाल विलंबित सत्र का जो हाल है उसपर अधिकारी बताते हैं कि कोई चार, कोई छह तो कोई एक साल सत्र विलंब है।

स्नातक स्तर की ये परीक्षाएं और उनका रिजल्ट लंबित

सत्र 2016-19 थर्ड पार्ट में परीक्षा की संभावित तिथि 28 सितंबर है। परीक्षाफल घोषित होने की तिथि 30 नवंबर, 2019 निर्धारित की गई है। सत्र 2017-20 सेकेंड पार्ट 15 अक्टूबर, 2019 तथा रिजल्ट प्रकाशन 30 नवंबर, 2019 तथा इसकी थर्ड पार्ट की परीक्षा की संभावित तिथि सात अप्रैल, 2020 और सात जून को रिजल्ट का प्रकाशन। सत्र 2018-21 पार्ट वन की परीक्षा 15 नवंबर, 2019 रिजल्ट प्रकाशन 30 दिसंबर, 2019, सेकेंड पार्ट की परीक्षा 7 मई, 2020 तथा रिजल्ट प्रकाशन 7 जुलाई, 2020 थर्ड पार्ट की परीक्षा 7 अप्रैल, 2021 तथा रिजल्ट प्रकाशन 7 जून, 2021 तय की गई है। इसी तरह चालू सत्र 2019-22 जिसमें अभी नामांकन की प्रक्रिया चालू है उसमें पार्ट वन की परीक्षा की तिथि भी 25 मार्च, 2020 तथा रिजल्ट प्रकाशन की तिथि 25 मई, 2020 तय की जा चुकी है। सेकेंड पार्ट की परीक्षा 7 मार्च, 2021 तथा रिजल्ट 7 मई, 2021 तय है। जबकि, थर्ड पार्ट की परीक्षा 7 मार्च, 2022 और रिजल्ट प्रकाशन की तिथि 7 मई 2022 तय है।

पीजी सेशन ही यहां काफी विलंब

सत्र 2018-20 के स्नातकोत्तर कक्षा में अभी नामांकन का दौर ही चल रहा है। यह सत्र सालभर विलंब हो चुका है। सत्र 2017-19 थर्ड सेमेस्टर का रिजल्ट 30 अक्टूबर, 2019, फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षा 15 नवंबर से तथा रिजल्ट 30 दिसंबर, 2019 को। सत्र 2018-20 का फस्र्ट सेमेस्टर की परीक्षा 25 नवंबर, 2019 से रिजल्ट 30 दिसंबर, 2019। सेकेंड सेमेस्टर 20 मार्च, 2019 तथा रिजल्ट प्रकाशन 30 अप्रैल, 2020। थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा एक जुलाई, 2020 से तथा रिजल्ट एक अगस्त, 2020 को। फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षा एक अक्टूबर, 2020 तथा रिजल्ट 30 दिसंबर 2020। सत्र 2019-21 फस्र्ट सेमेस्टर के लिए एक फरवरी, 2020 तक नामांकन, पांच मई, 2020 से परीक्षा तथा पांच जून, 2020 तक रिजल्ट। सेकेंड सेमेस्टर की परीक्षा 7 अगस्त तथा रिजल्ट 7 सितंबर तक। थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा 7 नवंबर, 2020 तक तथा रिजल्ट 7 दिसंबर, 2020 तक। इसी तरह फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षा 7 अप्रैल, 2021 तक तथा 7 मई 2021 तक रिजल्ट प्रकाशित कर दिया जाएगा।

प्रोफेशनल कोर्स की यह है स्थिति

सत्र 2018-20 में फस्र्ट ईयर में 9 सितंबर, 2019 से ही परीक्षा की तिथि तय थी। इसका रिजल्ट 30 अक्टूबर, 2019 तक दिया जाना है। सेकेंड ईयर में 20 अप्रैल, 2020 तक परीक्षा तथा रिजल्ट 30 जून, 2020 तक। सत्र 2019-21 में फस्र्ट ईयर में 25 मार्च, 2020 तक परीक्षा तथा रिजल्ट 25 मई, 2020 तक।

