नरेंद्र मोदी के साथ सोमवार को हुई मुख्‍यमंत्रियों की बैठक में बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish kumar) ने कोटा मामले (Kota students Issue) पर सख्‍त रुख अपनाया. राजस्‍थान के कोटा शहर में कोचिंग करने वाले बच्‍चों को कुछ राज्‍यों द्वारा निकालने के मुद्दे पर बोले नीतीश बोले- क्या पांच लोग सड़क पर आकर मांग करने लगेंगे तो सरकार झुक जाएगी? सरकार ऐसे काम करती है? ये सब संपन्न परिवारों के बच्चे हैं उनको वहां क्या दिक्कत है? दस हजा़र बच्चों को उठा लाए. इससे बाकी राज्यों पर दबाव आ रहा है और राजस्थान की अर्थव्यवस्था को भी नुक़सान हो रहा है. उन्‍होंने कहा कि नीतीश ने कहा कि इस मामले में एक नीति होना चाहिए.

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के कारण राजस्‍थान के कोटा में कोचिंग के लिए पहुंचे (Kota students Issue) कई राज्‍यों के स्‍टूडेंट्स फंस गए हैं. कुछ राज्‍यों ने विशेष बसें भेजकर अपने स्‍टूडेंट्स को वापस बुलाया है. हालांकि इस दौरान सोशल डिस्‍टेंसिंग का सही ढंग से पालन नहीं हो पाने के कारण कोरोना का संक्रमण बढ़ने की आशंका भी कई स्‍तर पर उठाई जा चुकी है।

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार कोरोना की महामारी के बीच कुछ राज्‍यों द्वारा स्‍टूडेंट्स को इस तरह बुलाने का विरोध कर चुके हैं. जब यूपी ने कोटा से अपने छात्रों को बस से बुलाने का फैसला किया था तो नीतीश ने इस कदम को “लॉकडाउन के साथ अन्याय” बताया था. बिहार के सीएम ने यह भी कहा, ‘हमारे पास एक जैसी नीति होनी चाहिए. छात्र हर जगह हैं. बात केवल छात्रों के बारे में भी नहीं है, आपको फंसे हुए प्रवासी मजदूरों के बारे में सोचना है लेकिन जब एक राज्‍य से दूसरे राज्‍य की यात्रा पर प्रतिबंध लगा है।

Input : Indianamo.com

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