Input : Dainik Jagran

MUZAFFARPUR

बा’लिका गृ’ह कां’ड में साकेत को’र्ट आज सुना सकता है फै’सला

Santosh Chaudhary

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मुजफ्फरपुर बा’लिका गृ’ह यौ’न हिं’सा कां’ड में साकेत को’र्ट गुरुवार को फै’सला सुना सकता है। मुख्य अ’भियुक्त ब्रजेश ठाकुर समेत कुल 20 लोगों पर पॉ’क्सो समेत विभिन्न धा’राओं में मुक’ दमा चल रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ इस मा’मले की सुनवाई कर रहे हैं।

अभियुक्तों में बालिकागृह के कर्मचारी और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। यह भी संयोग ही है कि बाल दिवस (14 नवंबर) को पीड़ित बच्चों को न्याय मिलेगा। हालांकि वकीलों की हड़ताल के कारण फैसला टलने की भी आशंका है। पिछले साल मई में मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह में कई बच्चियों से दुष्कर्म व यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 23 फरवरी से इस मामले की साकेत कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही है। मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर पर पॉक्सो व दुष्कर्म समेत कई धाराओं में मामला चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया था। सभी 20 आरोपितों को 23 फरवरी को कड़ी सुरक्षा में दिल्ली लाया गया था।

वकीलों की हड़ताल से असमंजस की स्थिति : पुलिस से हुए विवाद को लेकर दिल्ली में इस समय वकीलों की हड़ताल चल रही है। ऐसे में फैसले को लेकर असमंजस की स्थिति है। हालांकि फैसले के समय उपस्थित रहने के लिए दिल्ली पहुंचे बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने मोबाइल पर बताया कि कोर्ट में यह मामला सूचीबद्ध है। इसमें फैसला सुनाए जाने की तिथि निर्धारित है।

ये हैं आरोपित : ब्रजेश ठाकुर, बाल संरक्षण इकाई के तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी, बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिलीप वर्मा, सदस्य विकास कुमार, बालिका गृह की कर्मचारी इंदु कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी, विजय कुमार तिवारी, गुड्डू कुमार पटेल, किशन राम उर्फ कृष्णा, डॉ. अश्विनी उर्फ आसमानी, विक्की, रामानुज ठाकुर, रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर व साइस्ता परवीन उर्फ मधु।

बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों व कर्मचारियों के हस्ताक्षर की कराई पहचान

सीबीआइ ने बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों व कर्मचारियों के हस्ताक्षर की पहचान कराई है। ये वे अधिकारी हैं, जिनकी विभागीय संचिकाओं में कई मौके पर हस्ताक्षर हैं। इसके लिए इकाई के दो कर्मचारियों को सीबीआइ ने पटना तलब किया था। इनमें बाल संरक्षण इकाई के तत्कालीन सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा, रोजी रानी, बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन सहित अन्य शामिल हैं। इसमें से रोजी रानी व रवि रोशन फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। वहीं दिवेश कुमार शर्मा ने ही इस मामले में महिला थाना में केस दर्ज कराया था। सीबीआइ की जांच में बाल संरक्षण इकाई शुरू से ही निशाने पर रही है। सीबीआइ की टीम ने कई बार यहां आकर जांच की तथा संचिकाओं को अपने साथ ले भी गई। सीबीआइ यह जानना चाह रही थी कि बाल संरक्षण इकाई की बैठकों व कार्यक्रमों में ब्रजेश ठाकुर व साइस्ता परवीन उर्फ मधु किस हैसियत से भाग लेती थी। दोनों के हस्ताक्षर की पहचान भी कर्मचारियों से पहले कराई गई। इकाई के अधिकारियों व कर्मचारियों के फोटो की पहचान भी पीड़िताओं से कराई गई।

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Input : Dainik Jagarn

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MUZAFFARPUR

कटरा में दु’ष्क’र्म पी’ड़िता काे नहीं मिली महिला थाने में मदद, बच्चा है फिर भी मांगा जा रहा है गवाह

Santosh Chaudhary

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थाना के एक गांव में रे’प की शि’कार बिन ब्या’ही मां के मा’मले की जांच करने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा बुधवार काे टीम के साथ उसके घर पहुंची। करीब एक घंटे तक बंद कमरे में पी’ड़िता समेत उसके परिजनों से बातचीत की और  उनका बयान कलमबद्ध किया।

डीएम, एसएसपी के साथ पूरे स्थिति पर सर्किट हाउस में आयोग के अध्यक्ष ने विमर्श कर अवयस्क  निर्देश दिया। पीड़िता के घर पर चाैकीदार की तैनाती कर दी गई। महिला आयोग  की अध्यक्ष ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि रात में खाना देने गई पीड़िता के साथ माैलवी ने नशीली दवा पिला कर दुष्कर्म किया। मुंह खोलने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी। करीब दो माह पूर्व पीड़िता ने नवजात को जन्म दिया। गांव पहुंचने के बाद गांव वालों ने पीड़िता के घर पर ईंट-पत्थर फेंके। हद तो तब हो गई जब महिला थाना के अधिकारियों ने पीड़िता के परिजनों को मामले की सुनवाई के लिए 4 गवाह लाने की बात कही। आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि नवजात ही इसका मुख्य गवाह है। उन्होंने पीड़िता को सुरक्षा दिलाने के साथ ही न्याय दिलाने का भराेसा दिया। नवजात का डीएनए टेस्ट कराने की भी बात कही है।

गांव वालों के भय से एक महीने तक किराए के मकान में शहर में रहना पड़ा

पीड़िता ने महिला थाना में 3 जुलाई 2019 को आवेदन सौंप कर न्याय की गुहार लगाई थी। पुलिस को सौंपे आवेदन में पीड़िता ने बताया कि 16 जनवरी 2019 काे माैलवी मकबूल ने खाना देने के बहाने उसे बुलाया। फिर रात 9 बजे कमरे में बंधक बना उसके साथ दुष्कर्म किया। कुछ दिनों बाद गांव के ही मो. सोहैब ने घर में बिजली के तार को ठीक करने व शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि गर्भवती होने पर एक तरफ जहां बिजली मिस्त्री ने शादी से इनकार कर दिया। वहीं माैलवी गांव से फरार हो गया। घटना के संबंध में पीड़िता के परिजन बताते हैं कि कोई गांव छाेड़ने की धमकी देता है ताे कोई देर रात घर पर पत्थर चलाता है। कोई बच्चे को खुले बाजार में बेच दिए जाने की धमकी देता है। उसकी नाबालिग पुत्री के बिन ब्याही मां बन जाने की बात सुन गांव के लोग इतने आक्रोशित थे कि मजबूरी बस उन्हें करीब एक माह तक किराए के मकान में शहर में रहना पड़ा था।

Input : Dainik Bhaskar

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BIHAR

महागठबंधन व वामदलों ने निकाला आ’क्रोश मार्च, तेजस्वी नहीं हुए शामिल

Himanshu Raj

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केंद्र व राज्य सरकार के खि’लाफ बुधवार को वामदलों और महागठबंधन ने आ’क्रोश मार्च निकाला। रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की अगुआई में निकले मार्च में राजद नेता तेजस्वी यादव शामिल नहीं हुए।

आक्रोश मार्च गांधी मैदान से कलेक्ट्रेट तक निकाला गया। इसमें राजद की ओर से प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी मौजूद रहे। हम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, वीआईपी के मुकेश सहनी समेत महागठबंधन के कई नेता मार्च में शामिल हुए। इस दौरान नेताओं ने केंद्र और राज्यसरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हमने कानून व्यवस्था, बुनियादी नागरिक सुविधाएं, रोजगार, खेती आदि को मुद्दा बनाया है। ऐसे सभी मोर्चों पर देश और राज्य की स्थिति बड़ी खराब है।

Input: Danik Bhaskar

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